Maharashtra cabinet: महाराष्ट्र में 'परिवार' सरकार, शिवसेना के दिग्गजों का पत्ता कटा - relatives of leaders inducted in maharashtra government - News Summed Up

Maharashtra cabinet: महाराष्ट्र में 'परिवार' सरकार, शिवसेना के दिग्गजों का पत्ता कटा - relatives of leaders inducted in maharashtra government


मंत्रिमंडल में रिश्तेदारहाइलाइट्स उद्धव ठाकरे सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद जो नई सरकार सामने आई है, उसमें नेताओं के बाप-बेटे-बेटियों या रिश्तेदारों का वर्चस्वमुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सहित 43 सदस्यीय मंत्रिपरिषद में 22 मंत्री किसी न किसी नेता के बेटे-बेटी-बहू या करीबी रिश्तेदार हैंइसमें सर्वाधिक एनसीपी के 9 मंत्री, कांग्रेस के 8 और शिवसेना के 5 मंत्री शामिल, करीब 50 फीसदी मंत्री राजनीतिक घरानों से ताल्लुक रखते हैंशिवसेना के मंत्रीकांग्रेस के मंत्रीएनसीपी के मंत्रीमहाराष्ट्र कैबिनेट में कांग्रेस विधायक असलम शेख को शामिल करने पर भाजपा का शिवसेना पर हमलाउद्धव ठाकरे सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद जो नई सरकार सामने आई है, उसमें नेताओं के बाप-बेटे-बेटियों या रिश्तेदारों का वर्चस्व है। मुख्यमंत्री ठाकरे सहित 43 सदस्यीय मंत्रिपरिषद में 22 मंत्री किसी न किसी नेता के बेटे-बेटी-बहू या करीबी रिश्तेदार हैं। इसमें सर्वाधिक एनसीपी के 9 मंत्री, कांग्रेस के 8 और शिवसेना के 5 मंत्री शामिल हैं।इस तरह 50 प्रतिशत से अधिक मंत्री राजनीतिक घरानों से ताल्लुक रखते हैं। एनसीपी और कांग्रेस के करीब 60 प्रतिशत मंत्री किसी न किसी नेता के वंशज हैं। चुनाव के समय भी नेता पुत्र-पुत्रियों को टिकट देने में वरीयता दी गई, अब मंत्री बनने में भी इन्हीं का दबदबा है। महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और सभी दलों के प्रमुख नेता किसी न किसी राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखते हैं। उद्धव ठाकरे सरकार में मंत्री बनने वाले उनके पुत्र आदित्य ठाकरे और एनसीपी सांसद सुनील तटकरे की पुत्री अदिति तटकरे पहली बार विधायक बने हैं।देवेंद्र फडणवीस सरकार में शिवसेना कोटे से मंत्री रहे दिवाकर रावते, रामदास कदम, रविंद्र वायकर, दीपक केसरकर और तानाजी सावंत को उद्धव ठाकरे सरकार में मंत्री बनने के मौका नहीं मिला। हालांकि, देवेंद्र सरकार में शिवसेना कोटे से मंत्री रहे सुभाष देसाई, गुलाबराव पाटील, दादा भुसे और संजय राठौड को फिर से मौका मिला है। देसाई ने उद्धव ठाकरे के साथ मंत्री पद की शपथ ली थी।जिन नेताओं को मंत्री नहीं बनाया गया है, उनमें से अधिकतर पिछले दरवाजे यानी विधानपरिषद के सदस्य थे। शिवसेना ने अपने जिन 5 नेताओं का पत्ता काटा जब यह फडणवीस सरकार में मंत्री थे, तब शिवसेना पर आरोप लग रहा था कि उन्होंने जनता के चुने प्रतिनिधियों को सरकार में मौका नहीं दिया। शिवसेना सूत्रों के मुताबिक पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने मांत्रिमंडल में अधिक से अधिक युवाओं को तरजीह देने का फैसला किया था। जो मंत्रिमंडल विस्तार के बाद दिखाई दिया।उद्धव ठाकरे सरकार में सिर्फ 3 विधानपरिषद सदस्यों को ही मंत्री बनने का मौका मिला है। इसमें शिवसेना से सुभाष देसाई, अनिल परब और कांग्रेस के सतेज बंटी पाटील शामिल हैं। एनसीपी ने एक भी एमएलसी को मंत्री नहीं बनाया।मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शिवसेना कोटे से किसी महिला को मंत्री नहीं बनाया है। पहले कहा जा रहा था कि मनीषा कायंदे को शिवसेना कोटे से मंत्री बनाया जा सकता है। कांग्रेस ने दो (वर्षा गायकवाड, यशोमति ठाकुर) और एनसीपी ने एक महिला विधायक अदिति तटकरे को अपने कोटे से मंत्री बनने का मौका दिया है। बता दें कि पिछली सरकार में भी शिवसेना ने किसी महिला को मंत्री बनने का मौका नहीं दिया था।उद्धव ठाकरे सरकार में शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी में से किसी पार्टी ने उत्तर भारतीय या हिंदीभाषी को मंत्री नहीं बनाया है। शिवसेना को उत्तरभारतीयों और हिंदीभाषियों की विरोधी माना जाता है, लेकिन पिछले कुछ समय से यह पार्टी उत्तरभारतीयों को पार्टी से जोड़ने की कोशिश कर रही थी। वहीं खुद को उत्तर भारतीयों की हितैषी कहने वाली कांग्रेस ने भी किसी उत्तरभारतीय को मौका नहीं दिया। सर्वाधिक मंत्रियों वाली एनसीपी ने भी वही रास्ता अपनाया।हालांकि एनसीपी ने नवाब मालिक, कांग्रेस ने असलम शेख और शिवसेना ने अब्दुल सत्तार को मुस्लिम कोटे से मंत्री बनाया। उत्तर भारतीय या हिंदीभाषी ही नहीं गुजराती और मारवाड़ी समाज का भी उद्धव ठाकरे सरकार में प्रतिनिधित्व शून्य है। वहीं पिछली देवेंद्र फडणवीस सरकार में विद्या ठाकुर को उत्तर भारतीय कोटे से राज्य मंत्री बनाया गया था।


Source: Navbharat Times December 31, 2019 03:00 UTC



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