भोपाल के तालाब पर कब्जा भास्कर के ड्रोन में कैद:भोपाल की लाइफ लाइन बड़ा तालाब पर अतिक्रमण की सारी हदें पार कर चुकी हैं। अतिक्रमणकारियों ने इसे चारों ओर से अतिक्रमण में जकड़ रखा है। सरकारी रिपोर्ट में ये सामने आ चुके हैं, पर कार्रवाई जमीन पर न होकर फाइलों में ही सिमटी रही।. अब एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्राइबल) की फटकार से अफसर हरकत में आए और सर्वे शुरू किया। दैनिक भास्कर ने 200 फीट की ऊंचाई से भोपाल की लाइफ लाइन से खिलवाड़ करने वाले अतिक्रमण को ड्रोन कैमरे में कैद किया।करीब 8 महीने पहले ही एफटीएल से जुड़कर ही एक 2 मंजिला मकान बना दिया गया। इसी में स्वीमिंग पूल भी है। इसे ही टीटी नगर एसडीएम वृत की टीम ने लिस्टेड किया है। इन अतिक्रमण की जद में रसूखदारों के साथ-साथ होटल जहांनुमा, सायाजी, वन विहार समेत नगर निगम के सरकारी निर्माण भी हैं।ड्रोन से देखिए बड़ा तालाब में अतिक्रमण की 5 तस्वीरें…बड़े तालाब के नजदीक स्विमिंग पूल और बंगला।बड़े तालाब से सटाकर इस तरह बंगले बनाए गए हैं।तालाब के किनारे लोगों ने प्लॉट काट दिए हैं।बड़ा तालाब के कैचमेंट एरिया में फार्म हाउस भी बने हैं।तालाब के किनारे बनी कॉलोनियां और बढ़ती आबादी।सेवनिया गौंड, बिशनखेड़ी में मिले 20 से ज्यादा अतिक्रमण सर्वे टीम को सेवनिया गौंड, बिशनखेड़ी समेत आसपास के इलाकों में करीब तीन किमी के दायरे में 20 से ज्यादा बड़े अतिक्रमण लिस्टेड किए। इसमें फेंसिंग, बाउंड्रीवॉल, स्वीमिंग पूल, टीन शेड बना चुके थे, जो एफटीएल से 50 मीटर के दायरे में ही हैं।सैर सपाटा, बोट क्लब-वन विहार का हिस्सा भी बड़ा तालाब किनारे प्राइवेट के साथ सरकारी अतिक्रमण भी सामने आया है। एफटीएल के 50 मीटर के दायरे में सैर सपाटा, बोट क्लब, विंड एंड वेव्स होटल और वन विहार का कुछ हिस्सा भी आ रहा है। प्रशासन ने इन्हें भी अतिक्रमण के तौर पर लिस्टेड किया है।सर्वे में इतने 220 अतिक्रमण सामने आए हैं बैरागढ़ सर्किल में 220 अतिक्रमण सामने आए हैं। इन्हें हटाने की प्रक्रिया जारी है। टीटी नगर में 127 अतिक्रमण चिह्नित कर नोटिस जारी किए हैं। इनमें 59 निजी और 78 सरकारी शामिल हैं। परिवहन विभाग के पूर्व कांस्टेबल सौरभ शर्मा की सास का रो-हाउस भी अतिक्रमण की सूची में शामिल हैं। प्रशासन की टीम ने सेवनिया गौंड, प्रेमपुरा सहित अन्य क्षेत्रों में भी सीमांकन किया था।वन विहार के पास जॉक रेस्टोरेंट, लहर रेस्टोरेंट, विंड्स एंड वेब, होटल रंजीत लेकव्यू, फूड जोन की 26 दुकानें, गेम जोन, कचरा कैफे, सुलभ कॉम्प्लेक्स और लहर जिम सहित अन्य निर्माण शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि किनारे से 100 से अधिक झुग्गी भी हटेंगी।बड़ा तालाब की हद जानने इनका सीमांकन भी सूत्रों के अनुसार, वन विहार रोड स्थित होटल रंजीत, होटल टोरकस, अन्नतास गार्डन, लेक हाउस का कुछ हिस्सा आ रहा है। वहीं, मैथलीशरण गुप्ता, कीर्ति जैन, पीएस भटनागर, मोहिनी देवी, बसंत कौर, सौम्या श्रीवास्तव, प्रकाश चंदेल, मुकेश शर्मा आदि के निर्माण भी जद में आ रहे हैं।इसके अलावा बैरागढ़ तहसील क्षेत्र में शामिल बड़ा तालाब का काफी हिस्सा भी जद में आ रहा है। कुछ दिन पहले इन पर कार्रवाई की गई। वहीं, टीटी नगर एसडीएम वृत्त की टीमें भी जल्द कार्रवाई करेगी।बड़ा तालाब के 5 बड़े इलाकों में पहुंची भास्कर टीम दैनिक भास्कर ने बड़ा तालाब के पिछले व मौजूदा 4 सर्वे, एनजीटी में याचिका और अब तक हुई कार्रवाई के बारे में पड़ताल की। तालाब के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) पर भी पहुंचा।एक्सपर्ट राशिद नूर ने बताया, शहरी सीमा में 50 मीटर और ग्रामीण सीमा में 250 मीटर के दायरे में कोई निर्माण नहीं होना चाहिए, लेकिन जब भास्कर टीम यहां पहुंची तो एफटीएल मुनार से सटकर ही पक्के निर्माण बने हुए नजर आए। ऐसे 1 या 2 नहीं, बल्कि सैकड़ों निर्माण है।कई रसूखदारों के फार्म हाउस भी किनारे पर हैं भदभदा, बिसनखेड़ी, गौरागांव, बील गांव, सेवनिया गौंड और सूरजनगर में बड़ी बिल्डिंग, फॉर्म हाउस, रिसोर्ट भी देखने को मिले। बड़ा तालाब रामसर साइट भी है। बावजूद सालों से सिर्फ फाइलों में ही कब्जे हटे हैं।मुनार से जुड़ी बाउंड्रीवॉल मंगलवार को टीम जिस इलाके में सीमांकन करने पहुंची, वहां पर भास्कर टीम ने भी दौरा किया। सूरजनगर, सेवनिया गौंड में तो जिस जगह पर रामसर साइट है और नगर निगम की मुनार लगी है। ठीक उससे जुड़ी बिल्डिंग की बाउंड्रीवॉल थी।5 महीने पहले यहां नगर निगम की सीवेज लाइन भी बिछाई गई है। मुनार के पास सड़क भी भर दी गई है, जो नियम के विरुद्ध है। दूसरी ओर, गौरागांव से बील गांव की तरफ सड़क भी तालाब के बीच से ही गुजरी है।बड़ा फर्जीवाड़ा...दो तरह की मुनारें मिली बड़ा तालाब के किनारों पर भू-माफिया भी सक्रिय है, जो कम दाम पर प्लाट देने का वादा कर रहे हैं। उन्होंने और लोगों ने इस दायरे को लेकर ही भ्रम की स्थिति भी खड़ी की है। जिन मुनारों से एफटीएल की सीमा तय होती है, उन्हीं में फर्जीवाड़ा भी किया गया है।मौके पर एफटीएल बताने वाली 5 तरह की मुनारें लगी हुई मिली। इनमें से एक में बीएमसी यानी, भोपाल म्युनसिपल कॉरपोर्रेशन लिखा है। बाकी पर सफेद रंग है। लिखा कुछ नहीं है। इन्हीं फर्जी मुनारों के आसपास अतिक्रमण और अवैध निर्माण है।इसलिए सीमांकन शुरू किया करीब पांच महीने पहले बड़ा तालाब के अतिक्रमण पर एनजीटी सख्त हुआ था। तब कार्रवाई की सिर्फ रस्म अदा की गई थी। फरवरी में सांसद आलोक शर्मा ने जिम्मेदारों की बैठक लेकर फटकार लगा दी। इसके बाद फिर से सर्वे शुरू किया गया।बड़ा तालाब में अतिक्रमण को लेकर एनजीटी में एक याचिका पर्यावरणविद् राशिद नूर ने लगाई थी। इस पर एनजीटी ने स्पष्ट किया कि वेटलैंड्स (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 का नियम-4 अब पूरे मध्यप्रदेश के सभी जलाशयों पर लागू होगा।बड़ा तालाब का सिर्फ कागजों का मामला नहीं, बल्कि भोपाल के पर्यावरण संतुलन से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। तालाब में अब 41 नालों से सीवेज गिर रहा है और 227 अतिक्रमण अब तक हटाए नहीं गए।सिलसिलेवार जानिए, अब तक क्या हुआ...पहला सर्वे: साल 2016
Source: Dainik Bhaskar March 21, 2026 12:02 UTC