मॉस्को, प्रेट। Magnetic Resonance Imaging: हमारे सोचने और समझने की क्षमता ही हमें दूसरे जीवों से अलग करती है। किसी भी व्यक्ति की सोचने-समझने की यह क्षमता का अनुमान उसके बौद्धिक स्तर से लगाया जा सकता है। अब इस बौद्धिक स्तर का पता लगाने की दिशा में भी शोधकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। दरअसल, शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि इंसानों के आंतरिक अंगों और ऊतकों का पता लगाने में प्रयोग होने वाला मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग यानी एमआरआइ अब बच्चों के बौद्धिक स्तर का पता लगाने में भी मददगार साबित हो सकता है। हालिया अध्ययन में इसका दावा किया गया है।इस तरह अध्ययन से लगाया पतारूस के स्कोलकोवो इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने गहरी समझ वाले थ्रीडी नेटवर्क आधारित सामूहिक पद्धतियों का प्रयोग करके यह विश्लेषण किया कि क्या एमआरआइ ब्रेन इमेज के जरिये बौद्धिक स्तर का पता लगाया जा सकता है। उन्होंने यह पता लगाने के लिए अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआइएच) के डाटाबेस का प्रयोग किया। इस डाटाबेस में 9 से 10 साल के बच्चों के एमआरआइ इमेज थे।अलग-अलग उम्र के लोगों के एमआरआइ का विश्लेषणयह अध्ययन एडोलसेंट ब्रेन कॉगनिटिव डेवलपमेंट न्यूरोकॉगनिटिव प्रिडिक्शन जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इसमें बौद्धिक स्तर या ‘अस्थिर बौद्धिकता’ का अनुमान लगाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। अस्थिर बौद्धिकता में तार्किक रूप से सोचने और नई परिस्थितियों में समस्या का समाधान खोजने की क्षमता होती है। हालांकि, इसके लिए स्वतंत्र ज्ञान की हासिल करने की जरूरत होती है। शोधकर्ताओं ने स्वतंत्र और लक्षित बौद्धिक स्तर दोनों का अनुमान लगाया। इसमें अलग-अलग उम्र, लिंग, मस्तिष्क आकार या एमआरआइ स्कैनर का प्रयोग किया गया।भावनात्मक विकास को समझने में भी मिलेगी मददशोध में शामिल पीएच.डी छात्र एकाटेरिना कोंद्रात्येवा ने बताया, ‘हमने तंत्रिका जाल का अनुमान लगाने वाले थ्री डी के साथ विभिन्न पद्धतियों का प्रयोग किया। इससे कोई भी उसके आयाम को कम किए बगैर इमेज को उसके मूल स्वरूप में वर्गीकृत कर सकता है। इस प्रक्रिया में किसी तरह की सूचना भी नष्ट नहीं होती है।’ इस अध्ययन ने बच्चों की ‘अस्थिर बौद्धिकता’ और मस्तिष्क रचना में संबंध स्थापित करने में मदद की। शोधकर्ताओं ने बताया, हालांकि यह अनुमान पूरी तरह सही नहीं हो सकता है। फिर भी यह अध्ययन बच्चों की सोच-समझ, सामाजिक, भावनात्मक और शारीरिक विकास संबंधी विभिन्न पहलुओं को समझने में मददगार साबित हो सकता है।Posted By: Sanjay Pokhriyalडाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस
Source: Dainik Jagran December 31, 2019 03:33 UTC