Lok Sabha Election 2019: वोटरों की यह कशमकश, सबका साथी है ‘राजा’ पर सामने है ‘मोदी का महंत’अलवर, संजय मिश्र। राजस्थान के अलवर लोकसभा सीट के मतदाता इस चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वरीयता देने या फिर अपने सुख-दुख के साथी सांसद को चुनने की जबरदस्त कशमकश में हैं। चुनाव प्रचार अभियान अपने आखिरी मुकाम की ओर बढ़ रहा है तो वोटरों की यह कशमकश भाजपा और कांग्रेस दोनों के उम्मीदवारों की धड़कनें तेज कर रही है।कांग्रेस उम्मीदवार अलवर के राजा भंवर जितेंद्र सिंह को उम्मीद है कि उनकी सहज-सुलभ छवि इस कशमकश में उनके हक में जाएगी। वहीं भाजपा उम्मीदवार महंत बाबा बालकनाथ योगी की सियासी उम्मीदों का सबसे बड़ा आसरा पीएम मोदी का चेहरा है।अलवर शहर से सटे ग्रामीण इलाकों की अपनी नुक्कड़ सभाओं में भंवर जितेंद्र सिंह बाबा बालकनाथ पर निशाना साधते हुए कहते हैं कि इस पर चिंतन-मंथन कीजिए कि आपको ऐसा सांसद चाहिए जो क्षेत्र का विकास कर सके। हर मौके पर आपकी परेशानियों को भली-भांति समझते हुए सुख-दुख में साथ खड़ा रहे या फिर ऐसा प्रतिनिधि जो सरकार के नाम पर जीतकर क्षेत्र को भूल जाए। नुक्कड़ सभा की भीड़ स्वाभाविक रूप से अपने नुमाइंदे को तवज्जो देने की हामी भरती है।कांग्रेस उम्मीदवार की प्रचार रणनीति में बड़ी चतुराई से पीएम मोदी पर निशाना साधने से परहेज करते हुएहमला बालकनाथ पर केंद्रित है। ताकि पिछले चुनाव में बाबा चांदनाथ को चुनने के खट्टे अनुभव की स्मृतियां धूमिल न पड़े। 2014 में भाजपा ने बालकनाथ के गुरुबाबा चांदनाथ को टिकट दिया और मोदी लहर में जितेंद्र सिंह अपनी छवि व काम के बावजूद हार गए।मगर चुनाव जीतने के बाद चांदनाथ और अलवर के लोगों का फिर संपर्क नहीं हो पाया। एक साल पहले उनकी मृत्यु हो गई और तब उपचुनाव में कांग्रेस के करण सिंह यादव जीत गए थे। इसीलिए अलवर के मतदाताओं के मन में फिर से एक और बाबा को नुमाइंदगी का मौका देने को लेकर दुविधा है।स्थानीय निवासी रतन सिंह और परसराम मीणा कहते हैं कि भंवर जितेंद्र से अलवर के लोग जब चाहे मिलकर अपनी परेशानी रख सकते हैं उनसे सवाल कर उन्हें खरी-खटी सुना सकते हैं। जहां तक काम की बात है तो भंवर के सांसद और मंत्री रहने के कामों को लोग अब भी नहीं भूले हैं।हालांकि बहरोट विधानसभा में तस्वीर बाबा के लिए सकारात्मक दिखती है क्योंकि उनका मठ इसी क्षेत्र में है। साथ ही बालकनाथ का अलवर में यादव समुदाय से जुड़ा सामाजिक समीकरण उनका सबसे मजबूत पक्ष है। अलवर में सबसे अधिक साढ़े चार लाख यादव मतदाता हैं, जिन्हें बाबा के पक्ष में गोलबंद होना तय माना जा रहा है। वहीं बालकनाथ अपनी सभाओं में मोदी को दोबारा पीएम बनाने के लिए खुद के चुनावी अखाड़े में उतरने की बात कह रहे। उनकी प्रचार रणनीति से साफ है कि अपनी कामयाबी के लिए बाबा को सबसे अधिक भरोसा और उम्मीद का चेहरा मोदी हैं।हालांकि मुस्लिम बहुल क्षेत्र मेव के अलावा तिजारा और रामगढमें भी अल्पंसख्यकों की अच्छी तादाद जितेंद्र सिंह के पक्ष में बताई जा रही है। मगर इसमें जितेंद्र सिंह को सियासी भंवर में घेरने के लिए बसपा तीसरा कोण बनाने में कसर बाकी नहीं रख रही। बसपा ने इमरान खान को अपना उम्मीदवार बना उनके पक्ष में मुस्लिम गोलबंदी पर संशय पैदा कर दिया है।राजस्थान में अलवर बसपा के सबसे अधिक प्रभाव वाले इलाकों में आता है। हाल के विधानसभा चुनाव में पार्टी को जिले की दो सीटों पर जीत मिली। बसपा प्रमुख मायावती की रविवार को हुई चुनावी रैली में जुटी भीड़ के बाद भंवर बसपा फैक्टर को खारिज करने का हर संभव संदेश दे रहे हैं। बसपा के दांव को नाकाम करने के लिए ही जितेंद्र गोरक्षा के नाम पर हुर्ई हिंसा से अलवर की देश भर में हुई बदनामी का जिक्र करते हैं।Posted By: Preeti jha
Source: Dainik Jagran May 02, 2019 04:30 UTC