शिव-शक्ति से सीखें परवरिश का पाठ, 'परफेक्ट पेरेंटिंग' के लिए अपनाएं ये 4 नियम - News Summed Up

शिव-शक्ति से सीखें परवरिश का पाठ, 'परफेक्ट पेरेंटिंग' के लिए अपनाएं ये 4 नियम


लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बच्चों के अच्छे और उज्जवल भविष्य के लिए सही परवरिश बेहद जरूरी है। खासकर आज के दौर में बच्चों की सही परवरिश एक मजबूत भविष्य में अहम भूमिका निभाती है। आजकल पेरेंटिंग को लेकर सोशल मीडिया से लेकर रिश्तेदारों तक, हर तरफ से सलाह मिलती है।हालांकि, कभी-कभी हमें देवी-देवताओं और हमारे भगवान से भी पेरेंटिंग से जुड़ी जरूरी बातें सीखने को मिलती हैं। भगवान शिव और माता पार्वती इन्हीं में से एक हैं, जो एक आदर्श पेरेंट्स का सटीक उदाहरण है। आज शिवरात्रि के मौके पर हम जानेंगे कैसे शिव-शक्ति सिखाते हैं पेरेंटिंग का परफेक्ट तरीका-हर बच्चे की अपनी खासियत होती है शवि और पार्वती के पुत्र भगवान गणेश और कार्तिकेय, दोनों एक ही माता-पिता की संतान हैं, लेकिन दोनों का स्वभाव बिल्कुल अलग है। जहां गणेश जी धैर्यवान और बुद्धिमान हैं, तो वहीं कार्तिकेय जी ऊर्जावान और प्रतिस्पर्धी हैं। फिर भी शिव-पार्वती ने कभी अपने बच्चों की तुलना नहीं की। इसी तरह हमें भी माता-पिता के रूप में अपने बच्चों की तुलना बंद करके उनकी अपनी खूबियों को निखारना चाहिए।माता-पिता की आपसी समझ और एकता यह तो सभी जानते हैं कि शिव और पार्वती स्वभाव एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत हैं। शिव वैरागी और शांत हैं, जबकि माता पार्वती गृहस्थ और ममतामयी हैं। बावजूद इसके दोनों एक-दूसरे का सम्मान करते हैं। गणेश जी के जन्म और सिर कटने की घटना के दौरान दोनों में मतभेद हुए, लेकिन अंत में उन्होंने मिलकर परिवार को एक कर लिया। इससे यह सीख मिलती है कि भले ही माता-पिता की राय अलग हो, लेकिन बच्चों को सामने दोनों को मिलकर एक टीम की तरह रहना चाहिए।डर से नहीं, प्यार से सिखाएं भगवान शिव जितने भोले हैं, उतना ही तेज उनका गुस्सा होता है। भोलेनाथ के क्रोध का ही नतीजा है कि गणेश जी का सिर कटने की घटना हुई, लेकिन इसके बाद गणेश जी पहले से अधिक बुद्धिमान और पूजनीय बनकर उभरे। इसी तरह पेरेंट्स को भी यह ध्यान रखना चाहिए कि गुस्से का क्या नतीजा होगा। बच्चों को डराने के बजाय उन्हें यह समझाना चाहिए कि उनके कार्यों के परिणाम क्या होंगे।


Source: Dainik Jagran February 15, 2026 14:02 UTC



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