\Bचांदिवली में एक चर्चा यह भी\Bनफरत की राजनीति हमेशा सुर्खियों में रहती है, लेकिन सद्भाव का काम खामोशी से चलता रहता है। यही वजह है कि भाईचारे का तानाबाना नफरत के तमाम प्रसंगों के बावजूद बना रहता है। ऐसे में चांदिवली के विधायक नसीम खान द्वारा अपने चुनाव क्षेत्र में एक प्राचीन हनुमान मंदिर का जीर्णोद्धार कराया जाना एक मिसाल है। संन्यास आश्रम के महामंडलेश्वर खुद इस मंदिर के जीर्णोद्धार समारोह में शामिल हुए। हालांकि जीर्णोद्धार का काम चुनाव से कई महीने पहले कराया गया, लेकिन इसकी चर्चा अब तक हो रही है। गैर कांग्रेसी लोग कह रहे हैं कि चुनाव से पहले मंदिर का जीर्णोद्धार वोटों के लिए कराया गया है। हो सकता है यह बात सच भी हो, लेकिन चांदिवली में इससे ज्यादा चर्चा यह है कि नफरत की राजनीति के खिलाफ धर्म निरपेक्ष राजनीति के अनुकूल है।---------------------\Bनाराजी भी, मजबूरी भी\Bटिकट बंटवारे से खासे नाराज भाजपा के कई नेताओं के चेहरों पर मजबूरी साफ नजर आती है। खास बात तो यह है कि जिन मजबूत दावेदारों के भी टिकट कटे हैं, उनमें से अधिकांश पार्टी के लिए प्रचार में हिस्सा तो ले रहे हैं, लेकिन यह बात और है कि उनके चेहरे की गंभीरता उनके अंदरूनी भाव प्रकट कर दे रही हैं। बेचारे करें भी तो क्या, चुनाव के बाद सत्ता पक्ष में रहने से दूसरी लॉटरी निकलने की संभावना जो होती है।----------\Bराजुल पटेल का आत्मविश्वास\Bशिवसेना पार्टी से कई बार नगरसेवक रह चुकी राजुल पटेल इस बार निर्दलीय मैदान में हैं। धुंआधार मराठी बोलने वाली राजुल ताई का जनसंपर्क बेहद तगड़ा है। चुनाव लड़ने के सवाल पर वह कहती हैं कि न मैं युति के खिलाफ हूं, न मैं पार्टी के खिलाफ हूं। मैं तो महज उम्मीदवार के खिलाफ हूं। जाहिर है, इस दमदारी से चुनाव लड़ने से भाजपा की वर्तमान विधायिका भारती लवेकर की मुश्किल बढ़नी तय है। अब अंदरखाने यह चर्चा भी गर्म है कि आखिर राजुल ताई के आत्मविश्वास का राज क्या है? साथ में फोटो Nasim और Rajul
Source: Navbharat Times October 10, 2019 03:00 UTC