क्या होता है वॉलेंटरी प्रोविडेंट फंड वॉलेंटरी प्रोविडेंट फंड एक तरह से एंप्लॉई प्रोविडेंट फंड (Employee's Provident Fund) यानी ईपीएफ (EPF) का ही एक्सटेंशन है। वीपीएफ में सिर्फ नौकरीपेशा लोग योगदान कर सकते हैं और वह अधिकतर अपनी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते जितना योगदान कर सकते हैं। बता दें कि ईपीएफ में कर्मचारी की तरफ से बेसिक सैलरी का 12 फीसदी और उतना ही नियोक्ता की तरफ से योगदान किया जाता है। आइए जानते हैं वो 5 वजहें, जिनके चलते वीपीएफ है फायदे का सौदा।1- वीपीएफ में मिलता है तगड़ा ब्याज! वॉलेंटरी प्रोविडेंट फंड में उतना ही ब्याज मिलता है, जिसका सरकार ईपीएफ के लिए निर्धारित करती है। वित्त वर्ष 2020-21 में सरकार ने 8.5 फीसदी ब्याज दिया था। अब अगर इसकी तुलना बाकी सेविंग के तरीकों से करें, जैसे 5 साल की बैंक एफडी, सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट, पीपीएफ और पीएम वय वंदन योजना तो वीपीएफ में इन सभी से अधिक ब्याज मिलता है, वो भी सरकारी गारंटी के साथ।2- तीन लेवल पर मिलती है टैक्स छूट वीपीएफ में तीन लेवल पर टैक्स छूट मिलती है। वीपीएफ में किए गए 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर आयकर अधिनियम की धारी 80सी के तहत टैक्स छूट मिलती है। इस पर कमाए गए रिटर्न पर भी टैक्स नहीं लगता है, अगर आप कम से कम 5 साल तक लिए निवेश रखते हैं। वहीं जब आप 5 साल बाद मेच्योरिटी पर पैसे निकालते हैं तो भी आपको पैसों पर टैक्स नहीं चुकाना पड़ता है। हालांकि, अगर आप वीपीएफ में 2.5 लाख रुपये से अधिक का निवेश करते हैं तो उसके ब्याज पर आपको टैक्स चुकाना होगा, जो व्यवस्था बजट 2021 में की गई है।3- कम लॉक-इन पीरियड वीपीएफ का लॉक-इन पीरियड 5 साल का होता है, जबकि अगर पीपीएफ की बात करें तो वहां पर 15 साल के लिए पैसे लॉक हो जाते हैं। 5 साल की मेच्योरिटी से पहले अगर आप वीपीएफ से पैसे निकालते हैं तो आपको तमाम शर्तें तो माननी ही होंगी, साथ ही आप पर टैक्स भी लगेगा। अगर 5 साल की मेच्योरिटी के बाद पैसे निकालेंगे तो टैक्स की मार नहीं पड़ेगी और आप अधिक पैसे बचा पाएंगे।4- पैसे निकालने में आसानी वीपीएफ अकाउंट से पैसे निकालना भी आसान होता है। आप किसी भी मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की उच्च शिक्षा या शादी, घर बनाने या खरीदने या रेसिडेंशियल जमीन खरीदने और होम लोन के भुगतान के लिए इन पैसों को निकाल सकते हैं। हालांकि, कोशिश करनी चाहिए कि पैसे निकालने की जरूरत ना ही पड़े, क्योंकि इसमें ब्याज बहुत अच्छा मिलता है, जो आपको और कहीं नहीं मिलता5-ट्रांसफर करना भी है आसान वीपीएफ ट्रांसफर करना भी उतना ही आसान है, जितना ईपीएफ को ट्रांसफर करना आसान है, क्योंकि दोनों ही एक यूनीक नंबर यूएएन से जुड़े होंते हैं। जब आप नौकरी बदलते हैं और एक नई कंपनी में जाते हैं तो आपका वीपीएफ भी ईपीएफ अकाउंट के साथ ही ट्रांसफर हो जाता है। आपके पास दो विकल्प होते हैं एक तो ये कि आप अपना अकाउंट बंद कर के पैसे निकाल लें या फिर पहले की तरह ही वीपीएफ में निवेश जारी रखें। अगर आप ये पैसे 5 साल के बाद निकालते हैं तो टैक्स नहीं लगेगा, लेकिन जल्दी निकालते हैं तो टैक्स चुकाना होगा।
Source: Navbharat Times April 28, 2021 08:37 UTC