क्या होते हैं बांड बांड किसी कंपनी या सरकार के लिए राशि जुटाने का एक माध्यम है। बांड से जुटाए गई राशि कर्ज की श्रेणी में आती है। कोई कंपनी जहां अपने कारोबार के विस्तार के लिए बांड से पैसे जुटाती है तो केंद्र या राज्य सकार भी अपने खर्च के लिए समय-समय पर बांड जारी करती है। इस प्रक्रिया से राशि जुटाने वाली संस्था एक निश्चित समय के लिए रकम उधार लेती है और निश्चित रिटर्न यानी ब्याज देने के साथ मूलधन वापस करने की गारंटी देती है। यह निवेशकों के लिए निश्चित आमदनी के लिए निवेश का एक सुरक्षित साधन है।क्या होते हैं म्युनिसिपल बांड म्युनिसिपल या नगर निगम बांड शहरी स्थानीय निकायों द्वारा जारी किए जाते हैं। शहर में विकास कार्यों को जारी रखने के लिए धन की जरूरत इससे पूरी की जाती है। इस तरह से बांड जारी कर नगर निगम पैसा जुटाते हैं और उसे शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कार्यों पर खर्च करते हैं। पूंजी बाजार के नियामक सेबी के अनुसार सिर्फ वही नगर निगम ऐसे बांड जारी कर सकते हैं, जिनका नेटवर्थ लगातार 3 वित्त वर्ष तक निगेटिव न रहा हो। साथ ही, पिछले एक साल में उन्होंने कोई लोन डिफाल्ट न किया हो।क्या है ब्याज दर म्युनिसिपल बांड के ब्याज दर कई फैक्टर्स पर निर्भर करते हैं। अधिकतर बांड के रेट ट्रेजरी बांड यील्ड से जुड़े होते हैं। चूंकि यह बांड सरकार की तरफ से जारी किए जाते हैं, इसलिए इस पर निवेश रिस्क फ्री होते हैं। हालांकि नगर निगम के बांड में सीधे सरकारी बांड के मुकाबले ज्यादा रिस्क होते हैं, इसलिए म्युनिसिपल बांड पर सरकार के बांड के मुकाबले थोड़ा ज्यादा ब्याज मिलता है। लखनऊ नगर निगम के बांड पर 8.5 फीसदी का ब्याज ऑफर किया गया था।कैसे खरीदें म्युनिसिपल बांड अधिकतर निवेशक किसी फाइनेंसियल एडवाइजर (Financial Advisors) के जरिए म्युनिसिपल बांड खरीद सकते हैं। वह चाहें तो बैंक या फिर सीधे नगर निगम से भी बांड खरीद सकते हैं। कई लोग बांड फंड के जरिए भी म्युनिसिपल बांड में निवेश करते हैं। बांड लेने की प्रक्रिया क्या होगी, इसकी घोषणा नगर निगम कर देते हैं। लखनऊ नगर निगम के बांड को बीएसई बांड प्लेटफॉर्म पर जारी किया गया था।
Source: Navbharat Times December 29, 2020 08:37 UTC