कोरोना काल में सरकारी योजनाओं के बहाने हो रही ठगी मुद्रा लोन समेत दूसरी सरकारी योजनाओं के बहाने ठगी की दुकान चलाने लगे। 5 फीसदी ब्याज पर 15 मिनट में लोन दिलाने का झांसा देने लगे। कई जरूरतमंद इनके जाल में फंसे। हाल ही में मुद्रा लोन के नाम पर ठगी में कुछ बदमाशों को गिरफ्तार किया गया था। जांच में पता चला कि ठग जरूरतमंदों को कॉल कर संपर्क करते थे, फिर वाट्सऐप और फोन पर ही पूरी बातचीत होती। 5 फीसदी ब्याज पर लोन की बात सुनते ही लोग ठगों के जाल में फंस जाते थे। रुपये पाने के लिए अपने दस्तावेज वॉट्सऐप पर ही दे देते थे। इसके बाद ठग बड़े वित्तीय संस्थानों के फर्जी लेटरहेड पर लोन अप्रूवल के लेटर भेज देते थे।प्रोसेसिंग फीस भी लेते हैं ठग अप्रूवल का लेटर भेजने के बाद प्रोसेसिंग फीस के बहाने 30 हजार से 60 हजार रुपये तक की वसूली की जाती है। जैसे ही उन्हें पैसे मिलते हैं, ठगों के नंबर बंद हो जाते हैं। चूंकि रकम होती है, ऐसे में फौरी तौर पर थानों से भी पीड़ितों को मदद नहीं पाती है। थानों और साइबर सेल के कई बार चक्कर लगाने के बाद पीडित एसएसपी दफ्तर पहुंचते हैं, तब जाकर उनकी रिपोर्ट दर्ज की जाती है। इतनी दौड़भाग में 15 दिन से 1 महीने तक का समय बीत जाता है। इस दौरान ठग वॉट्सऐप पर मिले दस्तावेजों के साथ दूसरी जगह भी ठगी कर लेता है।15 मिनट में वॉट्सऐप पर नहीं मिलता लोन सीओ फर्स्ट और साइबर सेल के मॉनिटरिंग अफसर अभय कुमार मिश्रा ने बताया कि आसानी से घर बैठे लोन की सुविधा चाहने वाले इस ठगी के शिकार होते हैं। थोड़ी सी सतर्कता से ऐसी ठगी को रोका जा सकता है। अगर आपको भी किसी ठग का फोन आए जो आपको बेहद कम दर पर वॉट्सऐप पर 15 मिनट में लोन देने की बात करे तो सतर्क हो जाएं। सबसे अहम बात ये है कि किसी भी हालत में लोन के लिए किसी तरह का कोई भुगतान ना करें।
Source: Navbharat Times November 18, 2020 03:00 UTC