बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐपभास्कर एक्सप्लेनर: कोरोना की जांच में RT-PCR में आने वाली CT वैल्यू क्या है? एक दिन पहलेकॉपी लिंककोरोना के बढ़ते आंकड़ों के बीच वैक्सीनेशन और टेस्टिंग पर जोर दिया जा रहा है। हल्के लक्षण दिखते ही आपको सलाह दी जाती है कि कोरोना का टेस्ट कराएं। कोरोना की पुष्टि के लिए भी अलग-अलग टेस्ट होते है जैसे रैपिड एंटीजन टेस्ट, RT-PCR टेस्ट आदि। इसमें RT-PCR टेस्ट को गोल्ड स्टैंडर्ड टेस्ट माना गया है। यानी इस टेस्ट के नतीजे अन्य टेस्ट के मुकाबले ज्यादा सटीक होते है।आइए समझते हैं कि RT-PCR क्या है, यह कैसे किया जाता है और इसमें सबसे जरूरी CT वैल्यू क्या है...RT-PCR टेस्ट होता क्या है? लोगों को ये भ्रम रहता है कि कम CT वैल्यू का मतलब कम संक्रमण, लेकिन CT वैल्यू का संक्रमण से एकदम उल्टा संबंध है। यानी CT वैल्यू जितनी कम, संक्रमण उतना ही ज्यादा और CT वैल्यू जितनी ज्यादा, संक्रमण उतना ही कम।कैसे डिसाइड होता है कि सैंपल पॉजिटिव है या निगेटिव? तेजप्रताप तोमर का कहना है कि पहली और दूसरी लहर में बहुत अंतर है। पहले 10 में से एक मरीज के CT स्कैन में डैमेज दिखता था, अब 10 में से 5-6 मरीज के फेफड़ों में इन्फेक्शन दिख रहा है।CT स्कोर और CT वैल्यू में क्या अंतर है? CT वैल्यू RT-PCR से आती है, जिससे पता चलता है कि इन्फेक्शन का स्तर कितना है। इसके मुकाबले CT स्कोर का मतलब है सीटी स्कैन में फेफड़ों को कितना नुकसान पहुंचा है। इन दोनों का आशय भी अलग होता है। CT वैल्यू जितनी कम, उतना ही वायरल लोड ज्यादा। इसी तरह CT स्कोर जितना ज्यादा, फेफड़ों को नुकसान उतना अधिक।
Source: Dainik Bhaskar April 28, 2021 00:32 UTC