सुप्रीम कोर्ट / सीजेआई पर आरोप लगाने वाली महिला का जांच में शामिल होने से इनकार, कहा- इंसाफ की उम्मीद नहीं - News Summed Up

सुप्रीम कोर्ट / सीजेआई पर आरोप लगाने वाली महिला का जांच में शामिल होने से इनकार, कहा- इंसाफ की उम्मीद नहीं


Dainik Bhaskar Apr 30, 2019, 10:35 PM ISTसुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय समिति कर रही सीजेआई पर लगे यौनशोषण के आरोपों की जांचवकील उत्सव बैंस ने कहा था- सीजेआई पर आरोप एक साजिश का हिस्साइस मामले की जांच का जिम्मा जस्टिस एके पटनायक को सौंपा गयानई दिल्ली. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर यौन शोषण के आरोप लगाने वाली सुप्रीम कोर्ट की पूर्व महिला कर्मचारी ने जांच के लिए बने तीन सदस्यीय पैनल के सामने पेश होने से इनकार कर दिया। महिला मंगलवार को जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की इन-हाउस जांच समिति के सामने पेश हुई। सुनवाई के दौरान अपनी वकील वृंदा ग्रोवर के मौजूद ना रहने पर महिला ने कहा कि मुझे यहां इंसाफ की उम्मीद कम दिखाई देती है। उसने कहा कि यहां का माहौल भयावह है और ऐसे में मैं जांच से बाहर होने के लिए मजबूर हूं।पूर्व कर्मचारी ने जांच में शामिल ना होने के कारण बताएजांच समिति के सामने पेश होने के बाद महिला ने बयान जारी किया। उन्होंने कहा- मैं अपनी सुरक्षा को लेकर डरी हुई हूं। जब मैं कोर्ट की कार्यवाही से वापस लौट रही थी, तब 2-4 लोगों ने मेरा पीछा किया।उन्होंने कहा- तीन सदस्यीय समिति ने ना केवल मेरी वकील को सुनवाई के दौरान मौजूद रहने से मना कर दिया, बल्कि उन्होंने यह भी कहा कि अगर मैं जांच में हिस्सा नहीं लेती हूं तो ऐसे में दूसरे पक्ष को तरजीह देने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।"जांच समिति ने कार्यवाही बिना वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग के शुरू की। 26 और 29 अप्रैल को मैंने जो बयान दर्ज कराए थे, मुझे उनकी कॉपी भी मुहैया नहीं कराई गई। मुझे उस प्रक्रिया के बारे में भी नहीं बताया गया, जिसका पालन जांच के दौरान किया जाना है।"पूर्व कर्मचारी ने कहा- समिति ने मामले से संबंधित दो मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल और वॉट्सऐप की डिटेल मंगवाने से मना कर दिया था। इससे मैं असहाय और परेशान हो गई। इस कदम ने मुझे इस मुझे लगता है कि इस समिति से इंसाफ मिलने की संभावना कम है। इसलिए मैं इस समिति की कार्यवाही में आगे से हिस्सा नहीं लूंगी।"मैं इस समिति की कार्यवाही से खुद को बाहर रखने के लिए मजबूर हूं। ऐसा लगता है कि यह समिति इस तथ्य को नहीं मानना चाहती है कि यह शिकायत आम नहीं है। यह मौजूदा चीफ जस्टिस के खिलाफ यौन शोषण की शिकायत है। जरूरी है कि जिन बेहद असमान परिस्थितियों में मुझे रखा गया है, उसमें ऐसी प्रक्रिया को अपनाया जाए, जिससे पारदर्शी और समानता सुनिश्चित हो।""मुझे उम्मीद थी कि मुझे लेकर वह संवेदनशील होगी, लेकिन ऐसा नहीं है। इससे मुझे डर, चिंता और मानसिक आघात जैसा महसूस हो रहा है। मुझे यह नहीं बताया गया है कि मेरी शिकायत पर सीजेआई से कोई जवाब मांगा गया है।"पूर्व कर्मचारी ने कहा- मुझसे लगातार यही सवाल किया जा रहा है कि मैंने इतनी देर में यौन शोषण की शिकायत क्यों की। मेरा वकील मौजूद नहीं है और ना ही कोई समर्थन करने वाला। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों के सामने लगातार मुझसे सवाल कर रहे हैं। मैं बेदह घबराई हुई हूं, क्योंकि मुझे यह माहौल बहुत भयावह लग रहा है।"मैंने 26 अप्रैल को इस उम्मीद के साथ समिति की कार्यवाही में हिस्सा लिया था कि मेरी परिस्थितियों के संबंध में समिति संवेदनशील और ईमानदार रहेगी। मुझे लगा था कि मुझे हुई परेशानियों के बारे में सुना जाएगा और आखिरकार मेरे और मेरे परिवार के साथ न्याय होगा।"साजिश की जांच का जिम्मा रिटायर्ड जज परवकील उत्सव बैंस ने दावा किया था कि सीजेआई के खिलाफ साजिश रची जा रही है। इसका पता करने के लिए भी एक जांच समिति बनाई गई है। इसका जिम्मा रिटायर्ड जस्टिस एके पटनायक को दिया गया है।वकील ने कहा था- सीजेआई पर आरोपों के पीछे कॉरपोरेट हाउसइससे पहले इस मामले की सुनवाई जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने हुई थी। इस दौरान उत्सव बैंस ने सील बंद लिफाफे में सबूत कोर्ट को सौंपे थे। इनमें कुछ सीसीटीवी फुटेज भी थे। वकील ने कहा था कि साजिश में एक बड़े कॉरपोरेट हाउस का हाथ है। वकील ने एक और सील बंद लिफाफा कोर्ट को देकर कहा था कि दो साजिशकर्ता मुझसे मिले थे।तीन सदस्यीय बेंच ने सख्त लहजे में कहा था- हम हमेशा सुनते हैं कि कोर्ट में ‘बेंच फिक्सिंग’ हो रही है। यह हर हाल में बंद होनी चाहिए। पिछले 3-4 साल से जिस तरह से आरोप लगाए जा रहे हैं उससे तो यह संस्था खत्म हो जाएगी। अमीर और शक्तिशाली लोग सोचते हैं कि वे रिमोट कंट्रोल से कोर्ट चलाएंगे। वे आग से खेल रहे हैं। हम फिक्सिंग की साजिश रचने वालों को जेल भेजेंगे। सुप्रीम कोर्ट के 4-5% वकील महान संस्था का नाम खराब कर रहे हैं। ‘बेंच फिक्सिंग’ का मामला गंभीर है और इसकी जांच होगी।जूनियर कोर्ट असिस्टेंट थी आरोप लगाने वाली महिलासीजेआई गोगोई पर 35 साल की महिला ने यौनशोषण के आरोप लगाए हैं। उसने एफिडेविट की कॉपी 22 जजों को भेजी थी। यह महिला 2018 में सीजेआई के आवास पर बतौर जूनियर कोर्ट असिस्टेंट पदस्थ थी। बाद में उसे नौकरी से हटा दिया गया।


Source: Dainik Bhaskar April 30, 2019 14:13 UTC



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