लेकिन यह बदलाव केवल संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, इसका असली मकसद भारत की भाषाई विविधता को संजोना और छात्रों को बहुभाषी बनाना है. बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि एक ही भाषा को दो अलग-अलग स्तरों (जैसे R1 और R2 दोनों में हिंदी) पर नहीं लिया जा सकता. कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए तीसरी भाषा में पास होना जरूरी होगा. क्षेत्रीय भाषाओं के लिए, CBSE संबंधित स्टेट बोर्ड की किताबों को तब तक इस्तेमाल करने की अनुमति देगा जब तक NCERT की किताबें उपलब्ध नहीं हो जातीं. यह भी पढ़ें- CBSE रिजल्ट का इंतजार इस बार जल्दी हो सकता है खत्म, इन कारणों से नहीं होगी देरी
Source: NDTV April 03, 2026 11:06 UTC