राजस्थान / 2 निर्दलीय ने भाजपा प्रत्याशी जैसा दिखने के लिए शपथ पत्र पर भगवा कपड़ों में फोटो लगाई - News Summed Up

राजस्थान / 2 निर्दलीय ने भाजपा प्रत्याशी जैसा दिखने के लिए शपथ पत्र पर भगवा कपड़ों में फोटो लगाई


Dainik Bhaskar May 02, 2019, 01:00 PM ISTलोकसभा चुनाव में पहली बार मतदाताओं को ईवीएम पर प्रत्याशियों की फोटो भी दिखेगीजो फोटो शपथ पत्र पर लगाई गई है, वही ईवीएम पर प्रत्याशी के चुनाव चिह्न के साथ दिखाई देगीसीकर (राजस्थान). सीकर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे तीन प्रत्याशियों की फोटो ईवीएम पर करीब-करीब एक जैसी होगी। हो सकता है इन्हें एक नजर में पहचान करना मुश्किल हो जाए। इनमें दो निर्दलीय प्रत्याशी और एक भाजपा प्रत्याशी और सांसद सुमेधानंद सरस्वती हैं। सुमेधानंद पिछले 35 साल से भगवा वस्त्र पहन रहे हैं, लेकिन दो निर्दलीय प्रत्याशी आम दिनों भगवा वस्त्र पहने नहीं दिखते हैं। दैनिक भास्कर के पास इन सभी प्रत्याशियों के शपथ पत्र की कॉपी है।सुमेधानंद जैसे पहनावे में ही फोटो खिंचवाने वाले दो अन्य उम्मीदवार फतेहपुरा के अजयपाल और भढाढ़र के भागीरथसिंह खर्राटे हैं। सीकर सीट पर सुमेधानंद का मुकाबला कांग्रेस के सुभाष महारिया से है।सुमेधानंद ने 1984 में दीक्षा ली थीस्वामी सुमेधानंद 35 साल से भगवा वस्त्र पहन रहे हैं। 1984 में उन्होंने दीक्षा ली थी। उनका कहना है कि भगवा वस्त्र पहनने से किसी को कैसे मना किया जा सकता है। छल कपट कोई भी कर सकता है। वे बताते हैं कि आर्य समाज की स्थापना स्वामी दयानन्द सरस्वती ने की थी। आर्य समाज के 10 नियम हैं। आर्य समाज की दीक्षा से पहले वेदों का अध्ययन करना जरूरी होता है। तभी कोई भगवा वस्त्र पहन सकता है।निर्दलीय प्रत्याशियों ने कहा- कभी-कभी पहन लेते हैंभागीरथ सिंह खर्राटे : भढाढ़र गांव के पशुपालक भागीरथ अब तक 47 चुनाव (पंच से लेकर सांसद तक) लड़ चुके हैं। इस बार उनका 48 वां चुनाव है, लेकिन एक भी चुनाव नहीं जीते। भागीरथ पहली बार भगवा वस्त्र और सिर पर पगड़ी के साथ मैदान में हैं। भास्कर उनसे मिलने भढाढ़र पहुंचा तो वे घर पर सोते मिले। भागीरथ घर पर नीली पेंट और फौजी कोट में थे। उनसे पूछा कि शपथ पत्र में भगवा वस्त्र पहन कर तस्वीर लगाने के पीछे क्या उद्देश्य था तो बोले- कभी-कभी पहन लेता हूं।भढाढ़र गांव के पशुपालक भागीरथ अब तक 47 चुनाव (पंच से लेकर सांसद तक) लड़ चुके हैं। इस बार उनका 48 वां चुनाव है, लेकिन एक भी चुनाव नहीं जीते। भागीरथ पहली बार भगवा वस्त्र और सिर पर पगड़ी के साथ मैदान में हैं। भास्कर उनसे मिलने भढाढ़र पहुंचा तो वे घर पर सोते मिले। भागीरथ घर पर नीली पेंट और फौजी कोट में थे। उनसे पूछा कि शपथ पत्र में भगवा वस्त्र पहन कर तस्वीर लगाने के पीछे क्या उद्देश्य था तो बोले- कभी-कभी पहन लेता हूं। अजयपाल: फतेहपुरा पंचायत के सरपंच रह चुके हैं। अजयपाल की मां और पिता भी सरपंच रह चुके हैं। चुनाव जीतने के लिए इन्होंने सूट-बूट उतार दिया है। भगवा भेष बनाया है। सिर पर भगवा पगड़ी बांधी है और चश्मा भी लगाया है। उनसे फोन पर पूछा कि शपथ पत्र में भगवा वस्त्र पहन कर तस्वीर लगाने के पीछे क्या उद्देश्य था तो इस बारे में बात करने से इनकार कर दिया।राघवाचार्य महाराज- ऐसा करना शास्त्रीय परंपराओं के खिलाफरैवासा के राघवाचार्य महाराज का कहना है कि जो व्यक्ति वेदों का अध्ययन पूरा कर लेता है, तब उसे आर्य समाज की दीक्षा मिलती है। बिना वेदों को जाने कोई भगवा वस्त्र धारण करता है तो वह शास्त्रीय परंपराओं के खिलाफ है।


Source: Dainik Bhaskar May 02, 2019 05:25 UTC



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