लिखना जरूरी है: 'आपके साथ को तरसते हैं, हमें आपका वक्त चाहिए 'पापा' Lucknow News - News Summed Up

लिखना जरूरी है: 'आपके साथ को तरसते हैं, हमें आपका वक्त चाहिए 'पापा' Lucknow News


लिखना जरूरी है: 'आपके साथ को तरसते हैं, हमें आपका वक्त चाहिए 'पापा' Lucknow Newsपापा,जो बातें मैं आपसे कहने जा रही हूं, शायद ही कभी आपके सामने कह सकूं। इसलिए खत लिखकर आपको अपने दिल की बात बता रही हूं। मैं कहना चाहती हूं कि आपने जो हमारे लिए किया है, जो कर रहे हैं, उसके लिए कभी आपको शुक्रिया नहीं कहा। कभी इस ओर ध्यान ही नहीं गया कि आप हमारे लिए कितना कुछ कर रहे हैं। अब बुद्धि थोड़ी खुलने लगी है तो इस ओर ध्यान जाने लगा है.. और जब ध्यान गया तो लगता है कि शुक्रिया, धन्यवाद, थैंक्स जैसे शब्द छोटे हैं।कुछ शिकायतें भी हैं आपसे। हम आपके साथ को तरसते हैं पापा। हमें आपके साथ वक्त बिताना है। शायद मैं बड़ी हो रही हूं, इसलिए आपको मेरे स्वावलंबन पर विश्वास होने लगा है और आपको लगता है कि मैं खुद को संभाल सकती हूं। इसलिए आपके साथ की मुङो अब जरूरत नहीं। मुङो हमेशा आपके साथ की जरूरत रहेगी। चाहे मैं कितनी ही बड़ी क्यों न हो जाऊं। आपके साथ की जरूरत मेरी किसी तरह की मदद के लिए नहीं है, बस इस अहसास के लिए कि मैं अपने प्यारे पापा के साथ हूं। मुङो बचपन की तरह आपके साथ खेलना है। होमवर्क करना है। आपके साथ आइसक्रीम खाने जाना है, पार्क में घूमना है, मूवी देखनी है, बचपन वाली सारी मस्तियां फिर करनी हैं।पापा, जब आप काम के सिलसिले में महीनों हमसे दूर चले जाते हैं तो आपकी बहुत याद आती है। दूसरे बच्चों को जब उनके पापा के साथ पार्क में टहलते-घूमते देखती हूं तो आपका पास न होना और भी खलता है।पापा, आप इतनी मेहनत मत किया करो। जानती हूं कि आप हमारे लिए ही सब कुछ कर रहे हैं, लेकिन हमें आपके समय की ज्यादा जरूरत है। हमें सिर्फ पापा चाहिए।आपकीअनन्या पांडेयकक्षा 12, केवी, अलीगंजबच्चों के दोस्त बनें अभिभावकछोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करना, स्कूल जाने से बचना, दोस्तों के साथ खेलने को मना करना, किसी से बात न करना, गुमशुम और उदास रहना। ऐसे लक्षण यदि बच्चों में दिखाई दें तो इसे नजरअंदाज न करें। ये सामान्य लक्षण नहीं हैं। ये बच्चों में डिप्रेशन के वार्निग साइन की ओर इशारा करते हैं। अक्सर कुछ बच्चे इस बात को स्वीकार ही नहीं करते कि उन्हें कोई दिक्कत है या फिर वे अवसादग्रस्त हैं। वहीं, कुछ बच्चे छोटी-छोटी बातों को भी दिल से लगा लेते हैं किसी से नहीं कहते। ऐसे बच्चे अपने अभिभावकों में एक दोस्त को तलाश करते हैं। इसलिए हर माता-पिता थोड़ा सा वक्त अपने बच्चों के लिए भी निकालें जिन बच्चों के लिए अभिभावक सारा दिन कड़ी मेहनत करते हैं, यदि उन्हें ही समय नहीं दे पाते तो आखिर इतनी मेहनत किसलिए।इन बातों पर करें अमलबच्चों के दोस्त बनें, वक्त देंउनके पसंदीदा खेलों में रुचि दिखाएंसप्ताह में एक बार बच्चों के साथ आउटिंग पर जाएंबच्चों से स्कूल या कॉलेज में होने वाली गतिविधियों पर चर्चा करें।डॉ. सृष्टि श्रीवास्तव, मनोवैज्ञानिक नवयुग कन्या महाविद्यालयजागरण की इस पहल के बारे में अपनी राय और सुझाव निम्न मेल आइडी पर भेजें। sadguru@lko.jagran.comPosted By: Anurag Guptaअब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप


Source: Dainik Jagran October 20, 2019 02:48 UTC



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