60 हजार से ज्यादा मासिक वेतन पाने वाली महिला को मिला गुजारा भत्ते का हक - News Summed Up

60 हजार से ज्यादा मासिक वेतन पाने वाली महिला को मिला गुजारा भत्ते का हक


घरेलू हिसा के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने महानगर दंडाधिकारी (महिला न्यायालय) के निर्णय को पलटते हुए 60 हजार रुपये से अधिक वेतन पाने वाली महिला को गुजारा भत्ते का हकदार माना है। न्यायालय ने आदेश में कहा है कि पत्नी को पति के समान स्तर का जीवन जीने का अधिकार है। पति का कर्तव्य है कि वह पत्नी की दैनिक जरूरतें पूरी करने के अलावा उसके चिकित्सीय खर्चो को वहन करे। आनंद विहार में रहने वाली प्रियंका धींगरा भाटिया निजी बैंक में कार्यरत हैं। 15 नवंबर 2016 को उनकी शादी हरि नगर में रहने वाले अक्षय भाटिया से हुई थी। प्रियंका धींगरा भाटिया ने महिला संरक्षण कानून के तहत मई 2018 में पति अक्षय भाटिया के खिलाफ घरेलू हिसा का वाद दायर किया था। जिसमें उन्होंने पति के समान स्तरीय जीवन जीने का अधिकार मांगते हुए गुजारा भत्ता तय करने की गुहार लगाई थी।आशीष गुप्ता, पूर्वी दिल्ली :घरेलू हिसा के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने महानगर दंडाधिकारी (महिला न्यायालय) के निर्णय को पलटते हुए 60 हजार रुपये से अधिक वेतन पाने वाली महिला को गुजारा भत्ते का हकदार माना है। न्यायालय ने आदेश में कहा है कि पत्नी को पति के समान स्तर का जीवन जीने का अधिकार है। पति का कर्तव्य है कि वह पत्नी की दैनिक जरूरतें पूरी करने के अलावा उसके चिकित्सीय खर्चो को वहन करे।आनंद विहार में रहने वाली प्रियंका धींगरा भाटिया निजी बैंक में कार्यरत हैं। 15 नवंबर 2016 को उनकी शादी हरि नगर में रहने वाले अक्षय भाटिया से हुई थी। प्रियंका धींगरा भाटिया ने महिला संरक्षण कानून के तहत मई 2018 में पति अक्षय भाटिया के खिलाफ घरेलू हिसा का वाद दायर किया था। जिसमें उन्होंने पति के समान स्तरीय जीवन जीने का अधिकार मांगते हुए गुजारा भत्ता तय करने की गुहार लगाई थी। कड़कड़डूमा स्थित महानगर दंडाधिकारी (महिला न्यायालय) में इस मामले की सुनवाई हुई थी। इस न्यायालय ने प्रियंका की नौकरी और उनके वेतन के आधार पर उन्हें सक्षम मानते हुए पांच मार्च 2020 को उनकी अर्जी खारिज कर दी थी। इस निर्णय के खिलाफ प्रियंका ने जिला एवं सत्र न्यायालय में याचिका दायर की। जिला एवं सत्र न्यायाधीश यशवंत कुमार के न्यायालय में इस मामले में सुनवाई हुई। अक्षय भाटिया ने न्यायालय के समक्ष पक्ष रखा कि वह इंटेरा कोगनिटा आइडी सॉल्यूशन में 35 हजार रुपये मासिक वेतन पर प्रोजेक्ट हेड के पद पर कार्यरत हैं। जबकि, प्रियंका निजी बैंक में अच्छे पद पर नियुक्त हैं और उनसे ज्यादा वेतन अर्जित करती हैं। ऐसे में उनको गुजारा भत्ते की जरूरत नहीं है। वह अपने खर्च स्वयं उठा सकती हैं।प्रियंका की तरफ से अधिवक्ता विवेक शर्मा ने पक्ष रखा कि अक्षय भाटिया ने जिस कंपनी में खुद को प्रोजेक्ट हेड बताया है, वास्तविकता में वह उस कंपनी का प्रोपराइटर है। वह देश और विदेश में भ्रमण करता रहता है। इस मामले में न्यायालय ने आरोपित के बैंक खातों का ब्योरा, क्रेडिट कार्ड के स्टेटमेंट, देश और विदेश यात्राओं के रिकार्ड को देखा। अक्षय ने इस पर वकील के माध्यम से पक्ष रखा था कि कंपनी उसके मां के नाम है। वह उसमें केवल नौकरी करता है। कंपनी के काम के सिलसिले में वह बिजनेस वीजा पर विदेश जाता है। न्यायालय ने बैंक, लेखाजोखा व अन्य दस्तावेजों के आधार पर पाया कि इंटेरा कोगनिटा आइडी सॉल्यूशन का वार्षिक कारोबार करीब 2 से 5 करोड़ रुपये का है। अक्षय भाटिया की वार्षिक आय 40 लाख रुपये से अधिक है। कई दस्तावेज जानबूझ कर आरोपित ने छुपाए। न्यायालय ने मेट्रीमोनियल साइट पर अक्षय भाटिया के अकाउंट को भी देखा, जिसमें उसने खुद को व्यवसायी बताते हुए 50 से 70 लाख रुपये वार्षिक आय दर्ज की हुई थी। यह भी पाया कि उसकी मां गृहणी हैं। जबकि प्रियंका का मासिक वेतन 60 हजार रुपये से ज्यादा है। सभी पक्षों को सुनने के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश यशवंत कुमार के न्यायालय ने महानगर दंडाधिकारी (महिला न्यायालय) के निर्णय को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ और मनमाना बताते हुए पलट दिया। प्रियंका धींगरा भाटिया के लिए 20 हजार रुपये मासिक अंतरिम गुजारा भत्ता निर्धारित किया है। यह कहते हुए कि पत्नी को पति के समान स्तर का जीवन जीने का अधिकार है।डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस


Source: Dainik Jagran December 26, 2020 14:37 UTC



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