Bangladesh Election: Sheikh Hasina Seat Faces Hindu Rivals Challenge - News Summed Up

Bangladesh Election: Sheikh Hasina Seat Faces Hindu Rivals Challenge


Hindi NewsInternationalBangladesh Election: Sheikh Hasina Seat Faces Hindu Rivals Challengeबांग्लादेश में शेख हसीना की सीट पर हिंदू उम्मीदवार: BNP को दे रहे कड़ी टक्कर; कल वोटिंग और संविधान सुधारों पर जनमत संग्रहढाका 18 घंटे पहले लेखक: एसएम अमानुर रहमानकॉपी लिंकशेख हसीना की गोपालगंज-3 सीट पर चुनाव लड़ने वाले हिंदू उम्मीदवार गोविंद चंद्र प्रमाणिक की तस्वीर।बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पारंपरिक सीट गोपालगंज-3 पर मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है। यहां BNP के उम्मीदवार एसएम जिलानी को दो हिंदू उम्मीदवार कड़ी टक्कर दे रहे हैं।निर्दलीय उम्मीदवार गोविंद चंद्र प्रमाणिक और गणो फोरम के दुलाल चंद्र विश्वास को मजबूत दावेदार माना जा रहा है। गोपालगंज-3 सीट में टुंगीपाड़ा और कोटालिपाड़ा इलाके आते हैं।टुंगीपाड़ा में करीब 26% और कोटालिपाड़ा में 47% से ज्यादा हिंदू आबादी है। यह इलाका शेख मुजीबुर रहमान की जन्मस्थली है और लंबे समय से अवामी लीग का गढ़ माना जाता रहा है।गोविंद चंद्र प्रमाणिक का कहना है कि उन्हें लोगों से अच्छा समर्थन मिल रहा है। वहीं एक 23 साल के युवक ने कहा कि अगर वोट नहीं दिया तो हमला या केस हो सकता है। उसने कहा कि वोट तो देंगे, लेकिन शायद इस बार BNP को वोट दें।बांग्लादेश में 12 फरवरी को वोटिंग और संविधान सुधारों पर जनमत संग्रह होना है।गोविंद चंद्र प्रमाणिक जिस गोपालगंज-3 सीट से चुनाव लड़ रहे हैं वहां 50% से ज्यादा हिंदू मतदाता हैं।BNP ने 80 हिंदुओं को टिकट दियाBNP ने भी कई अल्पसंख्यक उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। उसके 80 हिंदू उम्मीदवारों में से ढाका-1 सीट से गोयेश्वर चंद्र रॉय को मजबूत माना जा रहा है। मगुरा में निताई रॉय चौधरी के सामने कोई बड़ा प्रतिद्वंद्वी नहीं है।बागेरहाट-1 सीट जो पहले अवामी लीग का गढ़ रही है, वहां BNP के कपिल कृष्ण मंडल मजबूत माने जा रहे हैं। बागेरहाट-4 में सोमनाथ डे भी जीत के दावेदार बताए जा रहे हैं।जमात-ए-इस्लामी ने भी पहली बार किसी हिंदू उम्मीदवार को टिकट दिया है। पार्टी ने खुलना-1 सीट से कृष्णा नंदी को मैदान में उतारा है। यहां मुकाबला BNP के आमिर एजाज खान और सीपीबी के किशोर कुमार रॉय से है। कृष्णा नंदी अपने सरल और मजाकिया अंदाज के कारण सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं।हिंदू बहुल जिलों में भी बड़े दलों ने हिंदू उम्मीदवार नहीं उतारेगोपालगंज और खुलना के अलावा बागेरहाट, बरीसाल, पिरोजपुर, मगुरा, जेसोर और दिनाजपुर जिलों में भी हिंदू आबादी अच्छी खासी है। लेकिन बरीसाल, पिरोजपुर, जेसोर और दिनाजपुर में इस बार बड़ी पार्टियों ने हिंदू उम्मीदवार नहीं उतारे हैं।बरीसाल-5 सीट से डेमोक्रेटिक यूनाइटेड फ्रंट की डॉ. मोनिषा चक्रवर्ती चर्चा में हैं। बरीसाल-2 से गणो अधिकार परिषद के रंजीत कुमार बरोई चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन उनकी जीत की संभावना कम मानी जा रही है।पिरोजपुर में कोई अल्पसंख्यक उम्मीदवार मैदान में नहीं है। जेसोर-4 से BMJP के सुकृति कुमार मंडल चुनाव लड़ रहे हैं। दिनाजपुर-3 से CPB के अमृत कुमार रॉय और दिनाजपुर-1 से जकर पार्टी के रघुनाथ चंद्र रॉय मैदान में हैं, लेकिन उनकी जीत की उम्मीद बहुत कम बताई जा रही है।साउथ एशिया के पावर बैलेंस के लिए अहम बांग्लादेशबांग्लादेश का आम चुनाव तय करेगा कि देश आगे भारत के करीब रहेगा या पाकिस्तान और चीन की तरफ झुकेगा। इससे साउथ एशिया का पावर बैलेंस बदल सकता है। इसी वजह से इस चुनाव को बेहद अहम माना जा रहा है।बांग्लादेश साउथ एशिया के पावर बैलेंस के लिए इसलिए अहम है क्योंकि यह देश भूगोल, राजनीति, अर्थव्यवस्था और रणनीतिक हितों चारों मोर्चों पर एक साथ असर डालता है।बांग्लादेश, भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को लगभग चारों तरफ से घेरता है। भारत का नॉर्थ-ईस्ट सिलीगुड़ी कॉरिडोर के जरिए भारत से कनेक्ट होता है। ऐसे में बांग्लादेश की भूमिका भारत के लिए कनेक्टिविटी, सुरक्षा और सप्लाई लाइनों के लिहाज से बेहद संवेदनशील हो जाती है।दूसरी बड़ी वजह है भारत-चीन की रणनीतिक खींचतान। चीन पिछले कुछ सालों में बांग्लादेश में बंदरगाह, सड़क, बिजली और इन्फ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश कर चुका है। बांग्लादेश अगर चीन के ज्यादा करीब जाता है तो यह भारत के लिए सीधा रणनीतिक झटका होता है, खासकर बंगाल की खाड़ी और इंडियन ओशन रीजन में।बांग्लादेश की समुद्री सीमा इस इलाके को रणनीतिक रूप से बहुत अहम बना देती है। यह इलाका ग्लोबल शिपिंग, एनर्जी रूट्स और नौसैनिक गतिविधियों के लिए बेहद संवेदनशील है।चौथा फैक्टर है इस्लामिक राजनीति और कट्टरपंथ। बांग्लादेश मुस्लिम बहुल देश है, लेकिन अब तक उसकी राजनीति तुलनात्मक रूप से संतुलित रही है। अगर वहां राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती है या कट्टरपंथ को जगह मिलती है, तो इसका असर सिर्फ बांग्लादेश तक सीमित नहीं रहता, बल्कि भारत, म्यांमार और पूरे साउथ एशिया की सुरक्षा पर पड़ता है।-------------------यह खबर भी पढ़ें…बांग्लादेश को 35 साल बाद नया PM मिलेगा:चुनाव पर भारत-पाक और चीन की नजर, बदल जाएगा साउथ एशिया का पावर बैलेंसबांग्लादेश में 12 फरवरी को संसदीय चुनाव होने जा रहे हैं। पूर्व पीएम शेख हसीना के देश छोड़ने और खालिदा जिया के निधन के बाद यह पहला चुनाव है। 1991 से 2024 तक बांग्लादेश की राजनीति में इन दो नेताओं का दबदबा रहा। पढ़ें पूरी खबर….


Source: Dainik Bhaskar February 11, 2026 05:16 UTC



Loading...
Loading...
  

Loading...

                           
/* -------------------------- overlay advertisemnt -------------------------- */