विवि और काॅॅलेजों से निकलने वाले छात्रों को नौकरी के नहीं पड़ेगा भटकना, सरकार बना रही ये एक्‍शन प्‍लान - News Summed Up

विवि और काॅॅलेजों से निकलने वाले छात्रों को नौकरी के नहीं पड़ेगा भटकना, सरकार बना रही ये एक्‍शन प्‍लान


विवि और काॅॅलेजों से निकलने वाले छात्रों को नौकरी के नहीं पड़ेगा भटकना, सरकार बना रही ये एक्‍शन प्‍लाननई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। विश्वविद्यालय और काॅलेजों से बीए, बीएससी व बीकाम जैसी नॉन-टेक्नीकल डिग्री लेकर निकलने वाले छात्रों को आने वाले दिनों में नौकरी की तलाश में भटकना नहीं पड़ेगा। सरकार ने ऐसे सभी छात्रों को हुनरमंद बनाने का फैसला लिया है। इसके तहत डिग्री पूरी करने के साथ ही उन्हें रुचि रखने वाले क्षेत्रों में स्किल से जुड़ा प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। जो पूरी तरह से नि:शुल्क होगा।इतना ही नहीं, प्रशिक्षण के दौरान उन्हें बतौर प्रोत्साहन कुछ पैसे भी दिए जाएंगे। जिसमें कुछ हिस्सा सरकार देगी, जबकि बाकी पैसा उद्योग देंगे। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने फिलहाल इसे लेकर 'श्रेयस' (स्कीम फार हायर एजुकेशन यूथ इन अप्रेंटिस एंड स्किल) नाम की एक योजना शुरु की है। जिसमें जुलाई से पहले बैच को प्रशिक्षण देने का काम शुरू होगा। मौजूदा समय में इसे लेकर तैयारियां तेजी से चल रही है।यूजीसी ने हाल ही में इसे लेकर सभी विवि और काॅॅलेजों को विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए है, ताकि ज्यादा से ज्यादा छात्रों को प्रशिक्षण कार्यक्रम से जोड़ा जा सके। यूजीसी ने छात्रों की मदद के लिए कुछ इंटर्नशिप क्षेत्र की बड़ी कंपनियों को इस मुहिम से जोड़ा है।मौजूदा समय में बीए, बीएससी और बीकाम जैसे जनरल डिग्री लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों से निकलने वालों छात्रों को रोजगार की तलाश के लिए भटकना होता है। इसकी मुख्य वजह उनके पास किसी तरह की स्किल का न होना होता है।यूजीसी से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक श्रेयस के तहत स्किल प्रशिक्षण देने की जो अवधि तय की है, वह छह महीने से साल भर की होगी। माना जा रहा है कि इसके तहत बड़ी संख्या छात्रों में इंटर्नशिप करने वाली कंपनी या संस्थान में ही नौकरी मिल जाएगी। बाकी लोग स्किल का प्रशिक्षण लेकर दूसरे संस्थानों में भी नौकरी हासिल कर सकते है। फिलहाल इस योजना के तहत संस्थानों को योजना से जुड़ना होगा। इसके बाद उन्हें अपने छात्रों को योजना में पंजीकृत करना होगा।2022 तक पचास फीसद छात्रों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्ययोजना के तहत 2022 तक विश्वविद्यालय और काॅॅलेजों से निकलने वाले करीब पचास फीसद नाॅॅन-टेक्नीकल डिग्रीधारी छात्रों को हुनरमंद बनाने का लक्ष्य रखा गया है। यूजीसी ने इसके लिए उच्च शिक्षण संस्थानों में एक पूरा तंत्र विकसित करने की भी योजना बनाई है।इनमें उद्योगों को भी जोड़ा गया है। साथ ही समय-समय पर उद्योगों की मांग के मुताबिक इनमें बदलाव करने की पहल भी की गई है। सरकार ने यह पहल तब की है, जब विवि और कालेजों से हर साल करीब 80 लाख छात्र स्नातक की डिग्री लेकर निकल रहे है।Posted By: Prateek Kumar


Source: Dainik Jagran May 02, 2019 16:18 UTC



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