Mahabharata: ASI का दावा- जितना हम जानते हैं, उससे कहीं पुराना है महाभारत - asi says mahabharata may older than 15000 2000 before christ - News Summed Up

Mahabharata: ASI का दावा- जितना हम जानते हैं, उससे कहीं पुराना है महाभारत - asi says mahabharata may older than 15000 2000 before christ


यूपी में हुई खुदाई की तस्वीरहाइलाइट्स पुरातत्व सर्वेक्षण ने दावा किया है कि महाभारत हमारी सोच से ज्यादा पुराना हैमहाभारत का काल 900-1000 ईसा पूर्व माना जाता रहा, दावा है कि यह 1500-2000 ईसा पूर्व पुरानायह दावा पिछले साल यूपी के सनौली गांव में हुई खुदाई के आधार पर किया जा रहाखुदाई के दौरान मिला युद्ध का रथ अपनी तरह की पहली खोज हैभारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारियों ने दावा किया है कि जितना हम जानते हैं महाभारत उससे भी पुराना है। जाने-माने पुरातत्वविद बी. लाल की खोज के आधार पर अब तक माना जाता रहा कि महाभारत का काल 900-1000 ईसा पूर्व है। लेकिन एएसआई के वरिष्ठ पुरातत्वविद बताते हैं कि महाभारत का समय 1500-2000 ईसा पूर्व हो सकता है।यह दावा पिछले साल यूपी के सनौली गांव (बागपत जिले) में खुदाई के दौरान मिले अवशेषों के आधार पर किया जा रहा है। खुदाई के दौरान घोड़े द्वारा खींचा जाने वाला युद्ध का रथ, एक जंग लगा धनुष और तीर, गेरुए रंग के बर्तन, ढाल, चाबुक, मशाल जैसी चीजें मिली थीं। शुक्रवार को एएसआई के इंस्टिट्यूट ऑफ आर्कियोलॉजी के डायरेक्टर संजय मंजुल ने बताया कि नए काल का निर्धारण इन चीजों के आधार पर ही हुआ है। मंजुल की देखरेख में सनौली में खुदाई की गई थी। उनका कहना है कि खुदाई के दौरान मिला युद्ध का रथ अपनी तरह की पहली खोज है। इससे सनौली साइट का महाभारत की संस्कृति से और करीबी ताल्लुक जाहिर होता है।संजय मंजुल बताते हैं, ‘जो चाबुक हमें मिला वह घोड़े पर इस्तेमाल किए जाने वाला है न कि बैल पर। पहिए और खंभे जैसी चीजें ठोस तांबे से बनी हैं। सनौली के अवशेष हमारी सभ्यता की निरंतरता के निशान हैं। उनका कहना है, ‘2600-1700 ईसा पूर्व का काल (भारतीय उपमहाद्वीय की ताम्र युग की संस्कृति) अपनी शहरी संस्कृति, अच्छे हथियारों, धातु के बर्तनों और वैदिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। हम जानते हैं कि यह काल काफी हद तक महाभारत काल से मेल खाता है।मंजुल ने कुरु राजाओं की वंशावली पर भी गौर किया है, जो प्रतिपा से शुरू होकर धृतराष्ट्र, पांडु और युधिष्ठिर तक जाती है। ये क्रमश: पांचवें, छठे, सातवें स्थान पर हैं और 36वें राजा क्षेमक के साथ समाप्त होती है। मंजुल ने कहा, ‘बुद्ध का समकालीन लगभग 550 ईसा पूर्व था, जो कुरु राजाओं की 23वीं पीढ़ी थी। अगर, औसतन आप प्रत्येक राजा को 50 साल देते हैं, जो बाद की पीढ़ियों में लगातार युद्धों के साथ कम हो जाता है, तो मान सकते हैं कि महाभारत काल लगभग 1750 ईसा पूर्व तक फैला था।’डायरेक्टर संजय मंजुल ने बताया सनौली के अवशेषों पर काम चल रहा है। एएसआई की टीम ने कई वैज्ञानिक तकनीकों जैसे एक्स-रे, सीटी स्कैन, 3 डी स्कैनिंग, और जीपीआर सर्वे का उपयोग किया है ताकि इसका एकदम सटीक अनुमान लगाया जा सके। 1950 के दशक के प्रारंभ में इंद्रप्रस्थ में पहली खुदाई के बाद से, महाभारत में वर्णित कम से कम आठ स्थानों पर खुदाई हुई है, लेकिन एएसआई ने अब तक ऐतिहासिक तथ्यों को स्थापित करने के लिए कोई निर्णायक या प्रत्यक्ष सबूत पब्लिश नहीं किया है।एएसआई की टीम बी. लाल के निष्कर्षों पर भी गौर कर रही है, जिन्होंने 1951-52 में इंद्रप्रस्थ और हस्तिनापुर में खुदाई की थी। लाल ने खुलासा किया था कि लगभग 800 ईसा पूर्व गंगा में भारी बाढ़ ने बस्ती के काफी हिस्से को नष्ट कर दिया था। बरामद अवशेषों के आधार पर उन्होंने कहा था कि ये महाभारत के सभी स्थलों जैसे कि हस्तिनापुर, मथुरा, कुरुक्षेत्र और कांपिल्य को जोड़ने वाला सबसे पुराने अवशेष हैं। लाल ने अनुमान लगाया था कि कुरुक्षेत्र में लड़ाई 800 ईसा पूर्व के आसपास हुई थी। उन्होंने कहा था कि राजा निचक्षु के समय राजधानी हस्तिनापुर से कौशांबी ले जाई गई थी। निचक्षु राजा परीक्षित के बाद पांचवें शासक थे।


Source: Navbharat Times October 20, 2019 04:54 UTC



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