डिजिटल डेस्क,जबलपुर। भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया, लेबनान, कंबोडिया, फिलिपींस समेत 13 देशों का मानना है कि दुनिया में बढ़ते संघर्ष और आतंकवाद की बड़ी वजह अवैध स्माॅल आर्म्स हैं। जरूरी है कि देशों के आपसी सहयोग, ट्रेसिंग सिस्टम में सुधार और बेहतर स्टोरेज मैनेजमेंट को ज्यादा मजबूत किया जाए।विदेश और रक्षा मंत्रालय के तत्वावधान में भारतीय सेना यहां मिलिट्री कॉलेज ऑफ मटेरियल्स मैनेजमेंट में संयुक्त राष्ट्र स्माॅल आर्म्स एवं लाइट वेपन्स (एसएएलडब्ल्यू) नियंत्रण फैलोशिप प्रशिक्षण कार्यक्रम की मेजबानी कर रही है।संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण मामलों के कार्यालय (UNODA) द्वारा एशिया और पेसिफिक क्षेत्र में शांति और निरस्त्रीकरण के लिए क्षेत्रीय केंद्र (UNRCPD) के जरिए आयोजित कार्यक्रम में वैश्विक शांति, जिम्मेदार हथियार प्रबंधन और क्षमता निर्माण साझेदारी के प्रति भारत की ओर से प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई।यूएनआरसीपीडी के निदेशक दीपायन बसु राय ने संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण प्रोग्राम की समीक्षा की। लेफ्टिनेंट जनरल संजय सेठी एवीएसएम वीएसएम ने कहा कि अवैध हथियारों की आपूर्ति से उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियों से निपटने पर सहयोग और रणनीतिक महत्व पर जोर दिया जाना चाहिए।इंटरनेशनल ट्रेसिंग इंस्ट्रूमेंट पर फोकसप्रोग्राम का फोकस संयुक्त राष्ट्र प्रोग्राम ऑफ एक्शन (पीओए) और इंटरनेशनल ट्रेसिंग इंस्ट्रूमेंट (आईटीआई) को लागू करने पर रखा गया। इसके लिए जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों की तकनीकी और परिचालन क्षमता को बढ़ाने पर बल दिया गया। इस बात पर भी चर्चा की गई कि स्माॅल आर्म्स और लाइट वेपन्स के अवैध व्यापार, हेराफेरी और दुरुपयोग को रोकने के लिए मिलकर काम करना होगा और सख्त कदम उठाने होंगे।एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देश शामिलइस कार्यक्रम में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 13 देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इसमें ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, भूटान, कंबोडिया, फिजी, ईरान, भारत, किरिबाती, किर्गिज़ गणराज्य, लाओ पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक, लेबनान, मंगोलिया, मलेशिया, फिलिपींस और थाईलैंड शामिल हैं। प्रोग्राम 6 मार्च तक चलेगा।
Source: Dainik Bhaskar February 17, 2026 14:10 UTC