NPS tax benefits: जानें, टैक्स बेनिफिट्स के लिहाज से कैसा ऑप्शन है NPS - tax benefits of nps - News Summed Up

NPS tax benefits: जानें, टैक्स बेनिफिट्स के लिहाज से कैसा ऑप्शन है NPS - tax benefits of nps


हाइलाइट्स 10 साल पहले जब NPS को आम लोगों के लिए खोला गया था, नियम काफी कड़े थे और टैक्स के लिहाज से अच्छा नहीं थानियमों में बदलाव कर इसे ज्यादा टैक्स एफिशिएंट बनाया गया है, इसमें विकल्प भी बढ़ाए गए हैंकई चार्जेज के बावजूद यह काफी कम लागत वाला इंस्ट्रूमेंट हैNPS में आप कॉरपस का 75 प्रतिशत तक हिस्सा इक्विटीज में लगा सकते हैं, लंबी अवधि में कहीं ज्यादा तेजी से वेल्थ क्रिएशन का मौकाकरीब 10 साल पहले जब NPS को आम लोगों के लिए खोला गया था, तो इसके नियम काफी कड़े थे और इसका स्ट्रक्चर भी टैक्स के लिहाज से अच्छा नहीं था। हाल के वर्षों में इसके नियमों में बदलाव कर इसे ज्यादा टैक्स एफिशिएंट बनाया गया है। इसमें विकल्प भी बढ़ाए गए हैं। इसके साथ ही, कई चार्जेज के बावजूद यह काफी कम लागत वाला इंस्ट्रूमेंट है। NPS में आप कॉरपस का 75 प्रतिशत तक हिस्सा इक्विटीज में लगा सकते हैं। इससे लंबी अवधि में कहीं ज्यादा तेजी से वेल्थ क्रिएशन की गुंजाइश बनती है। दूसरी ओर, EPF अभी इन्क्रीमेंटल कॉरपस का केवल 15 प्रतिशत हिस्सा ही इक्विटीज में निवेश करता है। आप इन तरीकों से NPS का बेहतर ढंग से फायदा उठा सकते हैं:इक्विटी फंड्स से कैपिटल गेन्स अगर एक लाख रुपये से ज्यादा हो तो उस पर 10 प्रतिशत की दर से टैक्स लगाया जाता है, वहीं NPS की टैक्सेबिलिटी धीरे-धीरे दूसरी दिशा में जा रही है। पहले जमा रकम के 60 प्रतिशत हिस्से के केवल 40 प्रतिशत की ऐसी एकमुश्त निकासी की इजाजत रिटायरमेंट के समय थी, जिस पर टैक्स नहीं लगता था। बाकी 20 प्रतिशत हिस्से पर सामान्य दर से टैक्स लगाया जाता था। अब पूरे 60 प्रतिशत हिस्से को टैक्स फ्री कर दिया गया है। बाकी 40 प्रतिशत हिस्सा अब भी अनिवार्य रूप से ऐन्युइटी में लगाना होगा, जिस पर टैक्स लगेगा।NPS इस तरह EEE और EET (एग्जेम्प्ट-एग्जेम्प्ट-टैक्सेबल) व्यवस्था के बीच में है। कुछ लोगों को अनिवार्य रूप से ऐन्युइटी खरीदना अच्छा नहीं लगता, लेकिन यह फायदेमंद भी हो सकता है। सब्सक्राइबर को अनिवार्य रूप से ऐन्युइटी में निवेश कराने से यह पक्का होता है कि सब्सक्राइबर अपने रिटायरमेंट कॉरपस को दूसरे लक्ष्यों के लिए खर्च नहीं कर देगा। HDFC पेंशन फंड्स के सीईओ सुमित शुक्ला ने कहा, 'ऐन्युइटी कंपोनेंट होने से सब्सक्राइर की लंबी उम्र में वित्तीय जोखिम कम होने की गुंजाइश बनती है।'NPS में किए गए इन्वेस्टमेंट पर सेक्शन 80CCD(1) के तहत डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है, हालांकि सेक्शन 80सी के तहत अधिकतम डेढ़ लाख रुपये की सीमा के दायरे में ही ऐसा किया जा सकता है।सेल्फ एंप्लॉयड लोग अपनी ग्रॉस इनकम के 20 प्रतिशत तक के कॉन्ट्रिब्यूशन पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। इसमें भी डेढ़ लाख रुपये की अधिकतम सीमा का ध्यान रखना होगा। इसके अलावा सैलरीड और सेल्फ-एंप्लॉयड, दोनों तरह के लोग सेक्शन 80CCD(1B) के तहत अतिरिक्त 50000 रुपये तक डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं।30 पर्सेंट टैक्स ब्रैकेट वाले लोगों के लिए इस तरह 156000 रुपये की अडिशनल टैक्स सेविंग्स का इंतजाम होता है। कुलमिलाकर देखें तो सब्सक्राइर NPS में कॉन्ट्रिब्यूशन के लिए 2 लाख रुपये तक डिडक्शन क्लेम कर सकता है।इसके अलावा सब्सक्राइबर टैक्स लायबिलिटी और कम कर सकता है, बशर्ते उसका एंप्लॉयर उसकी बेसिक सैलरी के 10 प्रतिशत तक रकम सेक्शन 80CCD(2) के तह NPS में डाले। इस डिडक्शन के लिए कोई ऊपरी सीमा नहीं है। अगर आपकी बेसिक सैलरी 50000 रुपये महीना हो और आप 30 प्रतिशत वाले टैक्स ब्रैकेट में हों तो आप टैक्स देनदारी करीब 18720 रुपये घटा सकते हैं, बशर्ते आपकी कंपनी NPS में बेसिक सैलरी का 10 प्रतिशत हिस्सा दे। फाइनैंशल प्लैनर्स का कहना है कि अगर एंप्लॉयर पैकेज के रूप में NPS ऑफर कर रहा हो तो सैलरीड लोगों को यह मौका चूकना नहीं चाहिए। शाह ने कहा, 'अगर बचत के मामले में आप अनुशासित न हों तो NPS के तहत मिल रहे तमाम अवसरों का फायदा उठा लेना चाहिए।'


Source: Navbharat Times January 26, 2020 05:15 UTC



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