Hormuz News : पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और तनाव के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से भारतीय ध्वज वाले जहाजों को सुरक्षित निकलने की अनुमति दी है, जिससे क्षेत्र में स्थित भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। इस घटनाक्रम के साथ ही, भारत के सातवें एलपीजी जहाज ‘ग्रीन सान्वी’ 44,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर मुंबई की ओर बढ़ रहा है।पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और उससे उत्पन्न संकटपश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान ने तमाम पाबंदियां लागू कर दी हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इस वजह से दुनियाभर में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और भारत में एलपीजी की किल्लत ने आम जनता की परेशानियां बढ़ा दी हैं। लंबी-लंबी लाइनों में लोग एलपीजी सिलेंडर लेने के लिए कतार में खड़े देखे जा रहे हैं।ईरान की ओर से जहाजों को अनुमतिइस बीच, युद्ध के माहौल में भी भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। ईरान ने अपने होर्मुज स्ट्रेट को पार कर रहे भारतीय जहाजों को सुरक्षित निकलने की अनुमति दी है। इससे पहले, संघर्ष के कारण कई जहाज फंसे हुए थे और उनके ईरानी क्लीयरेंस का इंतजार कर रहे थे।सातवां जहाज ‘ग्रीन सान्वी’ मुंबई की ओरगैर सरकारी ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, भारतीय एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन सान्वी’ शुक्रवार शाम को फारस की खाड़ी से निकलकर ईरान के समुद्री इलाके से होकर एक विशेष कोरिडोर का इस्तेमाल करते हुए होर्मुज स्ट्रेट के पूर्वी भाग में पहुंच गया है। यह जहाज, जिसमें लगभग 44,000 मीट्रिक टन एलपीजी है, अब मुंबई बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है। इससे पहले, इस संघर्ष के दौरान छह भारतीय जहाज इस स्ट्रेट को पार कर चुके हैं।17 जहाज अभी भी फंसे हुएपश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण, अभी भी 17 भारतीय जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में फंसे हुए हैं। इन जहाजों में से दो – ‘ग्रीन आशा’ और ‘जग विक्रम’ – एलपीजी से लदे हुए हैं। यदि ये दोनों जहाज भी जल्द ही भारत पहुंचते हैं, तो देश में एलपीजी की भारी कमी को दूर करने में मदद मिलेगी और आम जनता को राहत मिल सकती है।यह घटनाक्रम इस क्षेत्र में तनाव के बीच भारत के लिए एक सकारात्मक संकेत है। भारत सरकार और समुद्री सुरक्षा एजेंसियां इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और उम्मीद कर रही हैं कि जल्द ही इन जहाजों का सुरक्षित आगमन हो सकेगा। इससे न केवल एलपीजी की आपूर्ति में सुधार होगा बल्कि क्षेत्र में तनाव कम करने का भी एक प्रयास माना जा रहा है।यह भी पढ़े : ‘हमारी शर्तों पर ही रुकेगी जंग’, अमेरिका के 48 घंटे में युद्धविराम वाले प्रस्ताव को ईरान ने ठुकराया
Source: Dainik Bhaskar April 04, 2026 16:43 UTC