Fact Check: क्या बारकोड से हो सकती है ‘Made in China’ सामान की पहचान? - News Summed Up

Fact Check: क्या बारकोड से हो सकती है ‘Made in China’ सामान की पहचान?


दावालद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सेना के साथ हिंसक झड़प से 20 भारतीय जवान शहीद हो गए। इसके बाद से देशभर में आक्रोश है और लोग चीन में बने सामान का बहिष्कार कर रहे हैं। इस बीच एक मेसेज सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है जिसके मुताबिक, सामान पर मौजूद बारकोड के शुरुआती तीन अंको से हम यह पता कर सकते हैं कि सामान कहां बना है।टाइम्स फैक्ट चेक के एक पाठक ने यह हमें भेज इसकी सच्चाई जाननी चाही।इस मेसेज के मुताबिक, किसी सामान का बारकोड अगर 690 से 699 तक से शुरू हो वे उत्पाद उत्पाद चीन में बने और भारत में बने उत्पादों का बारकोड 890 से शुरू होता है।सच क्या है? यह मेसेज पूरा सच नहीं है। बारकोड के शुरुआती तीन अंक यह नहीं बताते की उत्पाद कहां बना है। ये तीन अंक यह बताते हैं कि उत्पाद से जुड़ी कंपनी किस देश की है।कैसे की पड़ताल? मेसेज से जुड़े कुछ कीवर्ड्स हमने गूगल पर सर्च किए तो हमें इसी दावे को लेकर न्यूज़ एजेंसी ‘रॉयटर्स’ के फैक्ट चेक का एक लिंक मिला। यह आर्टिकल, 21 अप्रैल, 2020 का था।इसके मुताबिक, अप्रैल में अमेरिका में भी यही दावा वायरल हुआ था। हालांकि, इस फैक्ट चेक के मुताबिक, बारकोड के पहले तीन अंक यह बताते हैं कि मैन्युफैक्चरिंग कंपनी किस देश की है न कि यह कि उत्पाद किस देश में बना है। इसका मतलब यह है कि हो सकता है कोई उत्पाद चीनी कंपनी का हो लेकिन वह भारत में बनाया गया हो।जानकारी के लिए बता दें कि किसी भी सामान पर दिखने वाली काली, सफेद लाइनें बारकोड होता है। बारकोड किसी उत्पाद के बारे में आंकड़े या सूचना लिखने का एक तरीका है। बारकोड किसी उत्पाद के बारे में पूरी जानकारी जैसे उसका मूल्य, उसकी मात्रा, किस देश में बना, किस कंपनी ने बनाया आदि देता है।आमतौर पर इन लाइनों के नीचे ही एक प्रोडक्ट नंबर भी लिखा रहता है। उत्पादकों को यह नंबर देने का काम ग्लोबल स्टैंडर्ड्स 1 संगठन यानी GS1 करता है। GS1 की वेबसाइट पर यह साफ-साफ लिखा है कि GS1 सदस्य कंपनियां किसी भी देश में अपना उत्पाद बना सकती हैं। कोड के पहले तीन अंक यह नहीं बताते कि कोई उत्पाद कहां बना है। हालांकि, यह सच है कि बारकोड के शुरुआती तीन अंक 690 से 699 के बीच हैं तो वह उत्पाद चीनी कंपनी का है।निष्कर्षटाइम्स फैक्ट चेक ने पाया है कि बारकोड के शुरुआती तीन अंकों के आधार पर यह नहीं पता लगाया जा सकता कि कोई उत्पाद कहां बना है। यह तीन अंक इस बात की जानकारी देते हैं कि उत्पाद जिस कंपनी का है वह किस देश की है। इसलिए सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा अधूरा है।


Source: Navbharat Times June 22, 2020 12:00 UTC



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