गोरखपुर: इस योजना को आमजन तक पहुंचाने और लोगों के मन से कानूनी कार्रवाई व पुलिस पूछताछ का डर दूर करने के लिए एक माह तक अभियान चलााय जाएगा। एक से 30 जनवरी तक यह अभियान चलेगा, जिसके दौरान शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक लोगों को बताया जाएगा कि हादसे में घायल की मदद करने वाला व्यक्ति न तो आरोपित माना जाएगा और न ही उसे किसी प्रकार की कानूनी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।अभियान पर जोरपुलिस अधिकारियों के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अहम समय पहला एक घंटा यानी गोल्डन आवर होता है। इसी दौरान यदि घायल को चिकित्सकीय सहायता मिल जाए तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। बावजूद इसके, अक्सर लोग पुलिस-प्रक्रिया और कोर्ट-कचहरी के डर से मदद करने से पीछे हट जाते हैं। सरकार और पुलिस इसी सोच को बदलने के लिए अभियान पर जोर दे रही है।इंसानियत का कामडीआइजी रेंज डा। एस। चनप्पा ने बताया कि गोरखपुर के साथ ही देवरिया, कुशीनगर व महराजगंज जिले में यह जागरूकता अभियान एक साथ चलाया जाएगा। चौराहों, स्कूल-कालेज, बस अड्डों और गांवों में प्रचार के जरिए लोगों को यह भरोसा दिलाया जाएगा कि घायल को अस्पताल पहुंचाना इंसानियत का काम है,इसके लिए उन्हें सम्मान और आर्थिक प्रोत्साहन भी मिलेगा।मौत का आंकड़ा कम करना है लक्ष्ययातायात पुलिस इस अभियान के दौरान पंपलेट, बैनर, नुक्कड़ नाटक और इंटरनेट मीडिया के जरिए लोगों तक संदेश पहुंचाएगी। उद्देश्य है कि हादसों में मौत का आंकड़ा कम हो और आमजन बिना डर के घायल की मदद के लिए आगे आए। पुलिस का मानना है कि यदि समाज इस अभियान में सहभागी बना तो सड़क हादसों में जान बचाने की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है।
Source: Dainik Jagran January 02, 2026 04:33 UTC