Dainik Jagran बाल संवाद : डीएम साहब, बनारस की गलियां स्मार्ट क्यों नहीं हैं, छात्रों ने किया सवाल - News Summed Up

Dainik Jagran बाल संवाद : डीएम साहब, बनारस की गलियां स्मार्ट क्यों नहीं हैं, छात्रों ने किया सवाल


Dainik Jagran बाल संवाद : डीएम साहब, बनारस की गलियां स्मार्ट क्यों नहीं हैं, छात्रों ने किया सवालदैनिक जागरण बाल दिवस से शुरू शृंखला के तहत किशोर मन को मंच उपलब्ध करा रहा है ताकि वे व्यवस्था से जुड़े सवाल रखें। इस क्रम में जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा से बच्चों ने संवाद किया। यह श्रृंखला जारी रहेगी।वाराणसी, जेएनएन। दैनिक जागरण बाल दिवस से शुरू शृंखला के तहत किशोर मन को मंच उपलब्ध करा रहा है ताकि वे व्यवस्था से जुड़े सवाल रखें। इस क्रम में जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा से बच्चों ने संवाद किया। यह श्रृंखला जारी रहेगी। हमारी कोशिश है कि बच्चे मौजूदा समय को किस रूप में देखते हैं, उसे साझा करें।सवाल : वाराणसी को स्मार्ट सिटी घोषित किया गया है। इसके तहत बनारस में काफी भी खूब हुए हैं लेकिन बनारस की गलियां स्मार्ट क्यों नहीं हैं? गलियों को खोद कर छोड़ दिए हंै। वे कूड़े से पटी हैं हालत यह थी कि गणेश लेन के लोगों को पटरा लगाकर आना-जाना पड़ता है।-वर्षा शिधोरे, बल्लभ विद्यापीठ बालिका इंटर कालेज (भैरवनाथ)जवाब : काशी अति प्राचीन शहरों में से एक है। यह गलियों के शहर के रूप में भी जाना जाता है। वहीं स्मार्ट काशी योजना के तहत चरणबद्ध तरीके से कार्य कराए जा रहे हैं। शहर की सभी गलियों में एक साथ कार्य नहीं कराया जा सकता है। इससे वहां के निवासियों को आने-जाने में परेशानी होगी। ऐसे में प्रथम चरण में आठ वार्ड का चयन किया गया है। वहीं तीन वार्डो में काम शुरू हो गया गया। स्मार्ट शहर योजना के तहत गलियों में भविष्य को ध्यान में रखते हुए सीवर, पेयजल, केबल सहित अन्य ठोस कार्य कराए जा रहे हैं। समस्या यह है कि संकरी गलियों व छोटे-छोटे टुकड़ों में बड़े ठीकेदार कार्य करने को तैयार नहीं हैं। संकरी गलियां होने के कारण इनमें कार्य करना चुनौती है। विदेशों में कांट्रेक्टर्स के पास सेफ्टी सहित अन्य संसाधन हैं। यहां कांट्रेक्टरों के पास संसाधनों का अभाव है। ऐसे में दिन में ही काम कराए जा रहे हैं। विकास का कार्य जब भी होगा, थोड़ी बहुत परेशानियों का सामना करना ही पड़ता है। चरणबद्ध तरीके से पूरे शहर की गलियों को दुरुस्त कराया जाएगा।सवाल : बालिकाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं अधिक हो रही हैं। छात्राएं अपने आप को असुरक्षित महसूस करती हैं। ऐसा क्यों है? -श्रुति मिश्रा, अग्रसेन कन्या इंटर कालेज (टाउनहाल)जवाब : वर्तमान दौर में सामाजिक ताना-बाना टूट सा गया है। पहले जिस गांव में लोग अपनी बिटिया की शादी करते थे। उस गांव में लोग पानी नहीं पीते थे। ऋषि-मुनियों द्वारा बनाई गई परंपराओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण छिपा हुआ है। एक जेनेटिक्स व डीएनए यानी गोत्र शादी नहीं होती थी। पहले गांवों में किसी भी बहन बेटी की शादी होती थी। पूरा गांव सहयोग करता था। आधुनिकता के नाम पर समय तेजी से बदला है। अब लोग शादी-विवाह में भी गोत्र नहीं देख रहे हैं। अपराध बढऩे का प्रमुख कारण सामाजिक व नैतिक मूल्यों का पतन है। वहीं टीवी व इंटरनेट ने भी सामाजिक ताने-बाने को काफी नुकसान पहुंचाया है। बहरहाल इसे देखते हुए ही 'मिशन शक्तिÓ अभियान चलाने की जरूरत पड़ रही है। इसके माध्यम से हम बालिकाओं को जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्हें मार्शल आट्र्स में भी दक्ष किया जा रहा है ताकि वह अपनी सुरक्षा स्वयं कर सकें। साथ ही बालिकाओं की सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं ताकि मुसीबत में तत्काल पुलिस मदद कर सके। इसके अलावा लोगों को बहन-बेटियों की रक्षा करने के लिए शपथ दिला रहे हैं। वहीं बदमाशों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है। अवांछनीय तत्वों को जेल भेजा जा रहा है। आपके साथ छोटी-बड़ी हर बात हो तो परिवार में या महिला पुलिस से शेयर जरूर करें। वहीं नेट व स्मार्ट फोन का उपयोग कम से कम करें।सवाल : विद्यालय में कंप्यूटर सहित अन्य संसाधन मौजूद हैं लेकिन शिक्षक के अभाव में इसका लाभ हम लोगों को नहीं मिल पा रहा है। विद्यालयों में अध्यापकों की कमी बनी हुई। इसके चलते पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। ऐसा कब तक चलेगा। अध्यापक कब मिलेंगे? - शांभवी टंडन, बल्लभ विद्यापीठ बालिका इंटर कालेज (भैरवनाथ)जवाब : कोई भी संक्रमित बीमारी का इलाज जागरूकता ही है। इसी उद्देश्य से सरकार की पहली प्राथमिकता लोगों को जागरूक करना था। हर व्यक्ति को जागरूक किया जा चुका है। जागरूक करने के लिए ही बगैर मास्क के सड़क पर चलने वाले लोगों का चालान किया गया। इसका भी विरोध झेलना पड़ा। इसके बावजूद लापरवाही का मुख्य कारण लोगों के भीतर से कोविड-19 का डर निकल जाना है। हालांकि कोरोना संक्रमण का खतरा पहले जैसा ही बना हुआ है। दिल्ली में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में फिर सख्ती करने की योजना बनाई जा रही है। इस संबंध में अधिकारियों, व्यापारियों सहित अन्य लोगों के साथ जल्द ही बैठक करने वाले हैं। कोविड-19 की मानकों के अनुपालन को लेकर दोबारा अभियान चलाया जाएगा। दूसरी ओर नागरिकों को भी अपना दायित्व समझना होगा।सवाल : विद्यालय का भवन इतना जर्जर है कि कभी भी छत गिर सकती है। वहीं जगह का भी अभाव है। यदि सभी पढऩे आ जाएं तो क्लास में बैठने की जगह नहीं मिलती। लैब का भी यही हाल है। विद्यालय भवन के बाहर कचड़ा फैला रहता है।-काजल कुमारी पटवा, राधा किशोरी बालिका इंटर कालेज (रामनगर)जवाब : विद्यालय की व्यवस्था देखने खुद जाऊंगा। नगर पालिका में संसाधन की कमी है। शायद इसके कारण भवन की मरम्मत अब तक नहीं हो सकी है। भवन के जीर्णोद्धार के लिए जल्द ही योजना बनवाई जाएगी ताकि किसी न किसी मद से भवन की मरम्मत कराई जा सके। वहीं यदि विद्यालय में छात्र संख्या अधिक है और बैठने की जगह कम है तो पास के राजकीय विद्यालयों में कुछ कक्षाएं स्थानांतरित करने पर भी विचार किया जाएगा।सवाल : अतिक्रमण के कारण अक्सर जाम लगता है। वहीं सड़कों पर सीवर ओवरफ्लो करने से स्कूल आने-जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।-आकृति उपाध्याय, अग्रसेन कन्या इंटर कालेज (टाउनहाल)जवाब : नगर को जाम से मुक्ति


Source: Dainik Jagran November 19, 2020 03:56 UTC



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