सरकार ने इसके लिए 2006 की सचर कमेटी रिपोर्ट और 2008 की राज्य स्तरीय स्टडी ग्रुप की रिपोर्ट का हवाला दिया था. याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यह धर्म के आधार पर आरक्षण है और 50% की सीमा का उल्लंघन है. बाद की सरकारों ने मराठा आरक्षण को लेकर कानूनी कोशिशें जारी रखीं, लेकिन 5% मुस्लिम आरक्षण को लेकर कोई ठोस विधायी कदम नहीं उठाया गया, न बीजेपी सरकार ने, न उद्धव ठाकरे सरकार ने, जिसमें कांग्रेस भी शामिल थी. कांग्रेस का कहना है कि सरकार का कदम 'मुस्लिम विरोधी' है. बीजेपी का दावा है कि 2014 का फैसला चुनाव से पहले तुष्टिकरण की राजनीति था और कभी सही तरीके से लागू ही नहीं हुआ.
Source: NDTV February 19, 2026 12:09 UTC