Global companies are disillusioned with ice cream, Nestle Ice Cream - News Summed Up

Global companies are disillusioned with ice cream, Nestle Ice Cream


Hindi NewsBusinessGlobal Companies Are Disillusioned With Ice Cream, Nestle Ice Creamआइसक्रीम से वैश्विक कंपनियों का मोहभंग: नेस्ले ने भी समेटा कारोबार, शुरू किया ऑपरेशन क्लीनअप; फोकस- मुनाफे वाले मुख्य सेगमेंट परलंदन/ज्यूरिख 12 घंटे पहलेकॉपी लिंकबाजार विश्लेषकों का मानना है कि जटिल कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स, बिजली की भारी खपत और सीजन पर निर्भरता ने आइसक्रीम को एक मुश्किल बिजनेस बना दिया है।दुनिया की सबसे बड़ी खाद्य और पेय कंपनी नेस्ले आइसक्रीम के कारोबार को ‘ठंडे बस्ते’ में डालने जा रही है। दरअसल वैश्विक एफएमसीजी सेक्टर में कुछ समय से एक ट्रेंड देखा जा रहा है। दिग्गज कंपनियों का आइसक्रीम बिजनेस से मोहभंग हो रहा है। नेस्ले ने पुष्टि की है कि वह अपने शेष आइसक्रीम पोर्टफोलियो को संयुक्त उद्यम साझेदार ‘फ्रोनेरी’ को बेचने के लिए बातचीत कर रही है।इस सौदे में हागेन-डाज और ड्रमस्टिक जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड शामिल हैं, जिनकी कुल वैल्यू लगभग 1.3 बिलियन डॉलर (करीब 11,800 करोड़ रुपए) आंकी गई है। नेस्ले के नए सीईओ फिलिप नवरतिल ने पद संभालते ही कंपनी के बिखरे हुए साम्राज्य को समेटने का फैसला किया है।नवरतिल के मुताबिक, आइसक्रीम ब्रांड कंपनी के मुख्य बिजनेस के लिए एक भटकाव बन गए थे। कंपनी अब अपना पूरा ध्यान उन 4 सेगमेंट पर लगाएगी, जहां उसका दबदबा सबसे ज्यादा है- कॉफी, पेट केयर, न्यूट्रिशन और स्नैक्स।नवरतिल ने स्पष्ट किया, ‘हम इन ब्रांड्स को उस गति से आगे नहीं बढ़ा सकते, जिस तरह फ्रोनेरी जैसी विशेषज्ञ कंपनियां बढ़ा सकती हैं।’ नेस्ले जैसा दिग्गज अब लागत कम करने के लिए एआई और ऑटोमेशन का सहारा ले रहा है और दुनियाभर में 16,000 नौकरियां घटाने की योजना बना रहा है। ऐसे में कंपनी उन सेक्टर में पूंजी लगाना चाहती है जहां मार्जिन अधिक और स्थिर है।ये कंपनियां भी पीछे हटींनेस्ले अकेली ऐसी कंपनी नहीं है जो जमी हुई मिठास से दूरी बना रही है। यह पूरी दुनिया में एफएमसीजी और डेयरी दिग्गजों के बीच एक ‘स्ट्रक्चरल शिफ्ट’ है। यूनिलीवर ने बीते दिसंबर में प्रसिद्ध आइसक्रीम डिवीजन मैग्नम को अलग कर दिया।अमेरिकी दिग्गज कंपनी जनरल मिल्स अपनी आइसक्रीम यूनिट को पहले ही लैक्टालिस को बेच चुकी है। दुनिया की सबसे बड़ी डेयरी निर्यातक कंपनी फोंटेरा भी अपने ग्लोबल कंज्यूमर और आइसक्रीम बिजनेस को बेचने की प्रक्रिया में है। इसके लिए फ्रांसीसी कंपनी लैक्टालिस ने 20,000 करोड़ रुपए से अधिक की भारी-भरकम बोली लगाई है।आखिर आइसक्रीम बिजनेस से किनारा क्योंबाजार विश्लेषकों का मानना है कि जटिल कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स, बिजली की भारी खपत और सीजन पर निर्भरता ने आइसक्रीम को एक ‘मुश्किल बिजनेस’ बना दिया है।शुगर टैक्स और अनहेल्डी प्रोडक्ट पर सख्तीलोग अब चीनी और कैलोरी के सेवन को लेकर अधिक सतर्क हो रहे हैं। कई देशों में बढ़ते ‘शुगर टैक्स’ और ‘अनहेल्दी’ उत्पादों के प्रति सख्त नियमों के कारण कंपनियां अब प्लांट-बेस्ड और पोषण-आधारित उत्पादों की ओर रुख कर रही हैं।कम मार्जिनआइसक्रीम की बिक्री मौसम पर निर्भर है; गर्मी में मांग चरम पर होती है। सर्दियों और मानसून में बिक्री सुस्त रहती है। वास्तविक मुनाफा कम बचता है। ब्यूटी और पर्सनल केयर के 20-25% मार्जिन की तुलना में आइसक्रीम का 10-14% मार्जिन निवेशकों के लिए कम आकर्षक है।कॉर्बन उत्सर्जन कम करने का लक्ष्य बड़ी चुनौतीउत्पादन से लेकर ग्राहक तक पहुंचने तक आइसक्रीम माइनस 18°सी या उससे कम तापमान की जरूरत होती है। विशेष फ्रीजर ट्रकों, गोदामों के रखरखाव की लागत अन्य प्रोडक्ट्स से अधिक है। बढ़ते बिजली खर्च और कार्बन उत्सर्जन कम करने के वैश्विक दबाव ने इस सप्लाई चेन को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।.


Source: Dainik Bhaskar February 24, 2026 15:02 UTC



Loading...
Loading...
  

Loading...

                           
/* -------------------------- overlay advertisemnt -------------------------- */