सेक्शन 80C: डेढ़ लाख रुपये तक टैक्स बचाने के निवेश के 15 बेहतरीन तरीके - News Summed Up

सेक्शन 80C: डेढ़ लाख रुपये तक टैक्स बचाने के निवेश के 15 बेहतरीन तरीके


हाइलाइट्स सेक्शन 80C के जरिये आप 1.5 लाख रुपये तक बचा सकते हैं टैक्सकिसी व्यक्ति या हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली को मिलती है टैक्स छूट की यह सुविधाबच्चों की ट्यूशन फीस पर भी सेक्शन 80सी के तहत टैक्स में मिलती है छूटस्टैंप ड्यूटी तथा रजिस्ट्रेशन चार्जेज पर 1.5 लाख रुपये तक पा सकते हैं छूटअगर आप सैलरीड हैं तो आपकी कंपनियों में आपको इन्वेस्टमेंट प्रूफ जमा करने का वक्त आ गया है। अगर आप इन्वेस्टमेंट प्रूफ जमा नहीं कर पाते हैं तो आपकी इनहैंड सैलरी कम हो सकती है, क्योंकि निवेश प्रूफ के अभाव में आप आयकर छूट की सुविधा का लाभ नहीं उठा पाएंगे। आयकर छूट पाने के लिए आयकर अधिनियम का सेक्शन 80C बेहद लोकप्रिय साधन है। इसी के बारे में हम बात करने जा रहे हैं।आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत अलग-अलग तरह के निवेश पर टैक्स छूट दी जाती है। अगर आप किसी साल अलग-अलग तरह के निवेश पर टैक्स छूट क्लेम करना भूल गए हैं तो बाद में इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर टैक्स एग्जेम्पशन क्लेम कर सकते हैं।धारा 80 सी के तहत 1,50,000 रुपये तक के निवेश पर टैक्स छूट ली जा सकती है। सीधे शब्दों में कहें तो धारा 80 सी के तहत अलग-अलग तरह के निवेश कर आप अपनी कुल कर योग्य आय में से 1,50,000 रुपये कम करवा सकते हैं। यह टैक्स छूट किसी व्यक्ति या हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली (एचयूएफ) को मिलती है।बता दें कि बच्चों की ट्यूशन फीस पर भी सेक्शन 80सी के तहत टैक्स में छूट मिलती है। हालांकि, यह ऐसा निवेश नहीं है, जिस पर रिटर्न मिलता हो। हर साल अधिकतम दो बच्चों की ट्यूशन फीस पर यह छूट मिलती है। इसके लिए आपको स्कूल द्वारा जारी फीस का सर्टिफिकेट देना पड़ता है। यह सेक्शन 80C के तहत आने वाला एकमात्र खर्च है, जो निवेश के दायरे में नहीं आता है। यदि आप सेक्शन 80सी के तहत टैक्स छूट का लाभ उठाना चाहते हैं तो वित्त वर्ष खत्म होने से पहले आपको निर्धारित निवेश माध्यमों में इन्वेस्ट करना होगा।आयकर अधिनियम के सेक्शन 80C के तहत स्टैंप ड्यूटी तथा रजिस्ट्रेशन चार्जेज पर 1.5 लाख रुपये तक की छूट पाई जा सकती है। भुगतान उसी वित्त वर्ष में किया जाना चाहिए, जिसमें टैक्स का पेमेंट किया जा रहा है।यदि आप सैलरी पाने वाले एंप्लॉयी हैं, तो निवेश के इस विकल्प में आप पहले से ही इन्वेस्ट कर रहे हैं। हर महीने आपके मिलने वाले वेतन से पहले ही आपके ईपीएफ अकाउंट में रकम जमा हो जाती है। यदि आप इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80सी का पूरा लाभ उठाना चाहते हैं तो 1.5 लाख रुपये निवेश सीमा पाने के लिए बची हुई राशि ही टैक्स छूट के विकल्प में निवेश करनी है। इतना ही नहीं, आप अगर चाहें तो अपने अनिवार्य EPF योगदान से अधिक रकम का योगदान भी कर सकते हैं। यह योगदान स्वैच्छिक प्रविडेंट फंड (वीपीएफ यानी VPF) में किया जा सकता है। आप इस पर भी इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80C के तहत टैक्स बचत का लाभ उठा सकते हैं।निवेश की यह प्रक्रिया थोड़ा कठिन है। यदि आप सेक्शन 80CCD (1) के तहत एनपीएस में सालाना 1.5 लाख रुपये तक का निवेश करते हैं तो यह सेक्शन 80C के तहत मिलने वाले लाभ में शामिल है। हां, यदि आप NPS में सेक्शन 80CCD(1B) के तहत सालाना 50 हजार रुपये तक का निवेश करते हैं तो यह इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80C से अलग है।ये ऐसे डिडक्शंस हैं, जो साल दर साल होते हैं, जैसे होम लोन रीपेमेंट, इंश्योरेंस प्रीमियम इत्यादि।आपके होम लोन के प्रिंसिपल अमाउंट के रूप में आपके द्वारा चुकाई गई रकम पर आईटी ऐक्ट के सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक डिडक्शन की सुविधा मिलती है। यदि आप पहली बार घर खरीद रहे हैं तो आपको सेक्शन 80EE के तहत 50,000 रुपये तक अतिरिक्त टैक्स डिडक्शन की सुविधा मिल सकती है। लेकिन लोन की रकम 35 लाख रुपये से कम होनी चाहिए और घर की कुल कीमत 50 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।इसके लिए चुकाई गई प्रीमियम की रकम पर आप इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80सी के तहत टैक्स छूट का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इंश्योरेंस प्लान असल में बहुत मामूली प्रीमियम पर काफी अधिक जीवन बीमा कवर खरीदने का मौका देता है। सेक्शन 80C के तहत टैक्स लाभ लेने के लिए आपको हर साल नया प्लान लेने की जरूरत नहीं है। एक पॉलिसी में सालाना आपका रिन्यूअल प्रीमियम भी सेक्शन 80C के तहत छूट पाने योग्य है।पीपीएफ अकाउंट का मैच्युरिटी पीरियड 15 साल का होता है। इस अकाउंट पर मिलने वाला इंट्रेस्ट (ब्याज) टैक्स फ्री होता है। इस अकाउंट के लिए ब्याज दरों को हर तिमाही पर रिवाइज किया जाता है।केंद्र सरकार की बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत लॉन्च की गई यह स्कीम गर्ल चाइल्ड के लिहाज से बेहतरीन विकल्प है। यदि आपकी बेटी की उम्र 10 साल से कम है तो आप अपनी बेटी के लिए यह खाता खोल सकते हैं। यह अकाउंट आपकी बेटी के 21 वर्ष का होने पर मैच्योर होगा। आप बेटी की शादी या पढ़ाई के लिए इस पैसे का इस्तेमाल कर सकते हैं।टर्म लाइफ इंश्योरेंस के लिए चुकाई गई प्रीमियम की रकम पर आप इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80सी के तहत टैक्स छूट का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इंश्योरेंस प्लान असल में बहुत मामूली प्रीमियम पर काफी अधिक जीवन बीमा कवर खरीदने का मौका देता है। सेक्शन 80C के तहत टैक्स लाभ लेने के लिए आपको हर साल नया प्लान लेने की जरूरत नहीं है। एक पॉलिसी में सालाना आपका रिन्यूअल प्रीमियम भी सेक्शन 80C के तहत छूट पाने योग्य है।ELSS टैक्स बचाने और लंबी अवधि में ज्यादा संपत्ति बनाने का बेहतरीन जरिया है। ईएलएसएस में टैक्स डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है। इसमें 1.50 लाख रुपये तक के निवेश पर सेक्शन 80C के तहत डिडक्शन लिया जा सकता है।पब्लिक प्रॉविडेंट फंड अकाउंट ऐसा इन्वेस्टमेंट ऑप्शन है, जिससे 80C के तहत इनकम टैक्स डिडक्शन मिलता है। हर वित्त वर्ष में इसमें डेढ़ लाख रुपये तक के निवेश पर यह डिडक्शन मिलता है। पीपीएफ में जमा रकम पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स नहीं चुकाना होता है। साथ ही, मैच्योरिटी पर मिलने वाले रिटर्न पर भी टैक्स नहीं देना होता है।SCSS में अधि


Source: Navbharat Times December 30, 2019 07:18 UTC



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