यह जानकारी राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के प्रेस सचिव रहे तरलोचन सिंह के 1984 के दंगों की जांच के लिए बने नानावती आयोग में दर्ज कराए बयान से मिलती है. यह भरोसा करना कठिन था कि देश के राष्ट्रपति के संपर्क में गृह मंत्री ही न हों. कुलदीप नैयर ने यह बयान नानावती कमीशन को दर्ज कराया.1984 के दंगों के बाद ज्ञानी जैल सिंह को लेकर सिखों के बीच काफी नाराजगी रही. सिखों का मानना था कि जब इंदिरा गांधी की हत्या हुई, तब ज्ञानी जैल सिंह को देश की बागडोर अपने हाथ में ले लेनी चाहिए थी. सिख इस बात से नाराज थे कि राष्ट्रपति की कुर्सी पर बैठा एक सिख भी निर्दोष सिखों की हत्या को नहीं रोक सका.
Source: NDTV December 18, 2018 10:18 UTC