खेल रत्न अवॉर्ड हो या द्रोणाचार्य अवॉर्ड, सभी में ऐसे लोगों के नामों की सिफारिश की गई है, जो पॉइंट सिस्टम के हिसाब से कहीं भी नहीं आते हैं। खेल रत्न में मुझसे कम पॉइंट वाले खिलाड़ी के नाम की सिफारिश की गई है। उसी तरह द्रोणाचार्य सम्मान के लिए भी मेरे कोच अनिल धनकड़ इसके हकदार थे, लेकिन उनके नाम की भी अनदेखी की गई है। मैं पहले से ही कहता आ रहा हूं कि खेल नीति में बदलाव की जरूरत है। खेल अवॉर्ड में पारदर्शिता लाने की जरूरत है। कहीं ऐसा न हो, कि इस अवॉर्ड का महत्व ही खत्म हो जाए।आपने खेल मंत्रालय को पत्र लिखा था। क्या उसका जवाब आया? जब अवॉर्ड प्रक्रिया शुरू हुई थी, तब से ही मैं खेल नीति में बदलाव की मांग कर रहा था। मैंने खेल मंत्री किरण रिजिजू को भी खेल नीति में बदलाव करने और सेल्फ नॉमिनेशन की प्रोसेस को खत्म करने के लिए पत्र लिखा था, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। मैं शुरू से कह रहा हूं कि अवॉर्ड में पारदर्शिता लाने की जरूरत है। ताकि इस अवॉर्ड की गरिमा बनी रहे और खिलाड़ियों का इस अवॉर्ड से मोह-भंग न हो। सही मायने में जो हकदार हो, उसे ही अवॉर्ड मिलना चाहिए।पहली बार ऐसा हुआ कि खेल रत्न से सम्मानित खिलाड़ियों को अर्जुन अवॉर्ड दिया गया है? इसे आप किस नजरिए से देखते हैं? मैं जाने-अनजाने में डोपिंग में फंसा था, लेकिन उस एक गलती की सजा कब तक मिलती रहेगी। उस गलती को भुलाकर मैं लगातार बेहतर कर रहा हूं। उसके बाद भी मुझे सम्मानित नहीं किया जा रहा है।अवॉर्ड के लिए अपने नाम की अनदेखी के लिए कोर्ट में जाएंगे? मैं कोर्ट में नहीं जाऊंगा, लेकिन मेरे कोच अनिल धनखड़ की अनदेखी की गई है, उनके लिए जाना पड़े तो मैं जरूर कोर्ट जाऊंगा। मुझे पता है कि मैं अपने नाम की अनदेखी के लिए कोर्ट में जाऊंगा, तो मुझे अवॉर्ड मिल जाएगा, लेकिन मैं चाहता हूं कि यह अवॉर्ड मुझे खेल मंत्रालय पूरे सम्मान के साथ दे।तीसरी बार आपके नाम की अनदेखी की गई है, क्या आप अवॉर्ड के लिए अप्लाई करते रहेंगे?
Source: Dainik Bhaskar August 20, 2020 00:08 UTC