Akhandpratap.singh@timesgroup.comगाजियाबाद : जीडीए की कमजोर होती आर्थिक स्थिति और अफसरों के ढुलमुल रवैये की वजह से शहर के विकास से जुड़े कई अहम प्रॉजेक्टों पर ग्रहण लगता नजर आ रहा है। पिछले दिनों जीडीए के चीफ इंजीनियर ने ऐसे प्रॉजेक्टों का सर्वे करने का निर्देश दिया था, जिन्हें फौरन फंड की जरूरत है और फंड के अभाव में जिनका काम ठप हो सकता है। इस निर्देश के बाद इंजीनियरिंग अनुभाग की टीम ने सर्वे किया तो पता चला कि यदि अगले तीन महीने तक 18 प्रॉजेक्टों को फंड नहीं मिला तो इनका काम पूरी तरह ठप हो जाएगा। इन परियोजनाओं के लिए जीडीए को करीब 77 करोड़ रुपये की जरूरत होगी और इतने रुपयों का इंतजाम कर पाना जीडीए के लिए मुश्किल हो रहा है।जीडीए के अधिकारियों ने बताया कि महत्वपूर्ण प्रॉजेक्टों पर पूरा फोकस किया जा रहा है। इसकी फंडिंग को लेकर तैयारी की जा रही है। जिससे जनवरी, फरवरी और मार्च में कुछ-कुछ पेमेंट करके काम को रुकने नहीं दिया जाएगा। इसमें अधिकतम एक महीने में एक प्रॉजेक्ट पर 2 करोड़ रुपये के पेमेंट का लक्ष्य रखा गया है। जबकि कुछ प्रॉजेक्ट में एक महीने 25 लाख रुपये पेमेंट किए जाने का टारगेट है।क्यों आ रही है फंड की दिक्कत1. प्रवर्तन टीम लक्ष्य के अनुरूप वसूली नहीं कर पा रही है। जनवरी में इस बार वसूली का स्तर बहुत नीचे चला गया है। इस वजह से जीडीए सचिव पूरी प्रवर्तन टीम का वेतन रोकने का निर्देश दे चुके हैं। जानकारी के अनुसार, जीडीए ने 8 जोन की प्रवर्तन टीम को 2018-19 के वित्तीय वर्ष में 300 करोड़ रुपये के बकाए की वसूली का लक्ष्य दिया था, लेकिन टीम दिसंबर 2019 तक केवल 47.66 करोड़ रुपये ही वसूल सकी। ऐसे में जीडीए की आर्थिक स्थिति दिन प्रतिदिन खस्ताहाल हो रही है। आलम यह है कि कई बार कर्मचारियों को समय से वेतन भी नहीं मिल पा रहा है।2. अवस्थापना निधि का इंतजारजीडीए का शासन की तरफ से अवस्थापना निधि का पिछले 3 साल से एक भी पैसा नहीं मिला है। शासन ने जीडीए से प्रस्ताव मांगा था कि अवस्थापना निधि के तहत जो प्रॉजेक्ट करवाने हैं उसकी सूची बनाकर भेजी जाए। जीडीए ने इसकी सूची दे दी है, लेकिन शासन की तरफ से अभी तक कोई फंडिंग नहीं की गई है।3. संपत्तियों की नहीं हो रही बिक्रीबार-बार नीलामी के बाद भी जीडीए की कई संपत्तियों की बिक्री नहीं हो पा रही है। करीब 2281 करोड़ रुपये की संपत्तियों की बिक्री होनी बाकी है। इसमें 2000 वर्ग मीटर से अधिक की 59 संपत्तियां हैं। जिसकी कीमत 1400 करोड़ रुपये है। 2000 वर्ग मीटर से कम के 421 भूखंड हैं। इसकी कीमत 90 करोड़ रुपये है। 791 करोड़ के फ्लैट बिक नहीं रहे हैं। इतना ही नहीं बल्कि जीडीए का डिफॉल्टी आवंटियों पर 350 करोड़ रुपये बकाया है।\Bये हैं महत्वपूर्ण प्रॉजेक्ट\B-राजनगर एक्सटेंशन के 45 मीटर चौड़ी सड़क सीवर एवं ड्रेनेज सिस्टम - 6 करोड़ रुपये-राजनगर एक्सटेंशन के 30 मीटर चौड़ी सड़क, ड्रेनेज और सीवरेज व्यवस्था -1.50 करोड़ रुपये-हिंडन नदी पर पुराने ब्रिज को तोड़कर नया ब्रिज - 6 करोड़ रुपये-नॉर्दर्न पेरिफेरल रोड का निर्माण कार्य - 6 करोड़ रुपये-मधुबन बापूधाम का बुनकर मार्ट का निर्माण - 6 करोड़ रुपये-मधुबन बापूधाम का रेलवे लाइन पर आरओबी का निर्माण - 6 करोड़ रुपये-पीएम आवास योजना के 856 भवनों का निर्माण - 6 करोड़ रुपये-आरडीसी में वीइकल फ्री जोन - 3 करोड़ रुपये\Bक्या कहते हैं अधिकारी\Bफिलहाल किसी भी प्रॉजेक्ट को रुकने नहीं दिया जाएगा। हमारा फोकस महत्वपूर्ण प्रॉजेक्ट पर बना हुआ है। फंड की कमी की वजह से कुछ प्रॉजेक्ट अभी स्पीड नहीं पकड़ पा रहे हैं, लेकिन उम्मीद है कि हम वसूली को बढ़ाकर फंड की कमी दूर कर लेंगे।-वी.एन. सिंह, चीफ इंजीनियर जीडीए.........................\Bकहां से कितनी उगाही\Bजोन लक्ष्य वसूलीएक 36 10.68दो 50 5.36तीन 12 5.14चार 26 3.97पांच 48 5.34छह 70 8.29सात 40 4.09आठ 18 4.80
Source: Navbharat Times January 27, 2020 02:26 UTC