Hindi NewsInternationalBangladesh Clash: BNP, Jamat Workers Clash Leaves 1 Dead, 65 Injuredबांग्लादेश में BNP और जमात कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प: आगे की कुर्सियों पर बैठने के लिए लड़े, 1 शख्स की मौत, 65 घायल12 घंटे पहलेकॉपी लिंकबांग्लादेश के शेरपुर में बुधवार को जमात और BNP के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई।बांग्लादेश के शेरपुर जिले में एक कार्यक्रम के दौरान बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात समर्थकों के बीच हुई झड़प में जमात नेता मौलाना मोहम्मद रेजाउल करीम (42) की मौत हो गई।उन्हें गंभीर हालत में मयमनसिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां बुधवार रात करीब 9:45 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया। वे शेरपुर के श्रीबर्दी उपजिला जमात इकाई के सचिव थे।घटना बुधवार दोपहर करीब 3 बजे झेनेगाती उपजिला मिनी स्टेडियम में हुई। यहां प्रशासन की तरफ से एक कार्यक्रम रखा गया था, जिसमें शेरपुर-3 सीट से चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों को मतदाताओं के सामने अपना चुनावी मेनिफेस्टो रखने के लिए बुलाया गया था।प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार्यक्रम शुरू होने से पहले BNP और जमात समर्थकों के बीच आगे की कतार में कुर्सियों पर बैठने को लेकर बहस हुई। यह बहस धीरे-धीरे धक्का-मुक्की और फिर हिंसक झड़प में बदल गई। इस झड़प में कम से कम 65 लोग घायल हुए।तस्वीर झड़प में मारे गए जमात नेता मौलाना मोहम्मद रेजाउल करीम की है।जमात के दो अन्य नेता भी घायालप्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि झड़प के दौरान कई मोटरसाइकिलें तोड़ दी गईं और 100 से ज्यादा कुर्सियां क्षतिग्रस्त हो गईं। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, घायलों में से 25 को भर्ती किया गया और 20 को प्राथमिक इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई।जमात उम्मीदवार नुरुज्जमान बादल ने बताया कि झड़प में उनकी पार्टी के दो नेता अमीनुल इस्लाम और मौलाना ताहिरुल इस्लाम भी घायल हुए। उन्हें मैमनसिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया। बाद में ताहिरुल इस्लाम को बाद में ढाका भेजा गया।नुरुज्जमान बादल ने फेसबुक पोस्ट में आरोप लगाया कि BNP समर्थक देर से कार्यक्रम में पहुंचे। कुर्सियों को लेकर हुए विवाद के बाद उन्होंने “स्थानीय हथियारों” से जमात समर्थकों पर हमला किया। वहीं, BNP उम्मीदवार महमूदुल हक रुबेल और नुरुज्जमान बादल ने एक-दूसरे के समर्थकों पर हिंसा शुरू करने के आरोप लगाए हैं।जमात और BNP कार्यकर्ताओं ने झड़प के दौरान रैली में मौजूद कुर्सियों को तोड़ दिया।BNP ने जिला कमेटी को सस्पेंड कियाघटना के बाद BNP ने बड़ा संगठनात्मक कदम उठाया। पार्टी के वरिष्ठ संयुक्त महासचिव रुहुल कबीर रिजवी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि शेरपुर जिला BNP की 41 सदस्यीय कन्वीनिंग कमेटी को अगले आदेश तक निलंबित कर दिया गया है।यह कमेटी कन्वीनर एडवोकेट सिराजुल इस्लाम और सदस्य सचिव एबीएम मामुनुर रशीद पलाश के नेतृत्व में काम कर रही थी। शेरपुर के पुलिस अधीक्षक मोहम्मद कमरुल इस्लाम ने बताया कि पुलिस और सुरक्षा बल मौके पर पहुंचे और हालात को काबू में किया। इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। खबर लिखे जाने तक इस मामले में कोई केस दर्ज नहीं हुआ था। इस बीच, जमात नेता की मौत के विरोध में ढाका विश्वविद्यालय और जगन्नाथ विश्वविद्यालय में छात्रों ने अलग-अलग प्रदर्शन किए।जगन्नाथ विश्वविद्यालय में करीब 100 छात्रों ने देर रात परिसर में जुलूस निकाला और BNP के खिलाफ नारे लगाए।बांग्लादेश में सरकार बना सकती है जमातबांग्लादेश में अगले महीने होने वाले आम चुनाव में एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल सकता है। लंबे समय तक राजनीति से बाहर रही पाकिस्तान समर्थक कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी पहली बार सरकार बनाने के बेहद करीब पहुंचती नजर आ रही है।न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक हाल ही में हुए दो अलग-अलग सर्वे में जमात देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। वह पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को कड़ी टक्कर दे रही है। बांग्लादेश में 12 फरवरी को 300 सीटों संसदीय पर आम चुनाव होंगे।जमात-ए-इस्लामी वही पार्टी है जिसने 1971 में बांग्लादेश की आजादी का विरोध किया था और पाकिस्तानी सेना का साथ दिया था। देश की आजादी के बाद 1972 में इस पर बैन लगा दिया गया था। यह बैन 1975 में हटाया गया और 1979 में जियाउर रहमान के शासन में पार्टी को चुनाव में भाग लेने की अनुमति मिली।जमात ए इस्लामी के नेता शफीकुर रहमान के मुताबिक पार्टी अब टकराव की जगह जनकल्याण पर जोर दे रही है।सर्वे में जमात और BNP में मामूली अंतरअमेरिकी संस्था इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट (IRI) ने दिसंबर में कराए गए एक सर्वे में बताया था कि BNP को 33% और जमात को 29% लोगों का समर्थन मिला है।वहीं जनवरी में किए गए एक जॉइंट सर्वे में BNP को 34.7% और जमात को 33.6% समर्थन मिला था। यह सर्वे नरेटिव, प्रोजेक्शन BD, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ एंड डिप्लोमेसी (IILD) और जगोरन फाउंडेशन ने मिलकर किया था।अवामी लीग पर बैन से जमात को फायदा संभवअगस्त 2024 में हुए छात्र आंदोलन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिर गई थी, जिसके बाद उनकी पार्टी अवामी लीग पर बैन लगा दिया गया। इसके बाद से नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस देश की अंतरिम सरकार चल रहे हैं।रॉयटर्स के मुताबिक, अवामी लीग पर बैन लगने के बाद बांग्लादेश की राजनीति में खाली जगह बनी, जिसका फायदा जमात-ए-इस्लामी को मिला। लंबे समय से हाशिए पर रही यह पार्टी अब सत्ता के करीब नजर आ रही है। जमात ने ऐलान किया है कि वह 179 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।दूसरी तरफ BNP की कमान अब खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान के हाथ में है। खालिदा जिया की हाल ही में मौत हो चुकी है।बांग्लादेश में भारत के लोकसभा चुनाव जैसी ही चुनावी प्रक्रियाबांग्लादेश में भी भारत के लोकसभा चुनाव जैसी ही चुनावी प्रक्रिया है। यहां संसद सदस्यों का चुनाव भारत की तरह ही फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली के जरिए
Source: Dainik Bhaskar January 29, 2026 18:20 UTC