नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) का बोर्ड सोमवार को एक अहम बैठक करने जा रहा है। मामले से जुड़े सूत्रों ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि इस बैठक के व्यापक एजेंडे में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए फंड सेटलमेंट (निपटान) नियमों को आसान बनाने और बाजार मध्यस्थों (मार्केट इंटरमीडियरीज) को नियंत्रित करने वाले नियामक ढांचे में बदलाव के प्रस्ताव शामिल हैं।एफपीआई (FPI) के लिए 'नेटिंग ऑफ फंड्स' का प्रस्ताव बोर्ड के सामने सबसे अहम प्रस्ताव FPIs को एक ही दिन के कैश मार्केट ट्रेड के लिए व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक लेनदेन का निपटान करने के बजाय फंड को नेट (Net) करने की अनुमति देना है।अभी क्या है नियम? वर्तमान ढांचे के तहत, FPIs को इक्विटी कैश मार्केट ट्रेडों का निपटान सकल आधार (Gross basis) पर करना होता है। यानी, अगर खरीद और बिक्री दोनों एक ही दिन होते हैं, तो भी उन्हें प्रत्येक खरीद लेनदेन के लिए अलग से फंड देना पड़ता है।नया प्रस्ताव क्या है? सेबी ने "नेटिंग ऑफ फंड्स" (Netting of funds) की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है। इससे FPIs उसी दिन की गई बिक्री से प्राप्त आय का उपयोग अपनी खरीद देनदारियों को चुकाने (offset) के लिए कर सकेंगे। इस तरह, उन्हें केवल 'शुद्ध देय राशि' (Net payable amount) ही चुकानी होगी।लागत घटेगी और परिचालन क्षमता बढ़ेगी इस कदम का मुख्य उद्देश्य परिचालन क्षमता में सुधार करना और FPIs के लिए फंडिंग की लागत को कम करना है, विशेष रूप से इंडेक्स रीबैलेंसिंग के दिनों में। इससे इनफ्लो और आउटफ्लो के बीच समय के अंतर के कारण होने वाले विदेशी मुद्रा (forex) से संबंधित खर्चों को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। मौजूदा व्यवस्था में FPIs को कम से कम एक अतिरिक्त दिन के लिए फंड जुटाना पड़ता था, जिससे उनकी लेनदेन लागत बढ़ जाती थी। 1 मार्च, 2025 को पदभार ग्रहण करने के बाद से यह सेबी अध्यक्ष तुहिन कांता पांडे की अध्यक्षता में होने वाली पांचवीं बोर्ड बैठक होगी।'फिट एंड प्रॉपर' नियमों में बड़ा बदलाव FPI से जुड़े सुधारों के अलावा, बोर्ड कई गवर्नेंस और विनियामक प्रस्तावों की भी समीक्षा करेगा जिसमें बाजार मध्यस्थों पर लागू होने वाले "फिट एंड प्रॉपर पर्सन" मानदंडों में व्यापक बदलाव किया जाएगा। सेबी अयोग्यता के रूप में वाइंडिंग-अप कार्यवाही शुरू होने के संदर्भ को खत्म करने पर विचार कर रहा है। अब किसी व्यक्ति के फिट एंड प्रॉपर होने का आकलन करते समय केवल अंतिम 'वाइंडिंग-अप आदेश' को ही ध्यान में रखा जाएगा।
Source: Dainik Jagran March 22, 2026 19:18 UTC