दूरदृष्टि • मौजूदा दौर में दोहरी रणनीति जरूरी है- आशुतोष वार्ष्णेय ब्राउन यूनिवर्सिटी, अमेरिका में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसरभारत को बदलती हुई विश्व-व्यवस्था का जवाब कैसे देना चाहिए? इसके लिए सबसे पहले एक बड़े सवाल का जवाब देना जरूरी है। यह कि आज दुनिया में भू-राजनीति और अर्थव्यवस्था का क्या रिश्ता है? वैश्वीकरण के हालिया दौर में- जिसकी शुरुआत 1980 के दशक में हुई और 1991 में सोवियत संघ के टूटने के बाद जिसे मजबूती मिली- आम तौर पर भू-राजनीति अर्थव्यवस्था के पीछे चलती थी और अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से बाजार-आधारित थी। ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय संबंध आर्थिक हितों के आसपास बने थे। दुनिया के मंच पर चीन का उभार इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। 2002 में पश्चिम के समर्थन से, चीनजो राजनीतिक रूप से कम्युनिस्ट था, लेकिन आर्थिक रूप से कम्युनिस्ट नहीं रह गया था- को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में शामिल किया गया।
Source: Dainik Bhaskar February 03, 2026 06:36 UTC