प्रयागराज (ब्यूराे)। देश का मिडिल क्लास, नौकरीपेशा वर्ग और सीनियर सिटीजंस हर साल आम बजट की ओर बड़ी उम्मीदों के साथ देखता है। बढ़ती महंगाई, इलाज और शिक्षा के बढ़ते खर्च तथा रिटायरमेंट के बाद सीमित आय के बीच टैक्स में राहत अब जरूरत बन चुकी है। खासकर इनकम टैक्स के पुराने और नए सिस्टम को लेकर करदाताओं में असमंजस बना हुआ है। ऐसे में बजट से अपेक्षा है कि सरकार टैक्स ढांचे को न सिर्फ आसान बनाए, बल्कि आम आदमी को वास्तविक राहत भी दे।मौजूदा टैक्स सीमा में हो बढ़ोतरीसबसे बड़ी मांग पुराने टैक्स सिस्टम में बेसिक छूट सीमा को मौजूदा 2.5 लाख रुपये से बढ़ाने की है। महंगाई के इस दौर में 2.5 लाख की सीमा अब अप्रासंगिक होती जा रही है। मिडिल क्लास का मानना है कि कम से कम 5 लाख रुपये तक की आय को टैक्स फ्री किया जाना चाहिए, ताकि दैनिक खर्चों का दबाव कुछ कम हो सके। इसी तरह धारा 80C के तहत 1.50 लाख रुपये की निवेश सीमा को बढ़ाने की मांग भी लंबे समय से की जा रही है। पीपीएफ, एलआईसी, ईएलएसएस, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की बचत जैसे विकल्प इसी सीमा में सिमटे हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसे बढ़ाकर 2.5 या 3 लाख रुपये किया जाए, तो इससे न केवल लोगों की बचत बढ़ेगी बल्कि दीर्घकालीन निवेश को भी प्रोत्साहन मिलेगा।तेजी से बढ़ रहा मेडिकल इश्योंरेंस प्रीमियमहोम लोन पर ब्याज की कटौती की सीमा भी आम करदाता के लिए अहम मुद्दा है। वर्तमान में 2 लाख रुपये तक की छूट दी जाती है, जो महानगरों में घर की कीमतों और ऊंची ईएमआई के मुकाबले कम मानी जाती है। वहीं, मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर मिलने वाली छूट भी बढ़ाने की जरूरत है, क्योंकि इलाज का खर्च हर साल तेजी से बढ़ रहा है। नौकरीपेशा वर्ग का यह भी कहना है कि पुराने टैक्स सिस्टम के स्लैब में बदलाव किया जाना चाहिए, ताकि उसे नए टैक्स सिस्टम के बराबर राहत मिल सके। अभी नया सिस्टम कम स्लैब और कम टैक्स दरों के कारण आकर्षक जरूर लगता है, लेकिन इसमें ज्यादातर छूट खत्म कर दी गई हैं। इससे करदाता असमंजस में हैं कि कौन-सा सिस्टम उनके लिए बेहतर है।स्पष्ट और सरल रहे टैक्स कानूनसरकार द्वारा प्रस्तावित नया टैक्स कानून सरल, स्पष्ट और तकनीक के अनुकूल होना चाहिए। टैक्स रिटर्न फाइल करने, रिफंड पाने और टीडीएस मैचिंग में आज भी कई करदाताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अगर नियम सरल होंगे तो अनुपालन बढ़ेगा और विवाद कम होंगे। मिडिल क्लास की यह भी मांग है कि नए टैक्स सिस्टम में भी कुछ जरूरी खर्चों पर छूट दी जाए। खासकर घर के लोन और इलाज जैसे खर्च ऐसे हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। महंगाई के इस दौर में इन पर राहत देना जरूरी हो गया है।ब्याज होती है मुख्य आयनिवेश के मोर्चे पर शेयर, म्यूचुअल फंड और प्रॉपर्टी के लिए एक जैसा और आसान टैक्स सिस्टम लागू करने की मांग जोर पकड़ रही है। अलग-अलग एसेट क्लास पर अलग नियम होने से आम निवेशक भ्रमित रहता है। इसी तरह कैपिटल गेन टैक्स के नियमों को भी सरल बनाने की जरूरत है, ताकि निवेशकों को स्पष्टता मिल सके। सीनियर सिटीजंस के लिए बचत योजनाओं पर मिलने वाले ब्याज में अधिक छूट और नियमों को आसान बनाने की मांग भी अहम है। रिटायरमेंट के बाद ब्याज ही उनकी मुख्य आय होती है, लेकिन टैक्स और जटिल नियमों के कारण उन्हें परेशानी उठानी पड़ती है।वृद्धों को दी जाने वाली पेंशन के ऊपर जो टैक्स लगता है उसको कम करना चाहिए, क्योंकि बुढ़ापे के बाद पेशन ही एक मात्र सहारा होता है। इसके अलावा और कोई सहारा नही होता, इसलिए सरकार को वृद्धों की पेंशन पर लगने वाले टैक्स को कम करना चाहिए।मनोरमा मिश्राबजट समाज के सभी वर्गों को ध्यान में रख कर तैयार हो, जिससे की सभी को इसका लाभ मिल सके। इसी के साथ में जो टैक्स स्लैब में बदलाव करते हुए 2.5 लाख एनुअल इनकम की जगह पांच लाख एनुअल पर इनकम टैक्स लगाना चाहिए।डॉ। शुशील शुक्लाहोम लोन पर इस वक्त 2 लाख रुपये तक की छूट दी जाती है, जो महानगरों में घर की कीमतों और ऊंची ईएमआई के मुकाबले कम मानी जाती है। वहीं, मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर मिलने वाली छूट भी बढ़ाने की जरूरत है, क्योंकि इलाज का खर्च हर साल तेजी से बढ़ रहा है। इसमे विशेष छूट दी जानी चाहिए।विवेक द्धिवेदीकानून को इतना आसान बनाया जाए कि जिसे हर केाई आसानी से समझ सके। जब लोगों को टैक्स कानून के नियम आसानी से समझ आऐंगे, तो अधिक से अधिक लोग उसका लाभ उठा सकेंगे। सरकार को इन बातों का ध्यान प्रमुखता से रखना चाहिए।प्रियंका मिश्रालैंग्वेज एक्सपर्टइलाहाबाद यूनिवर्सिटी
Source: Dainik Jagran January 31, 2026 21:30 UTC