हफ्ते में तीन दिन 20 मिनट करें साइकिलिंग, कम हो जाएगा मेनोपॉज का असरनई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। हफ्ते में तीन दिन केवल 20 मिनट की साइकिलिंग मेनोपॉज के कारण महिलाओं की सेहत पर पड़ने वाले नकारात्मक असर को कम कर सकती है। ताजा शोध में यह बात सामने आई है। महिलाओं में एक उम्र के बाद मासिक धर्म के रुक जाने को मेनोपॉज कहा जाता है। मेनोपॉज के कारण महिलाओं को मांसपेशियां कमजोर होने और वजन बढ़ने जैसी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस उम्र के बाद महिलाओं में डायबिटीज का खतरा भी बढ़ जाता है।ऑस्ट्रेलिया की न्यू साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता यति बूचर ने कहा, ‘थोड़े-थोड़े अंतराल पर तेज साइकिलिंग व्यायाम का बेहतर स्वरूप है। इससे सेहत को कई लाभ होते हैं।’ अध्ययन के दौरान मेनोपॉज की उम्र पार कर चुकी 40 महिलाओं को शामिल किया गया था, जिनका वजन सामान्य से अधिक था। इस दौरान तेज साइकिलिंग करने वाली महिलाओं की मांसपेशियों में मजबूती देखी गई।क्या है मेनोपॉजमहिलाओं में जब लगातार एक साल तक पीरियड होना बंद हो जाए, तो उसे मेनोपॉज कहते हैं। यह उम्र के साथ प्राकृतिक रूप में हर महिला में होता है या किसी कारणवश समय से पहले ओवेरी और युटेरस को सर्जरी से हटा देने से हो सकता है। यह जननकाल का आखिरी समय होता है, जिसमें की होरमोंस हमेशा के लिए कम हो जाते हैं। इसमें ओवेरी से बीज जनन शक्ति खत्म हो जाता है, और औरत प्राकृतिक रूप से गर्भवती नहीं हो सकती है। इसमें जब एक साल तक लगातार मासिक धर्म नहीं होता है, तो उसे पूर्ण मेनोपाज कहते हैं।आमतौर पर मेनोपॉज की सही उम्र 50-51 मानी जाती है। मेनोपॉज से 2-3 वर्ष पूर्व पीरियड्स की अनियमितता शुरू हो जाती है, जिसे प्री-मेनोपॉज लक्षण माना जाता है। कई बार समय से पहले ही ओवरीज में एस्ट्रोजन हॉर्मोन बनना बंद हो जाता है। यह हॉर्मोन प्रजनन क्षमता के लिए जरूरी है। किसी वजह से यह न बने तो मेनोपॉजकी आशंका बढ जाती है। थायरॉयड, कैंसर में दी जाने वाली कीमोथेरेपी, ओवरी रिमूवल सर्जरी, अबॉर्शन या डीएंडसी के कारण प्री-मेनोपॉज हो सकता है। मगर कई बार इसका कारण नहीं पता चल पाता और ओवरीज की कार्यक्षमता धीमी हो जाती है।इसके कई कारण हो सकते हैं। सुस्त-निष्क्रिय लाइफस्टाइल, खानपान की अनियमितता और व्यायाम की कमी के अलावा यह समस्या आनुवंशिक हो सकती है। वायरल संक्रमण, तनाव या दबाव, मिर्गी की समस्या में भी ऐसा हो सकता है। एक धारणा यह भी है कि जिन लडकियों को अर्ली प्यूबर्टी होती है, उन्हें अर्ली मेनोपॉज का खतरा भी ज्यादा होता है, मगर इस धारणा का वैज्ञानिक आधार नहीं है।नुकसानयदि समय से 8-10 वर्ष पूर्व मेनोपॉज हो जाए तो इसका सीधा असर प्रजनन क्षमता पर पडता है। एस्ट्रोजन हॉर्मोन अच्छे एचडीएल कोलेस्ट्रॉल को बढाता है और बुरे एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को घटाता है। यह रक्त-नलिकाओं को सुचारु-संतुलित रखता है और हड्डियों की सुरक्षा करता है। एस्ट्रोजन की समय-पूर्व कमी से शरीर व मन पर बुरा प्रभाव पडता है। ये प्रभाव हार्ट या कार्डियोवैस्कुलर डिजीज, आस्टियोपोरोसिस, पार्कि संस, डिमेंशिया, डिप्रेशन के रूप में नजर आते हैं।लक्षणमेनोपॉज के दौरान किसी स्त्री के शरीर और मन में कई बदलाव होते हैं।पीरियड्स अनियमित होने लगते हैं या अचानक बंद हो सकते हैं।दबाव व तनाव बढता है। अर्ली मेनोपॉज होने से किसी स्त्री की पूरी फ्यूचर प्लानिंग प्रभावित होती है। वह परिवार नहीं बढा सकती। ऐसे में बेचैनी, तनाव, अवसाद, कुंठा, मूड स्विंग, फटीग की समस्या बढने लगती है। यानी स्त्री भावनात्मक असुरक्षा और अस्थिरता से जूझती है।एस्ट्रोजन कम होने से सेक्स डिजायर्स कम हो जाती हैं, वजाइनल ड्राइनेस बढती है। सेक्स संबंधों में दर्द हो सकता है। यीस्ट इन्फेक्शन और वजाइनल डिस्चार्ज जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।बोन डेंसिटी कम होती है, जिससे हड्डियों से जुडी समस्याएं बढने लगती हैं। शरीर में फ्रैक्चर्स होने लगते हैं।कई स्किन प्रॉब्लम्स भी होने लगती हैं। ड्राई आइज, ड्राई स्किन और ड्राई माउथ जैसी समस्याओं से जूझना पडता है।कई स्त्रियों में असामान्य बॉडी टेंप्रेचर जैसी परेशानी देखी जाती है। अचानक पसीना, घबराहट या बेचैनी हो सकती है। पेट फूल सकता है या ब्रेस्ट में भारीपन जैसी शिकायत हो सकती है।जांच प्रक्रियाडॉक्टर्स कई स्तरों पर इसकी जांच करते हैं। यह काफी लंबी प्रक्रिया है। लक्षणों के आधार पर जांच प्रक्रिया तय की जाती है। मरीजकी मेडिकल हिस्ट्री देखी जाती है। उससे पूछा जाता है कि क्या उसकी पूर्व में कोई सर्जरी, अबॉर्शन या डीएंडसी हुई है। कुछ जरूरी टेस्ट कराए जाते हैं।प्रेग्नेंसी टेस्टपीरियड्स की अनियमितता और समस्याओं का पता लगाया जाता हैशारीरिक-भावनात्मक लक्षणों की जांचहॉर्मोनल टेस्टट्रांस्वजाइनल अल्ट्रासाउंड, जिसके जरिये पता लगाया जाता है कि ओवरीज का साइज सामान्य है या नहीं, ओवरी में एग्स की संख्या कितनी है, यूट्रस लाइनिंग की मोटाई कितनी है या इसमें कोई रुकावट तो नहीं हैथायरॉयड, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल स्तर, बोन डेंसिटी टेस्टजीवनशैली बदलेंअर्ली मेनोपॉज की समस्या तनाव व सुस्त जीवनशैली से भी जुडी है। इसलिए डाइट व लाइफस्टाइल में बदलाव भी जरूरी है।दिन में 2-3 सर्विग कैल्शियम युक्त डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करें।मसल स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइजऔर नियमित पैदल चलना जरूरी है।विटमिन डी का स्तर सही रखें। इसके लिए सुबह 11 बजे से पहले और शाम को 4 बजे के बाद की धूप में रहना अच्छा है। कम से कम 15 मिनट धूप में रहें। वैसे यह सीमा अलग-अलग जलवायु के अनुसार अलग हो सकती है। भारत में सुबह 8 से 10 बजे की धूप विटमिन डी की अच्छी स्रोत होती है।विटमिन डी की कमी हो तो इसके सप्लीमेंट्स लेने जरूरी हैं।यदि 40 की उम्र से पहले मेनोपॉज हो तो हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एचआरटी) दी जाती है। हालांकि इसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी हैं। जिनके परिवार में किसी को ब्रेस्ट कैंसर हो, उन्हें एचआरटी नहीं दी जाती।अर्ली मेनोपॉज के बाद हार्ट डिजीज की आशंका बढ जाती है। इस
Source: Dainik Jagran April 30, 2019 09:11 UTC