सोना जा रहा है आसमान में, इन 5 वजहों से - News Summed Up

सोना जा रहा है आसमान में, इन 5 वजहों से


आर्थिक अनिश्चितता जब किसी संकट के कारण अर्थव्यवस्था का आर्थिक विकास ठप हो जाता है, तो आमतौर पर इक्विटी बाजार, वैश्विक व्यापार और फाइनेंशियल इकोसिस्टम भी प्रभावित होते हैं। सप्लाई और डिमांड में उतार-चढ़ाव के कारण बाजार में अस्थिरता पैदा होती है। यह अनिश्चितता निवेशकों को अपने निवेश पोर्टफोलियो में विविधता लाने को मजबूर करती है। क्योंकि, वे अपने फाइनेंसेज को सुरक्षित विकल्पों के माध्यम से हासिल करने की ओर आगे बढ़ते हैं। ऐसे में, लोग निवेश के लिए असेट क्लास की ओर रुख करते हैं। इनमें सोना शीर्ष विकल्प है। इससे सोने की मांग बढ़ती है और इसकी कीमत में वृद्धि होती है। मौजूदा कोविड-19 (Covid-19) संकट के आने से दुनिया भर में आर्थिक कहर बरपा है। हमारे देश में भी सोने की कीमत अप्रैल में ही 11% से अधिक बढ़ गई है। 6 महीने की अवधि में ही सोने की कीमतें 30,000 रुपए के करीब बढ़ गई हैं।सरकारी नीतियां भारत सोने के शीर्ष दो वैश्विक ग्राहकों में शामिल है। सरकार के फैसले सोने में मूल्य वृद्धि को प्रमुख रूप से प्रभावित करते हैं। जब रिजर्व बैंक अपनी ब्याज दरों और राजकोषीय नीति, सोने के वार्षिक अधिग्रहण, सोवरिन बांड आदि की घोषणा करता है, तो बाजार की धारणा पर इसके कई प्रभाव होते हैं, जो कीमतों को ऊपर या नीचे ले जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, संकट के समय में फाइनेंशियल बेलआउट पैकेज, संपत्ति पर कराधान की नीति, और अन्य सूक्ष्म नीति संबंधी फैसले पूरी तरह सरकार के होते हैं। इस तरह के फैसले अक्सर आर्थिक संकट के व्यापक आर्थिक परिणामों को देखते हुए लिए जाते हैं। हालांकि, आर्थिक रिवाइवल नकदी प्रवाह और जिंस बाजारों में तेज वृद्धि से जुड़ा हुआ है।मुद्रास्फीति आर्थिक मंदी का मुकाबला करने के लिए, सरकारें अक्सर अर्थव्यवस्था में तरलता बढ़ाने के लिए मल्टी-बिलियन डॉलर के प्रोत्साहन पैकेजों की घोषणा करती हैं। इससे ऐसा वातावरण बनता है जो लोगों को अतिरिक्त खर्च की सुविधा देता है। हालांकि, कई लोग सोने में निवेश के माध्यम से अपने फाइनेंसेज को सुरक्षित करते हैं। पिछले दो दशकों पर नजर डालें, तो यह संकेत मिलता है कि वैश्विक आर्थिक संकटों के बाद सोने में मूल्यवृद्धि हुई है। इसके अलावा, यह भी विश्वास है कि सोने के बाजार मुद्रास्फीति की प्रवृत्ति को समायोजित कर सकते हैं, क्योंकि भयभीत निवेशक अक्सर गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETF), सोवरिन बांड और सामान्य रूप से सोने के असेट क्लास में निवेश के माध्यम से मुद्रास्फीति के प्रभाव को रोकते हैं।जनसंख्या और जनसांख्यिकी (Demographic) भारत के डेमोग्राफिक डिविडेंड के बारे में अक्सर बात होती है और इसे देश के लिए वरदान बताया जाता है। इस विश्वास के साथ कि, यह विकास के अवसर बनाने में मदद कर सकता है। बहुत युवा आबादी के साथ जहां हमारी कुल जनसंख्या का 50% से अधिक 40 वर्ष से कम आयु का है, संस्थानों को मिलेनियल्स और युवा पेशेवरों के खर्च के पैटर्न में बदलाव की उम्मीद होती है। उम्मीद यह है कि वे सोने के असेट क्लास में निवेश करेंगे, बजाय कि वे इसे भौतिक संपत्ति के रूप में खरीदेंगे या किसी और तरीके से। परंपरागत रूप से, परिवार के बुजुर्ग सोने की भौतिक खरीद के लिए व्यापारी स्टोर और ज्वैलर के पास जाते थे। वर्तमान में, सरकार के सोवरिन गोल्ड बांड और डिजिटल पेमेंट गेटवे पर उपलब्ध कराए गए ई-गोल्ड ऑप्शन जैसे विकल्पों की एक सूची है। मिलेनियल्स डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर्स के टारगेट ऑडियंस हैं, क्योंकि वे केवल एक बटन पर क्लिक करने और खरीदने-बेचने के कार्यों के साथ सोने की भौतिक खरीद से परे निवेश करने पर विचार करने की संभावना रखते हैं।


Source: Navbharat Times August 17, 2020 03:45 UTC



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