Dainik Bhaskar Dec 29, 2019, 05:28 PM ISTगूगल+ 2011 में कई बड़े-बड़े दावों के साथ लॉन्च की गई गूगल प्लस, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म का मुकाबला करने में कामयाब नहीं हो पाई। लगातार घटती लोकप्रियता और कमजोर सुरक्षा मुद्दों के कारण सुर्खियों में आने के बाद अप्रैल 2019 में कंपनी ने इसे बंद करने का फैसला लिया। कंपनी ने अपने बयान में बताया कि यह सोशल मीडिया प्लेटफार्म अब यूजर्स के लिए खास उपयोगी नहीं रह गई है और यूजर्स की इंगेजमेंट को बढ़ाने के लिए भी इसे काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।ऑर्कुट एक दशक पहले तक घर-घर में लोकप्रिय रहने वाला ऑर्कुट ने भी बाजार से अपना बोरिया बिस्तर समेट लिया। कंपनी फेसबुक की लोकप्रियता का मुकबला करने में कामयाब नहीं हो पाई, वहीं धीरे-धीरे ऑर्कुट के सभी यूजर्स फेसबुक की तरफ स्विच होते चले गए। इसी कारण 2014 में कंपनी ने इसे बंद करने का फैसला लिया। कंपनी का कहना था कि अन्य प्लेटफार्म के बाजार में आने के कारण ऑर्कुट की ग्रोथ में लगातार गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद कंपनी ने काफी उम्मीदों के साथ गूगल प्लस का बाजार में उतारा लेकिन सिर्फ निराशा ही हाथ लगी।ब्लैकबेरी मैसेंजर इसी साल मई में ब्लैकबेरी ने अपने इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफार्म ब्लैकबेरी मैसेंजर को भी बंद कर दिया गया। कंपनी ने अपने बयान में नए यूजर्स को बीबीएम सर्विस न दे पाने को इसका प्रमुख कारण बताया। बीबीएम अपने समय की सबसे लोकप्रिय इंस्टेंट मैसेजिंग सर्विस थी लेकिन वॉट्सऐप, फेसबुक मैसेंजर के असिस्तव में आने के बाद इसकी लोकप्रियता घटती चली गई।वाइन 2016 ने ट्विटर में अपनी इस सर्विस को बंद करने का फैसला लिया। वाइन एक पॉपुवर वीडियो लूप ऐप थी जिसमें ने सिर्फ यूजर 6 सेकंड का वीडियो बनाने की सुविधा मिलती थी बल्कि इसे अपनों के साथ शेयर भी किया जा सकता था। लेकिन इंस्टाग्राम के आने के बाद लगातार इसकी पॉपुलारिटी में गिरावट दर्ज की गई। वाइन के वीडिया सेलिब्रिटी ने भी इंस्टाग्राम पर स्विच करना शुरू कर दिया नतीजन कंपनी को इसे बंद करने का फैसला लेना पड़ा।याहू मैसेंजर 90 के दशक से पॉपुलर रही इंस्टेंट मैसेजिंग साइट याहू मैसेंजर को भी बाजार से अपना बोरिया बिस्तर समेटना पड़ा। एक समय लोगों के ऑनलाइन सोशल लाइफ का प्रमुख हिस्सा रही याहू मैसेंजर, बाजार में लगातार आते गए नए प्लेटफार्म का मुकाबला नहीं कर सकी। कंपनी ने इसे पिछले साल बंद किया। अपने समय में इसे ईमेल और एसएमएस के विकल्प के रूप में इसका काफी इस्तेमाल किया जाता था लेकिन स्मार्टफोन्स, फेसबुक और वॉट्सऐप इसके पतन का कारण बन गए।आईट्यून पिंग एपल ने बड़ी उम्मीदों के साथ अपनी सोशल नेटवर्किंग साइट आईट्यून को बाजार में उतारा लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद यह यूजर्स का ध्यान आकर्षण करने में कामयाब नहीं हो पाई। 2010 में लॉन्च हुई एपल की म्यूजिक बेस्ड सोशल नेटवर्किंग प्लेटफार्म को 2017 में बंद कर दिया गया। इसे 10 लाख मेंबर्स के साथ 23 देशों में लॉन्च किया गया था।
Source: Dainik Bhaskar December 29, 2019 10:59 UTC