क्यों आया कीमत में उछाल इस साल सोने के दाम में तगड़ी तेजी की वजह कोरोना वायरस रहा, जिसकी वजह से लोग निवेश का सुरक्षित ठिकाना ढूंढ रहे थे। सोने में निवेश हमेशा से ही सुरक्षित रहा है। कोरोना की वजह से शेयर बाजार में लोगों ने निवेश कम कर दिया, क्योंकि शेयर बाजार में निवेश रिस्की होता है। इस साल जनवरी-फरवरी में तो सोना धीरे-धीरे बढ़ रहा था, लेकिन मार्च में भारत में कोरोना वायस की दस्तक के बाद इसने स्पीड पकड़ ली। अगस्त में इसका रेट 56000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर पहुंच चुका था।रेकॉर्ड पर पहुंचने के बाद क्यों आई गिरावट सोने की कीमत अगस्त में अपने चरम पर पहुंच गई थी लेकिन उसके बाद इसमें गिरावट आई है। इसमें गिरावट की वजह यह है कि अमीर निवेशक तुरंत पैसा बनाने के चक्कर में इक्विटीज का रुख कर रहे हैं। जानकारों का कहना है कि नए साल में सोने में निवेश करने वालों को संयम दिखाना होगा और मनमाफिक रिटर्न पाने के लिए लंबे समय तक निवेश को होल्ड करके रखना होगा। इसकी वजह यह है कि वैक्सीनेशन के गति तेज होने के साथ ही शॉर्ट टर्म में सोने की कीमत में और गिरावट आ सकती है।15 साल के लिए निवेश Ladder7 Financial Advisors के फाउंडर सुरेश सदगोपन ने कहा कि आप मौजूदा परफॉरमेंस को देखते हुए लगातार सोने से इक्विटी या इक्विटी से सोने का रुख नहीं कर सकते हैं। आपको शॉर्ट टर्म उतारचढ़ाव की चिंता किए बगैर अपने निवेश पोर्टफोलियो का 5 से 10 फीसदी गोल्ड में निवेश करना चाहिए। आप गोल्ड और इक्विटीज को मिक्स नहीं कर सकते हैं क्योंकि इससे आपको नुकसान होगा। सोने में 15 साल के लिए निवेश होना चाहिए।इस साल 25 फीसदी से अधिक रिटर्न सोने ने इस साल 25 फीसदी से अधिक रिटर्न दिया है। इसकी वजह यह है कि कोरोना वायरस संकट के बीच निवेशकों ने सोने में निवेश किया। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनावों और इसके नतीजों को लेकर अनिश्चितता से भी निवेशकों ने सोने का रुख किया। जो बाइडेन अमेरिका का राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं और इसके साथ ही चुनावों की अनिश्चितता खत्म हो गई है। इससे सोने की कीमतों में गिरावट आई और इसका रेट 48000 से 49000 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया।डॉलर इंडेक्स के कमजोर होने की संभावना CapitalVia Global Research में कमोडिटीज और करेंसीज के प्रमुख क्षितिज पुरोहित ने कहा कि संकट के समय सोना हमेशा चमका है। डॉलर इंडेक्स के कमजोर होने की संभावना है। इसकी वजह यह है कि 2023 तक जीरो इंटेरेस्ट रेट है जिससे ग्लोबल लिक्विडिटी को सपोर्ट मिलेगा। लेकिन इक्विटी मार्केट भी निवेशकों के लिए आकर्षक बना हुआ है जिससे कई निवेशक बेहतर रिटर्न की उम्मीद में सोने से इक्विटी का रुख कर रहे हैं। रिलायंस सिक्योरिटीज के हेड (स्ट्रैटजी) विनोद मोदी ने कहा कि 2021 में इक्विटी गोल्ड और फिक्स्ड इनकम पर भारी पड़ सकती है।मुसीबत की घड़ी में हमेशा बढ़ी है सोने की चमक! सोना हमेशा ही मुसीबत की घड़ी में खूब चमका है। 1979 में कई युद्ध हुए और उस साल सोना करीब 120 फीसदी उछला था। अभी हाल ही में 2014 में सीरिया पर अमेरिका का खतरा मंडरा रहा था तो भी सोने के दाम आसमान छूने लगे थे। हालांकि, बाद में यह अपने पुराने स्तर पर आ गया। जब ईरान से अमेरिका का तनाव बढ़ा या फिर जब चीन-अमेरिका के बीच ट्रेड वॉर की स्थिति बनी, तब भी सोने की कीमत बढ़ी।उदासीन बनी रहेंगी सोने की कीमतें: एक्सिस सिक्योरिटीज़ एक्सिस सिक्योरिटीज़ के अनुसार 2021 में भी सोने की कीमतें उदासीन रवैये वाली रहने की संभावना है। एक्सिस सिक्योरिटीज ने अपने एक नोट में कहा कि सोने में अचानक इसलिए गिरावट आई, क्योंकि कोरोना वैक्सीन बनाने की दिशा में सकारात्मक खबरें आने लगीं। इसकी वजह से अब निवेशक अधिक रिस्क वाले विकल्पों का रुख कर रहे हैं। यही वजह है कि इन दिनों शेयर बाजार हर दिन नई ऊंचाइयों को छू रहा है। एक्सिस सिक्योरिटीज का मानना है कि आने वाले वक्त में भी सोने पर दबाव बना रहेगा, जिसकी वजह से उसकी कीमतें अधिक नहीं बढ़ेंगी और उदासीनता दिखाएंगी।
Source: Navbharat Times December 26, 2020 07:55 UTC