बुजुर्ग की गुहार... दान पत्र निरस्त कर वापस दिलाई जाए प्रॉपर्टीDainik Bhaskar Jan 26, 2020, 11:38 AM ISTभोपाल। अभी तक बुजुर्ग अपने बेटों की शिकायत करते थे कि बहू-बेटे उन्हें ठीक से नहीं रखते, लेकिन फैमिली कोर्ट में एक औसा मामला पहुंचा, जिसमें एक बेटी ने धोखाधड़ी करके सरकार से मिले मकान को अपने नाम करा लिया। अब वह उसे बेचने की फिराक में है। जब पिता को धोखाधड़ी के बारे में पता चला तो उन्होंने कलेक्टर, एसडीएम, सीएम हेल्प लाइन सहित सब जगह गुहार लगाई, लेकिन दान पत्र रजिस्टर होने के कारण कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर बुजुर्ग ने अब फैमिली कोर्ट में दान पत्र निरस्त करने के लिए आवेदन दिया है। मामला फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायधीश आरएन चंद के यहां विचाराधीन है।सरदार पटेल नगर निवासी प्यारेलाल को सरकारी योजना के तहत 1960 में घर मिला था। इस योजना की शर्त थी कि मकान को बिना कलेक्टर की अनुमति के न तो बेच सकते हैं और न ही दान कर सकते हैं। दो साल पहले बेटी ने हमे अपने घर बुलाया और कहा कि नए नियमों के अनुसार घर की नई रजिस्ट्री करानी पड़ेगी। इसके बाद वह उन्हें रजिस्ट्रार के ऑफिस ले गई और दानपत्र तैयार करा घर खुद के नाम करा लिया। दामाद बीएचईएल में कर्मचारी हैं। प्यारेलाल ने बताया कि उन्होंने इसके संबंध में मंगलवारा थाने में भी शिकायत है। वे कलेक्टर से लेकर सीएम हेल्पलाइन तक शिकायत कर चुके हैं, लेकिन दान पत्र निरस्त नहीं हो सका। अब उन्होंने फैमली कोर्ट में गुहार लगाई है।यदि घर बिक गया तो बेघर हो जाएंगे 17 लोगप्यारेलाल ने बताया कि उनके तीन बेटे और दो बेटियां हैं। दो बेटों की मौत हो चुकी है। उनकी विधावाएं और बच्चे, एक विधवा बेटी और उसके बच्चे इसी मकान में रह रहे हैं। यानि कुल 17 लोगों के लिए यही एक छत हैं। मेरी मौत की मौत के बाद बड़ी बेटी सबको बाहर करके मकान बेच देगी। प्यारेलाल ने बताया कि पत्नी को जब इस बात की जानकारी लगी तो उसकी सदमे से मौत हो गई। बेटी मीना ने मां का दाह संस्कार कराया और बाद में मां के दाह संस्कार में खर्च हुई राशि मांगने लगी।
Source: Dainik Bhaskar January 26, 2020 06:11 UTC