सप्ताह का ज्ञानजो सुबह से शाम बड़ी मुश्किल से दो पैसे जोड़ पाते हैं, किराए के मकान में ही जीवन गुजार देते हैं, दूसरों मे ढेरों कमी निकालते हैं, अपने कष्टों का दिन रात रोना रोते हैं, जिनका चेहरा निस्तेज सा होता है, जिनका सर का तेल ललाट और चेहरे के किनारों पर उतरता रहता है, जो परिवारिक या करियर संबंधी समस्या दोनों या दोनों में से किसी एक से ग्रस्त होते हैं, कुंडली में शनि के प्रकोप से पीड़ित होते हैं। उन्हें मांसाहार और मदिरा से दूर रहना चाहिए। असहायों की सहायता से प्राप्त आशीर्वाद से इनके सारे कष्ट न्यूनतम हो सकते हैं।टिप्स ऑफ द वीक-तैत्तिरीय संहिता के अनुसार दुर्भाग्य से मुक्ति हेतु दक्षिणमुखी होकर श्राद्ध करना लाभदायक होता है।आपके भविष्य का आईना है आपके नाम का प्रथम अक्षरD नाम के लोग बेहद परिश्रमी होते हैं। ये अपने लक्ष्य, कर्म और विचारों के प्रति समर्पित होते हैं और उसको लेकर समझौता नहीं करते। ये जिद्दी और दृढ़ संकल्पी लोगों में शुमार होते हैं। ये किसी न किसी हुनर में माहिर होते हैं और अपने इल्म को भुनाने की कला भी जानते हैं। अपने अथक प्रयास से ये जिंदगी में फर्श से अर्श तक का सफर तय करते हैं। इनकी बौद्धिक क्षमता कमाल की होती है। अपने जीवन और काम में ये किसी का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करते। ये रिश्तों को ज्यादा महत्व देते हैं और इनमें संबंधों को लेकर विचित्र सनक पाई जाती है। अपने व्यक्तिगत जीवन के प्रति ये बेहद गंभीर होते हैं। स्वाभिमानी होने के कारण लोग इन्हें घमंडी समझ लेते हैं। अपने जीवन के शिल्पकार ये स्वयं होते हैं। ये आसानी से परास्त नहीं होते।प्रश्न: अधिक महीना या पुरुषोत्तम मास क्या होता है? -मनोज खाटीउत्तर: भारतीय संवत में दिन, सप्ताह और मास की गणना सूर्य व चंद्रमा की गति पर निश्चित की गई। इसमें सूर्य, चंद्रमा के साथ अन्य ग्रहों को तो जोड़ा ही गया, आकाशगंगा के तारों के समूहों को भी शामिल किया गया, जिन्हें नक्षत्र कहा जाता है। एक नक्षत्र चार तारा समूहों के मेल से निर्मित होता है, जिन्हें नक्षत्रों के चरण के रूप में जाना जाता है। कुल नक्षत्र की संख्या 27 मानी गई है, जिसमें 28वें नक्षत्र अभिजीत को शुमार नहीं किया गया। सवा दो नक्षत्रों के समूहों को एक राशि माना गया। इस प्रकार कुल बारह राशियां वजूद में आईं, जिन्हें बारह सौर महीनों में शामिल किया गया। पूर्णिमा पर चंद्रमा जिस नक्षत्र में गतिशील होता है, उसके अनुसार महीनों का विभाजन और नामकरण हुआ है। सूर्य जब नई राशि में प्रविष्ट होता है, वह दिवस संक्रांति कहलाता है। पर, चूंकि चंद्रवर्ष सूर्यवर्ष यानि सौर वर्ष से ग्यारह दिवस, तीन घाटी और 48 पल कम है, इसलिए हर तीन साल में एक एक मास का योग कर दिया जाता है, जिसे बोलचाल में अधिक माह, मल मास या पुरुषोत्तम माह कहा जाता है।प्रश्न: मिथुन और मकर राशि के लोगों का अगर आपस में विवाह हो, तो उनका दांपत्य जीवन कैसा रहता है? -ज्योति पाठकउत्तर: मिथुन और मकर के रिश्ते यूं तो धूप-छांव की तरह होते हैं, पर उनका जीवन अंतत: बिखर जाता है। आरंभ में मिथुन राशि के लोग मकर से बेहद प्रभावित नजर आते हैं, पर मकर राशि वालों का अति आत्मविश्वास और मनमर्जी चुपके से कब हठ बन उनके दांपत्य जीवन के संतुलन को बिगाड़ देता है, पता ही नहीं चलता। मकर की अति महत्वकांक्षा पहले तो जीवनसाथी मिथुन को दरकिनार कर देती है और उसके बाद मकर राशि के लोग मानसिक कष्ट के शिकार हो जाते हैं।प्रश्न: मेरा मन बहुत घबराता है। कोई उपाय बताएं? जन्मतिथि- 30.06.1984, जन्म समय-6.50, प्रातः, जन्म समय- लखनऊ।-रागिनी पण्ड्याउत्तर: सद्गुरुश्री कहते हैं कि आपकी राशि मिथुन एवं लगन कर्क है। चंद्रमा आपके व्यय भाव यानि द्वादश भाव में बैठ आपको अति संवेदनशील बना रहा है, साथ में शत्रु बुध की युति आपको भावुक कर आपकी बेचैनी बढ़ा रही है। बचीखुची कसर उनका हिबेक और संगी सूर्य निकाल रहा है, जो आपमें भय और अस्वस्थता का भाव उत्पन्न कर रहा है। चिंता न करें, सकारात्मक विचार नियमित प्राणायाम और हल्की वर्जिश के साथ कान में स्वर्ण धारण करने, स्वर्ण को दुग्ध में बुझाकर पीने और पास में चांदी का चौकोर टुकड़ा रखने से लाभ होगा, ऐसा मैं नहीं योग और ज्योतिषिय मान्यताएं कहती हैं।प्रश्न: मैं अपने से छोटे व्यक्ति से अंतर्जातीय प्रेम-विवाह करना चाहती हूं, पर परिजन इसके लिए तैयार नहीं है। आपकी क्या राय है? जन्म तिथि-03.11.1975, जन्म समय-12.30, जन्म स्थान- मुंबई। -ज्योतिका अग्रवालउत्तर: सद्गुरुश्री कहते हैं कि आपकी राशि तुला और लग्न मकर है। आपके पतिभाव का मालिक चंद्रमा मित्र सूर्य और शत्रु राहु व बुध के साथ कर्म भाव में शुक्र की राशि तुला में विराजमान है। लग्नेश व धनेश शनि दांपत्य भाव में बैठ आपको शनि दोष से ग्रसित कर रहा है। अतः किसी भी विवाह प्रस्ताव पर विचार करने से पूर्व मैं वर-वधु की कुंडली के गहन विश्लेषण की अनुशंसा करता हूं। अंतर्जातीय विवाह और उम्र से छोटे जीवन साथी का प्रश्न ज्योतिषिय परिधि के बाहर है। मेरा व्यक्तिगत मत है कि 45 वर्ष की कन्या के विवाह प्रस्ताव पर परिजन को लचीला रुख अख्तियार करना चाहिए।अगर, आप भी सद्गुरु स्वामी आनंद जी से अपने सवालों के जवाब जानना चाहते हैं या किसी समस्या का समाधान चाहते हैं तो अपनी जन्मतिथि, जन्म समय और जन्म स्थान के साथ अपना सवाल saddguru@gmail.comपर मेल कर सकते हैं।सद्गुरुश्री स्वामी आनंदजी
Source: Navbharat Times September 13, 2020 00:22 UTC