अगर बिना किसी कंपनी की मदद के अमेरिका में बसना है, तो फिर EB-2 NIW वीजा भारतीयों के लिए बेस्ट है। EB-2 के तहत अमेरिका में ग्रीन कार्ड (PR) मिलता है, लेकिन ये किसी वर्कर को तभी मिल पाता है, जब कंपनी ये साबित करे कि वर्कर की जगह काम करने वाला कोई दूसरा अमेरिकी कर्मचारी नहीं है। लेकिन जैसे ही इसमें 'नेशनल इंटरेस्ट वेवर' (NIW) जुड़ जाता है, तो फिर EB-2 NIW कैटेगरी बन जाती है। इसका मतलब हो जाता है कि अमेरिकी सरकार विदेशी वर्कर को ग्रीन कार्ड देने के लिए छूट दे रही है, क्योंकि वह अमेरिका आकर जो काम करने वाला है, वह देश हित में है।इस वीजा को लेने के लिए पहले वर्कर को साबित करना होता है, उसके पास मास्टर डिग्री या पीएचडी है। अगर बैचलर्स डिग्री है, तो फिर उसके साथ 5 साल का वर्क एक्सपीरियंस भी जरूरी है। इसके अलावा अगर किसी के पास डिग्री नहीं है, तो वह इस तरह से भी अपनी योग्यता साबित कर सकता है कि उसके पास अपनी फील्ड की सबसे ज्यादा नॉलेज है। इसे वह 10 साल से ज्यादा वर्क एक्सपीरियंस, कोई खास लाइसेंस या कोई बड़े पुरस्कार के माध्यम से साबित कर सकता है। साथ ही उसे ये भी साबित करना होगा कि वह जिस काम को कर रहा है, वह अमेरिका के हित में है। (फोटो- Freepik)
Source: Navbharat Times March 04, 2026 22:46 UTC