Lucknow Samachar: खादी के गले लगे 'दागी' - 'tainted' hugging khadi - News Summed Up

Lucknow Samachar: खादी के गले लगे 'दागी' - 'tainted' hugging khadi


यूपी में फायदेमंद 'दाग' राजनीतिक पार्टियों को भाते रहे हैंAnkur.tiwari@timesgroup.comलखनऊ: वैसे तो राजनीति में उजला पहनने और साफ-सुथरा दिखने की होड़ होती है लेकिन जहां बात फायदे की हो तो 'दागी' को भी गले लगाने से नहीं चूकते हैं। ताजा उदाहरण बिहार और पूर्वांचल के बाहुबली राजन तिवारी की यूपी बीजेपी में एंट्री का है। दरअसल बीजेपी पूर्वांचल की कुछ सीटों को लेकर अपनों की भीतरघात और गठबंधन की मजबूती के चलते मुश्किलों में घिरी हुई है। इस मुश्किल को आसान करने के लिए राजन को अपनाने में जरा भी देरी नहीं की। दरअसल यूपी में फायदेमंद 'दाग' राजनीतिक पार्टियों को हमेशा से भाते रहे हैं। इसमें सिर्फ बीजेपी ही नहीं बीएसपी, सपा और कांग्रेस सभी शामिल हैं।श्रीप्रकाश शुक्ला का करीबी राजन तिवारीबिहार से दो बार विधायक रह चुके राजन तिवारी का अपराध की दुनिया से बहुत पुराना नाता है। मूलरूप से गोरखपुर के सोहगौरा निवासी राजन की यूपी और बिहार में आतंक का पर्याय रहे माफिया श्री प्रकाश शुक्ला से नजदीकियां बताई जाती हैं। श्रीप्रकाश शुक्ला के साथ राजन का नाम यूपी के महराजगंज की लक्ष्मीपुर विधानसभा सीट से विधायक रहे वीरेंद्र प्रताप शाही पर हमले में आया था। हालांकि इस मामले में बाद में वो बरी हो गए। इसी तरह बिहार में आरजेडी के पूर्व मंत्री ब्रज बिहारी प्रसाद की हत्या में भी श्री प्रकाश शुक्ला के साथ राजन तिवारी का नाम आया था। निचली अदालत ने सजा सुनाई। बाद में हाईकोर्ट से बरी हो गए। यूपी के माफिया मुन्ना बजरंगी समेत कई अपराधियों से राजन के रिश्ते बताए जाते हैं। बीजेपी से पहले राजन तिवारी बीएसपी से भी जुड़े रहे। विधानसभा चुनावों के दौरान उसके कुशीनगर व देवरिया में से किसी एक जगह से लड़ने की तैयारी थी।अशोक सिंह चंदेलपार्टी विद डिफरेंस का दावा करने वाली बीजेपी ने पांच लोगों के जघन्य हत्याकांड के आरोपित अशोक सिंह चंदेल को विधानसभा 2017 में टिकट देकर विधायक बनाया। उस दौरान पार्टी यह कहकर उनका बचाव कर रही थी कि अभी दोषी नहीं सिद्ध हुए हैं। अब अशोक चंदेल को आजीवन कारावास हुए वक्त बीत चुका है लेकिन उसके खिलाफ कार्रवाई तो दूर पार्टी ने एक शब्द बोलना भी जरूरी नहीं समझा जबकि उस पर पार्टी से ही जुड़े कार्यकर्ता के परिवार के लोगों की हत्या का आरोप है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बुंदेलखंड में चंदेल का दमखम कायम है और भाजपा चुनाव में कोई दिक्कत नहीं चाहती।मुख्तार अंसारीविधानसभा चुनाव-2017 के दौरान अखिलेश यादव ने बाहुबली मुख्तार अंसारी को अपने साथ जोड़ने से मना कर दिया था। फिर मुख्तार की बीएसपी से नजदीकियां बढ़ीं और बीएसपी सुप्रीमो मायावती की मौजूदगी में मुख्तार का कौमी एकता दल बीएसपी में शामिल हो गया। राजनीति की मजबूरी देखिए, जिन्हें 'दागी' कहकर अखिलेश ने पार्टी में शामिल करने से इनकार कर दिया, उन्हीं मुख्तार अंसारी के बड़े भाई अफजाल अंसारी के लिए वे अब वोट मांग रहे हैं। अफजाल गाजीपुर से सपा और बीएसपी गठबंधन के प्रत्याशी हैं। मुख्तार मऊ सदर से विधायक हैं और गाजीपुर, मऊ और आसपास के इलाकों में वह भले ही सामने न हों पर पर्दे के पीछे से उनकी सियासत चलती है।कुलदीप सिंह सेंगरयूपी में सत्ता संभालने के बाद सपा से आए बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर रेप के आरोप लगे। पार्टी की इस मामले में खासी किरकिरी हुई लेकिन आज तक भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों की तरफ से कुलदीप के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है जबकि सीबीआई ने बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उनके भाई के खिलाफ तमाम साक्ष्यों के साथ चार्जशीट दाखिल कर दी है। पार्टी को मालूम है कि कुलदीप सिंह सेंगर अपनी विधानसभा सीट के साथ ही आसपास की कई सीटों पर प्रभाव रखते हैं और पार्टी को उनकी जरूरत है। उन्नाव में इस वक्त साक्षी महाराज भाजाप के टिकट पर लड़ रहे हैं और सेंगर उनके लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं।बाबू सिंह कुशवाहाबाबू सिंह कुशवाहा कभी मायावती के सबसे खास सिपाहसालार हुआ करते थे। दो सीएमओ की हत्या और एक डिप्टी सीएमओ की जेल में संदिग्ध मौत के बाद जब एनआरएचएम घोटाले का जिन्न बाहर आया तो सीबीआई की कार्रवाई शुरू हो गई। इसके बाद मायावती ने बाबू सिंह कुशवाहा से किनारा कर लिया। कुशवाहा तीन साल से ज्यादा जेल में रहे। इसके बावजूद पिछड़े वोटों पर उनकी पकड़ देखते हुए बीजेपी ने उन्हें अपने साथ जोड़ने की कोशिश की। तैयारियां हो चुकी थीं लेकिन विरोध के बाद बीजेपी ने किनारा कर लिया। लोकसभा चुनावों के दौरान 2014 में बाबू सिंह कुशवाहा ने सपा के साथ नजदीकियां बढ़ाईं और उनकी पत्नी शिवकन्या कुशवाहा को गाजीपुर से टिकट मिल गया। लेकिन वह जीत नहीं सकीं। बाबू सिंह कुशवाहा पर तमाम 'दाग' के बावजूद अब कांग्रेस ने उन्हें अपनाया है। बाबू सिंह कुशवाहा की पार्टी के सात उम्मीदवार कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर ताल ठोंक रहे हैं।बृजभूषण शरण सिंहबाहुबली बृजभूषण शरण सिंह बीजेपी के सांसद हैं और इस बार भी कैसरगंज सीट से मैदान में हैं। बृजभूषण के खिलाफ जानलेवा हमला, डकैती जैसी गंभीर धाराओं के मामले दर्ज हैं। इलाके में उनकी छवि बाहुबली की है। इसके बावजूद वह लगातार बीजेपी के साथ हैं। बृजभूषण का बेटा प्रतीक भी बीजेपी से विधायक है।विनोद कुमार उर्फ पंडित सिंहगोंडा से सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी पंडित सिंह की गुंडई पर सपा सरकार के सत्ता में रहते सीएमओ के अपहरण का आरोप लगा था। इसके अलावा कई बार उनके बिगड़े बोलों ने भी पार्टी की जमकर किरकिरी करवाई है। इसके बावजूद वो सपा की जरूरत हैं क्योंकि गोंडा में वह पार्टी का मजबूत सहारा हैं।चंद्र भद्र सिंह उर्फ सोनू सिंह: बाहुबली भाई सोनू-मोनू की जोड़ी पर संत ज्ञानेश्वर की हत्या समेत कई गंभीर अपराधों के आरोप उन पर लगते रहे हैं। जुलाई 2014 में पेशी के दौरान दोनों भाइयों पर बमों से हमला भी हुआ था। छवि पर काफी सवाल हैं इसके बावजूद बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने सुलतानपुर सीट पर मेनका गांधी को टक्कर देने के लिए सोनू सिंह को चुना है।किस पार्टी में


Source: Navbharat Times May 05, 2019 01:01 UTC



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