Indias Baby BrahMos: New Defense Formula for Future Wars - News Summed Up

Indias Baby BrahMos: New Defense Formula for Future Wars


Hindi NewsNationalIndias Baby BrahMos: New Defense Formula For Future Warsभारत बना रहा बेबी ब्रह्मोस, 20 गुना कम कीमत: भविष्य की जंग की तैयारी, सुरक्षा का नया फॉर्मूलानई दिल्ली 5 घंटे पहलेकॉपी लिंकरूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने साफ कर दिया है कि भविष्य की जंग अब महीनों और सालों खिंचेगी। इस हकीकत को देख भारत भी तैयारी में जुट गया है। सेना का फोकस अब केवल महंगी मिसाइलों पर नहीं, बल्कि इनके ‘मिनी मॉडल्स’ के बड़े भंडार पर है।हाल ही में पिनाका रॉकेट सिस्टम के ‘हवाई संस्करण’ के परीक्षण को इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। दरअसल, ब्रह्मोस जैसी अचूक सटीकता और मारक क्षमता के कारण इसे ‘बेबी ब्रह्मोस’ भी कहा जा रहा है।हाल ही में सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने इस बदलाव को जरूरी बताते हुए कहा कि अगर हमारे पास किफायती लेकिन उच्च तकनीक वाले हथियार होंगे, तो हम लंबी जंग (हाई डेंसिटी वार) में किसी भी बड़े दुश्मन को पीछे धकेलने में सक्षम होंगे।रक्षा संबंधी कमेटी की रिपोर्ट- कम लागत में देश में बनें हथियारसंसद की रक्षा संबंधी स्थायी समिति ने भी अपनी हालिया रिपोर्ट में इस रणनीति पर सकारात्मक रुख दिखाया है। समिति ने जोर दिया है कि भीषण और लंबे युद्ध की स्थिति में भारत को ऐसे हथियारों की जरूरत है जो बड़े पैमाने पर और कम लागत में देश के भीतर ही बनाए जा सकें। इसी नीति के तहत बजट में आवंटित राशि का एक बड़ा हिस्सा स्वदेशी खरीद के लिए सुरक्षित रखा गया है ताकि युद्ध के समय विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भर न रहना पड़े।जंग में टिके रहने के लिए जरूरी स्वदेशी हथियारइजरायल-हमास जंग में इजरायल को चंद हजार के रॉकेट गिराने के लिए 50 लाख की मिसाइलें खर्च करनी पड़ीं। यूक्रेन-सूडान में सस्ते ड्रोन्स ने करोड़ों के टैंकों को मलबे में बदल चौंका दिया। वहीं, म्यांमार में विद्रोहियों ने जुगाड़ से बड़े हमलों को नाकाम किया। इनसे सबक मिला कि जंग केवल बड़े हथियारों से नहीं, बल्कि सस्ते, स्वदेशी और हथियारों के बड़े भंडार से जीती जा सकती है।ये भी तैयारी: इजराइल से ‘आयरन बीम’ मिलेगास्वदेशी ताकत के साथ भारत इजराइल से ‘आयरन बीम’ जैसी लेजर आधारित प्रणाली हासिल करने की ओर बढ़ रहा है। यह तकनीक चंद रुपयों की बिजली खर्च कर रॉकेटों को हवा में जला देती है।दूसरी ओर, भारत छोटे हथियारों के हब बनने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। आर्मेनिया के बाद अब फ्रांस ने पिनाका रॉकेट सिस्टम (बेबी ब्रह्मोस का वर्जन) में गहरी रुचि दिखाई है।----------------ये खबर भी पढ़ें…भारत ने K-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया: पनडुब्बी से 3500km की रेंज तक मार करेगीभारत ने बंगाल की खाड़ी में न्यूक्लियर पावर्ड सबमरीन INS अरिघाट से 3,500 किलोमीटर रेंज वाली K-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। ये मिसाइल 2 टन तक न्यूक्लियर वॉरहेड ले जाने में सक्षम है। K-सीरीज की मिसाइलों में “K” अक्षर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के सम्मान में रखा गया है। इनकी भारत के मिसाइल कार्यक्रम में अहम भूमिका रही है। पूरी खबर पढ़ें….


Source: Dainik Bhaskar February 24, 2026 22:39 UTC



Loading...
Loading...
  

Loading...

                           
/* -------------------------- overlay advertisemnt -------------------------- */