स्पेस में एलन मस्क और जेफ बेजोस को टक्कर देने की तैयारी में रतन टाटा, चल रही है ये प्लानिंग - News Summed Up

स्पेस में एलन मस्क और जेफ बेजोस को टक्कर देने की तैयारी में रतन टाटा, चल रही है ये प्लानिंग


​जॉइंट वेंचर नहीं होगा स्थापित नेल्को के मैनेजिंग डायरेक्टर पीजे नाथ ने ईटी को बताया, 'नेल्को और टेलीसैट के बीच भारत में लाइटस्पीड LEO (लो-अर्थ ऑर्बिट) सैटेलाइट सर्विसेज मुहैया कराने के लिए मास्टर सर्विसेज एग्रीमेंट (MSA) होगा। हम कमर्शियल अरेंजमेंट्स की डिटेल्स को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि नेल्को की टेलीसैट के साथ एक अलग संयुक्त उद्यम कंपनी शुरू करने की कोई योजना नहीं है।वनवेब, स्पेसएक्स और ऐमजॉन के बाद टेलीसैट चौथी वैश्विक (एलईओ) सैटेलाइट ऑपरेटर है, जो भारत के सैटेलाइट सर्विसेज खंड में प्रवेश करने की इच्छुक है। यह 28 गीगाहर्ट्ज बैंड पर सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाएं प्रदान करने का प्रस्ताव करती है, जिसे विश्व स्तर पर Ka-band के रूप में जाना जाता है।​भारत क्यों हैं एक प्रमुख सैटेलाइट इंटरनेट बाजार 'फास्ट ब्रॉडबैंड-फ्रॉम-स्पेस सेगमेंट' में टाटा-टेलीसैट का प्रवेश तब हो रहा है, जब विशेषज्ञ भारत को लगभग 1 अरब डॉलर के वार्षिक राजस्व अवसर के साथ एक प्रमुख सैटेलाइट इंटरनेट बाजार के रूप में देखते हैं। लगभग 75% ग्रामीण भारत की ब्रॉडबैंड तक पहुंच नहीं है क्योंकि कई स्थानों पर सेल्युलर या फाइबर कनेक्टिविटी नहीं है। नतीजतन, LEO सैटेलाइट सिस्टम्स को एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि यह वर्तमान में महंगा है।​वनवेब और स्पेसएक्स देश में अगले साल शुरू करेंगे सैटेलाइट इंटरनेट टेलीसैट ने 298-विषम LEO सैटेलाइट्स के वैश्विक समूह के निर्माण के लिए लगभग 5 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई है। साथ ही इसकी वैश्विक लाइटस्पीड सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं (भारत सहित) की योजना 2024 तक है। वनवेब और स्पेसएक्स अगले साल भारत में सैटेलाइट इंटरनेट संचालन शुरू करने के लिए तैयार हैं। जबकि ऐमजॉन अपनी वैश्विक अंतरिक्ष इंटरनेट पहल 'Project Kuiper' के हिस्से के रूप में इस सेगमेंट पर नजर रखे है।​टाटा-टेलीसैट बी2बी मॉडल पर करेंगे काम वनवेब की तरह, टाटा-टेलीसैट ने भारत में बिजनेस-टू-बिजनेस (बी2बी) मॉडल पर काम करने की योजना बनाई है। टेलीसैट की सैटेलाइट बैंडविड्थ क्षमता की पेशकश दूरसंचार ऑपरेटरों को ऐसे दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में सेल्युलर बैकहॉल के लिए की जाएगी, जहां मोबाइल इंफ्रास्ट्रक्चर कमजोर है। नाथ ने कहा, "हमारा फोकस सेगमेंट बी2बी है। सैटेलाइट के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में फाइबर जैसी लेटेंसी के साथ विश्वसनीय कनेक्टिविटी के लिए सेल्युलर बैकहॉल/मोबिलिटी, रिमोट विलेज कनेक्टिविटी और एंटरप्राइज की जरूरतों को पूरा करना मुख्य बाजार होंगे।उन्होंने कहा कि टाटा-टेलीसैट लैंडिंग राइट्स समेत विभिन्न वैधानिक मंजूरियों के लिए सरकार को एक ऐप्लीकेशन देंगे। आगामी नई स्पेसकॉम पॉलिसी द्वारा विदेशी नॉन-जियोस्टेशनरी सैटेलाइट सिस्टम ऑपरेटरों या LEO सैटेलाइट सर्विस प्रोवाइडर्स की ओर से इन-कंट्री सैटेलाइट गेटवे स्थापित करने के नियमों पर स्थिति स्पष्ट होने के बाद ऐसा किया जाएगा।​सैटेलाइट ब्रॉडबैंड किफायती बनाने के लिए उठाएंगे ये कदम नेल्को के नाथ ने यह भी कहा कि टाटा और टेलीसैट दोनों एंड-यूजर एक्सेस टर्मिनलों की लागत को कम करने के तरीके भी तलाशेंगे। ऐसा इसलिए ताकि भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड को किफायती बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि टेलीसैट हार्डवेयर निर्माताओं के ग्लोबल इकोसिस्टम के साथ काम कर रहा है ताकि बाजार में किफायती यूजर्स टर्मिनलों को लाया जा सके। कंपनी वाणिज्यिक और सरकारी भागीदारों के साथ स्थानीय सहयोग के लिए खुली है।इक्रा के समूह प्रमुख सब्यसाची मजूमदार का कहना है कि अगर परिचालन (नियामकीय) वातावरण आसान हो जाता है तो भारत का सैटेलाइट कम्युनिकेशंस यूजर बेस 2025 तक बढ़कर 15-20 लाख होने का अनुमान है, जो अभी केवल 3 लाख एंटरप्राइज यूजर्स का है। इससे सालाना 5,000-6,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है।


Source: Navbharat Times August 10, 2021 08:20 UTC



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