हरियाणा की 10 में से 9 सीटों पर भाजपा-कांग्रेस की सीधी टक्कर, क्षेत्रीय दल हाशिए पर - Dainik Bhaskar - News Summed Up

हरियाणा की 10 में से 9 सीटों पर भाजपा-कांग्रेस की सीधी टक्कर, क्षेत्रीय दल हाशिए पर - Dainik Bhaskar


Dainik Bhaskar May 03, 2019, 08:40 AM ISTभाजपा और कांग्रेस 2-2 सीटों पर भारी, 6 पर करीबी मुकाबलाहरियाणा में 25% जाट, चार सीटों पर इनका सीधा प्रभावकांग्रेस ने सोनीपत से भूपेंद्र हुड्डा और रोहतक से उनके बेटे दीपेंद्र को उतारा, भाजपा के लिए दोनों सीटें सबसे बड़ी चुनौती52 साल पहले पंजाब से अलग हुआ हरियाणा इस बार नई पटकथा लिखने जा रहा हैं। पहली बार यहां क्षेत्रीय क्षत्रपों का अस्तित्व संकट में है। चौधरी देवीलाल परिवार का इंडियन नेशनल लोकदल चाचा-भतीजे की लड़ाई के कारण दो फाड़ हो गया और जननायक जनता पार्टी (जजपा) के कारण इनेलो का मजबूत कैडर बिखर गया। 10 लोकसभा सीटों में से हिसार को छोड़ भी दें तो 9 पर भाजपा-कांग्रेस में सीधी टक्कर है।पिछले चुनाव में भाजपा और हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) में गठबंधन था। भाजपा ने 7 सीटें जीती थीं। इनेलो दो और कांग्रेस एक सीट पर सिमट गई थी। अब हजकां का कांग्रेस में विलय हो चुका है। पिछली बार भाजपा को मोदी लहर का फायदा लोकसभा और विधानसभा में मिला था। भाजपा इस बार भी सभी सीटे जीतना चाहती है लेकिन फिलहाल वह 2 सीटों पर आगे है। 6 सीटों पर उसका नजदीकी मुकाबला है। सोनीपत और रोहतक में कांग्रेस आगे है। 3 सीटों पर प्रत्याशियाें का विरोध भाजपा के लिए चुनौती बना हुआ है। कांग्रेस ने मजबूत कैंडिडेट उतारे हैं। हरियाणा में 25% जाट हैं। चार सीटों पर इनका सीधा प्रभाव है।मतदान 12 मई को है, इसलिए राष्ट्रीय दलों के केंद्रीय नेताओं ने कमान नहीं संभाली है। भाजपा के प्रचार की अगुवाई मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर कर रहे हैं। कांग्रेस के दिग्गज अपनी-अपनी सीट तक सीमित हैं। वे पर्सनल वोट बैंक के बूते लड़ रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्‌डा बाकी सीटों पर प्रभाव डाल सकते थे परंतु उन्हें सोनीपत से टिकट मिला हैा। वे अपनी जीत के साथ रोहतक में कड़े मुकाबले में फंसेे बेटे दीपेंद्र के लिए भी लगे हैं। भाजपा के लिए तीन फैक्टर काम कर रहे हैं। पहला- आरक्षण आंदाेलन के बाद समाज को जाट-नॉन जाट के तौर पर देखा जाना। दूसरा- सीएम की बेदाग छवि और नौकरियों में पारदर्शिता। तीसरा- मोदी का चेहरा।भाजपा को सबसे ज्यादा चुनौती सोनीपत और रोहतक में है। भिवानी और अंबाला में भाजपा प्रत्याशियों का विरोध है। इन सीटों पर कांग्रेस टक्कर दे रही है। सिरसा में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर को डेरे का साथ मिला तो नतीजा चौंकाने वाला होगा। हालांकि कांग्रेस को कमजोर संगठन और गुटबाजी का नुकसान हो रहा है, लेकिन इनेलो की टूट का फायदा भी मिल रहा है। हुड्डा की ख्वाहिश दिल्ली से ज्यादा चंडीगढ़ पहुंचने की है। अक्टूबर में विधानसभा चुनाव हैं, इसलिए वे ‘अपना राज’ लाने की बात याद दिलाना नहीं भूल रहे। मुख्यमंत्री खट्‌टर पंजाबी लीडर की पहचान बना चुके हैं। अब वे नॉन जाट चेहरा बनने के लिए जुटे हैं। लोकसभा का प्रदर्शन ही दूसरी बार मुख्यमंत्री की उनकी कुर्सी पक्की करेगा। उनके निशाने पर भूपेंद्र और दीपेंद्र हुड्‌डा सबसे ज्यादा हैं। सभाओं में वे कहते हैं- थाम इस बाबू-बेटे नै सबक सिखा दो, बाकी नै में देख ल्यूंगा। खट्‌टर बतौर सीएम हुड्‌डा को ही अपनी राह का कांटा मानते हैं।हरियाणा में देहात और शहरी का फर्क जीत-हार तय करता है। शहरी पार्टी भाजपा गांवों में जनाधार बढ़ाने की जुगत में है। कांग्रेस जाटाें के अलावा परंपरागत वोट बैंक को साधने में लगी है। इनेलो और जजपा में वर्चस्व की लड़ाई है। इस बार हवा वंशवाद के खिलाफ भी है। देवीलाल के 3 पड़पोते, बंसीलाल की एक पोती, भजनलाल का एक पोता, बीरेंद्रसिंह और भूपेंद्र हुड्डा के एक-एक बेटे चुनाव मैदान में है। लहर और ‘जहर’ जैसे जुमले भी हवा में तैर रहे हैं। सबकी निगाहें रोहतक, सोनीपत और हिसार पर टिकी हैं। ये सीटें राजनीतिक परिवारों का भविष्य तय करेंगी। गुड़गांव में केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत बढ़त बनाते दिख रहे हैं। फरीदाबाद में केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर को कांग्रेस के अवतारसिंह भड़ाना से कड़ी टक्कर मिल रही है। इस हफ्ते बड़े नेताओं के दौरे होने हैं, यह किस हद तक हवा बदलेंगे यह देखना होगा।हरियाणा की इन 3 सीटों पर देश की नजररोहतक: हुड्‌डा राज में प्रदेश की राजनीतिक राजधानी रहा। जाट आरक्षण का केंद्र रहा है। यहां से कांग्रेस के दीपेंद्र हुड्‌डा चौथी बार मैदान में हैं। मोदी लहर में भी वे सांसद बने थे। भाजपा ने डॉ. अरविंद शर्मा को उतारकर जाट-नॉन जाट का कार्ड खेला है। अब तक के आम चुनावों में यहां जाट उम्मीदवार ही जीता है।सोनीपत: कांग्रेस ने भूपेंद्र हुड्‌डा को अग्निपरीक्षा में झोंक दिया है। हुड्‌डा का रोहतक से बाहर पहला चुनाव है। हुड्‌डा लोकसभा के खरखौदा के दामाद भी हैं। भाजपा ने सांसद रमेश कौशिक को ही आजमाया है। सोनीपत की 6 में से 5 विधानसभाओं पर हुड्डा की मजबूत पकड़ है। पांचों पर कांग्रेस के ही विधायक हैं।हिसार: भाजपा से केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने आईएएस बेटे बृजेंद्र सिंह और कांग्रेस से कुलदीप बिश्नोई ने बेटे भव्य बिश्नोई का पॉलिटिकल डेब्यू किया है। अजय चौटाला के बेटे दुष्यंत भी मैदान में हैं। तीनों की मांएं विधायक हैं। सीट जाट बहुल मानी जाती है। यहां मोदी फैक्टर मजबूती से काम कर रहा है।


Source: Dainik Bhaskar May 03, 2019 03:11 UTC



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