Economy News In Hindi : Stock market investors lost 27 lakh crore rupees in one year, 13.5 percent of country's GDP - News Summed Up

Economy News In Hindi : Stock market investors lost 27 lakh crore rupees in one year, 13.5 percent of country's GDP


30 मई,2019 को नरेंद्र मोदी ने लिया था प्रधानमंत्री पद की शपथबाजार का प्रदर्शन सिर्फ आर्थिक नीतियों के आधार पर नहीं होता हैदैनिक भास्कर May 30, 2020, 06:52 PM ISTमुंबई. शेयर बाजार के निवेशकों ने पिछले एक साल में दलाल स्ट्रीट में 27,00,000 करोड़ रुपए गंवा दिए। यह नुकसान देश के सकल घरेलू उत्पाद का 13.5 प्रतिशत है। यह तब हुआ है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दूसरे कार्यकाल का आज पहला साल पूरा कर रहे हैं। हालांकि उनके इस कार्यकाल में कोरोना ने बहुत ही बुरे तरीके से सरकार को प्रभावित किया है। 30 मई, 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ ली थी।सरकार के पैकेज से ज्यादा नुकसान निवेशकों को हुआबता दें कि सरकार ने कोविड-19 में राहत देने के लिए इसी महीने 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा की थी। यह कुल जीडीपी का 10 प्रतिशत था। लेकिन सरकार के इस पैकेज से 3 प्रतिशत ज्यादा की राशि निवेशकों ने एक साल में गंवा दी। यह नुकसान इसलिए हुआ क्योंकि शेयर बाजार अपने उच्च स्तर से टूटकर 26,000 से नीचे चला गया था। हालांकि यह उस स्तर से करीबन 20 प्रतिशत रिकवर भी हो चुका है।हर 10 में से 9 शेयरों ने निगेटिव रिटर्न दियाआंकड़े बताते हैं कि हर 10 शेयरों में से नौ शेयरों ने इस अवधि के दौरान नकारात्मक रिटर्न दिया है। बीएसई में लिस्टेड शेयरों में से सिर्फ 10 प्रतिशत ने एक साल में सम्मानजनक दो अंकों में रिटर्न दिया है। पहले से ही जीडीपी की गिरावट में कोविड-19 ने घी में आग डालने का काम किया है। जीडीपी चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में 3.1 प्रतिशत तक लुढ़क गई, क्योंकि इस पर कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन का शुरुआती असर पड़ा।जीडीपी 11 साल के निचले स्तर पर पहुंचीवित्त वर्ष 2020 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की ग्रोथ 4.2 प्रतिशत हो गई, जो 11 साल के निचले स्तर पर है। मासिक पीएमआई रीडिंग रिकॉर्ड निचले स्तर पर है। फैक्टरी उत्पादन अपने हाल पर रो रहा है। जोखिम मुक्त दर (बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दर) गिर रहे हैं। इससे निवेशकों को कुछ समझ में नहीं आ है कि कुछ भी निवेश के लायक बचा भी है या नहीं।पिछला तीन महीना मोदी सरकार के लिए ज्यादा भारी रहाएक विश्लेषक के अनुसार पिछले तीन महीनों में जो कुछ हुआ वह अभूतपूर्व था। स्पष्ट रूप से भारत की अपनी सीमाएं हैं। दिसंबर तिमाही तक विकास की धीमी गति एक हद तक जीएसटी रोलआउट जैसे पिछले सुधारों के दुष्प्रभावों का परिणाम था, जिसका परिणाम दिखने में समय लगा। पिछले 100 वर्षों में विश्व भर के बाजार गिरने के इतिहास पर नजर डालने से पता चलता है कि भारतीय बाजार में करेक्शन की स्थिति थी।जितने भी उपाय वित्तमंत्री ने किए, कोविड-19 ने पानी फेर दियाइंडिया इंक को लिफ्ट देने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कॉर्पोरेट टैक्स की दर में पहले प्रोत्साहन के बिना 30 फीसदी से 22 फीसदी और नई मैन्युफैक्चरिंग एंटिटीज के लिए 15 फीसदी की कटौती की। इस घोषणा का घरेलू शेयर बाजारों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। इससे जनवरी में बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे। कोविड-19 के आने के बाद सब किये किराये पर पानी फिर गया।2021 एक वॉशआउट का साल होगाविश्लेषकों का मानना है कि वित्त वर्ष 2021 एक वॉशआउट का साल होगा। हालांकि कुछ शेयरों की कीमतें काफी दिलचस्प होंगी। ये तीन साल तक मजबूत रिटर्न दे सकता है। आंकड़ों से पता चला है कि बीएसई में सूचीबद्ध शेयरों का मार्केट कैपिटलाइजेशन 17.7 प्रतिशत गिरकर 127.06 लाख करोड़ रुपए हो गया। कुल 2,684 सक्रिय रूप से कारोबार करने वाले शेयरों में से 2,308 ने निगेटिव रिटर्न दिया है। 17 ने लगभग ना के बराबर रिटर्न्स दिया है। केवल 359 स्टॉक्स (पूरे बीएसई का 13 प्रतिशत,) ने सकारात्मक रिटर्न दिया है। उनमें से 269 (बीएसई का सिर्फ 10 फीसदी) शेयरों ने 10 फीसदी का रिटर्न्स दिया।मोदी को 10 में से सात अंक मिलेमोदी 2.0 को 10 में से सात अंक देने वाले एचडीएफसी सिक्योरिटीज के दीपक जसानी ने कहा कि सरकार के प्रदर्शन को जज करने के लिए मार्केट कैपिटलाइजेशन को एकमात्र इंडिकेटर के रूप में नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा, "बाजार का प्रदर्शन सिर्फ आर्थिक नीतियों का काम नहीं है, बल्कि इसमें अन्य वैश्विक घटनाक्रमों की भी भूमिका होती है। जसानी ने कहा कि वही स्टॉक ज्यादा गिरे, जो कंपनियाँ ज्यादा कर्ज़ में थीं या पूंजी संबंधित अन्य मुश्किलों से घिरी हुई थी। उन्होंने कहा, "आप हर चीज के लिए सरकार को दोष नहीं दे सकते।मार्केट कैप में ज्यादा नुकसान जनवरी के बाद आयाआंकड़ों से पता चला है कि मार्केट-कैप में ज्यादा नुकसान जनवरी के बाद आया। कोरोनावायरस संकट ने भारत के दरवाजे इसी महीने में खटखटाए थे। जनवरी के अंत में बीएसई का मार्केट कैप 156 लाख करोड़ रुपए पर था। जसानी ने कहा कि कारोबारियों को बेड़ियों की जकड़न से मुक्त करने के लिए 2016 से सफाई प्रक्रिया चल रही है। यह प्रक्रिया और 1-2 साल तक चल सकती है। उन्होंने कहा, "तब, हम बैंकों या फिस्कल पॉलिसी पर तनाव पैदा किए बिना टिकाऊ विकास देख सकते हैं।मोदी ने कहा, दुनिया को प्रेरणा दे सकते हैं भारतीयदेश के नागरिकों को संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को कहा कि जहां भारत के पास आर्थिक संसाधन और अत्याधुनिक हेल्थकेयर सिस्टम है, वहीं विशाल आबादी और सीमित संसाधन इन सुविधाओं को सीमित कर देते हैं। "ऐसे समय में भारत सहित विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाएं कैसे ठीक होंगी, इस पर व्यापक बहस भी हो रही है। हालांकि, जिस तरह से भारत ने कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में अपनी एकता और संकल्प से दुनिया को आश्चर्यचकित किया है, उसे देखते हुए इस बात का दृढ़ विश्वास है कि हम आर्थिक पुनरुद्धार में भी एक मिसाल कायम करेंगे। आर्थिक क्षेत्र में 130 करोड़ भारतीय न सिर्फ दुनिया को हैरान कर सकते हैं, बल्कि उन्हें प्रेरणा भी दे सकते हैं।निवेश के लिए यह अच्छा समय हैभारत के बेहतर फंड मैनेजर्स में से एक एचडीएफसी म्यूचुअल फंड के


Source: Dainik Bhaskar May 30, 2020 13:41 UTC



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