फरसा वाले बाबा - News Summed Up

फरसा वाले बाबा


जिन 'फरसा बाबा' की मौत पर बवाल, वो कौन? : 15 Kg का फरसा लेकर चलते थे, शिष्य बोले- पीछा कर गोतस्करों को पकड़ते थेउत्तर प्रदेश 4 घंटे पहले लेखक: राजेश साहूकॉपी लिंक'मेरी गोशाला में 350 गाय हैं। इनकी सेवा करता हूं। जहां से भी खबर आती है कि आवारा गोमाता दिखी हैं, मैं उन्हें अपने यहां ले आता हूं। कहीं खबर आई कि गाय की मौत हो गई, तो हम उसका अंतिम संस्कार करते हैं। उसे चंदन, चुनरी, तुलसी के साथ विदा करते हैं।'ये बातें पिछले दिनों मथुरा में फरसा बाबा के नाम से मशहूर चंद्रशेखर सिंह ने एक यूट्यूब इंटरव्यू में कही थीं। उन्होंने कहा था- रात 10 से लेकर सुबह 5 बजे तक गोमाता को बचाने के लिए हाईवे पर निगरानी करता हूं। गौ-तस्करों से लड़ता हूं। यही मेरी दिनचर्या है, मेरी पहचान है।माथे पर बड़ा लाल टीका, हाथ में फरसा और गेरुआ वस्त्र… ऐसे दिखते थे फरसा बाबा। लोग कहते हैं- उन्हें हमेशा फरसे के साथ देखा। फरसा करीब 15 किलो भारी था, इसलिए उन्हें धीरे-धीरे लोग चंद्रशेखर नहीं फरसा बाबा कहने लगे।इन्हीं चंद्रशेखर उर्फ फरसा बाबा (45) की शनिवार सुबह 5 बजे एक ट्रक से कुचलकर मौत हो गई। साथियों ने दावा किया कि गोतस्करों ने ट्रक से कुचलकर बाबा की हत्या की है। जबकि, डीआईजी का कहना है कि चंद्रशेखर की मौत हादसे में हुई है। वह गोतस्करी के शक में ट्रक की जांच कर रहे थे, तभी पीछे से एक ट्रक ने उस ट्रक को टक्कर मार दी। इस हादसे में बाबा की मौत हो गई।बाबा की मौत की खबर मिलते ही लोग उग्र हो गए। हजारों लोग मथुरा के छाता कस्बे में सड़क पर उतर आए। दिल्ली-कोलकाता नेशनल हाईवे जाम कर दिया। लोगों की पुलिस से भी झड़प हुई। पुलिस की गाड़ियां तोड़ दी गईं। कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा। आंसू गैस के गोले छोड़े गए।फरसा वाले बाबा आखिर कौन थे, जिनकी मौत के बाद इतना बवाल हुआ…जानिएफरसा बाबा लोगों के बीच फरसे के साथ दिखते थे। इसका वजन करीब 15 किलो बताया जाता है।बड़े भाई बोले- पूरा ब्रज रो रहा बाबा के भाई केशव सिंह बताते हैं- मेरे छोटे भाई की उम्र 45 साल थी। मूलरूप से फिरोजाबाद के सिरसागंज तहसील के लंगड़ा के रहने वाले थे। बाबा ने शादी नहीं की है। परिवार में हम दोनों ही सगे भाई थे। मेरे 4 बेटे, 4 बहुएं, 7 पोते और 6 पोतियां हैं।हम लोग अयोध्या में रहते हैं। पहले बाबा भी हमारे साथ अयोध्या में रहते थे। जब अयोध्या की मस्जिद टूटी थी, उसी समय ये अयोध्या से मथुरा आ गए थे। एक बार हम लोग मथुरा आकर उन्हें अयोध्या ले गए थे। लेकिन, वो फिर मथुरा लौट गए थे।हम लोग कभी-कभी उनसे मिलने मथुरा आते रहते थे। आज उनके न रहने पर पूरा ब्रज रो रहा है। हमें सुबह 4 बजे पता चला। यह सब साजिश के तहत किया गया है। हम न्याय चाहते हैं। दोषियों को फांसी होनी चाहिए।यह बाबा के भाई केशव सिंह हैं, जिनका कहना है कि साजिश के तहत हत्या की गई है। दोषियों को फांसी होनी चाहिए।गोरक्षा के लिए मशहूर थे फरसा वाले बाबाचंद्रशेखर बाबा का घर मथुरा में बरसाना रोड पर छाता इलाके के आजनौंख गांव में है। उनके घर के बाहर एक बोर्ड लगा है। उस पर लिखा है- लाख करो तीर्थ, पूजन करो हजार, गोमाता न बचा सके, सब कुछ है बेकार।इसी बोर्ड में लिखा है- गाय बचाने, लंगड़ी-लूली, असहाय, एक्सीडेंट और मृतक गाय के शास्त्र युक्त अंतिम संस्कार के लिए संपर्क करें। नीचे एक मोबाइल नंबर भी दिया गया है। जब इस नंबर पर कोई फोन करता है, तो चंद्रशेखर की फरसा वाली टीम पहुंचती है। गाय का बकायदा अंतिम संस्कार करती है, खुद चंद्रशेखर भी जाते थे।स्थानीय लोग बताते हैं कि फरसा वाले बाबा हमेशा गाय के लिए समर्पित रहे। शुरुआत में बरसाना इलाके में गायों को लेकर जब भी कोई समस्या सामने आती, लोग बाबा को ही बताते। वह गायों की मदद करके धीरे-धीरे इलाके में प्रसिद्ध हो गए।फरसा वाले बाबा के सोशल मीडिया पर कई वीडियो हैं, जिनमें वो युवाओं से गायों की सुरक्षा करने के लिए कह रहे हैं।खुद फरसा और साथी तलवार लेकर चलते थे चंद्रशेखर अपने साथ हमेशा फरसा लेकर चलते थे। बस इसी वजह से लोग उन्हें फरसा वाले बाबा कहते थे। उनके साथ तीन अन्य लोग भी रहते थे, इनके कंधों पर तलवार लटकी होती थी। तलवार लेकर चलने को लेकर वह कहते थे- कई बार हमारे ऊपर गोतस्करों ने हमला किया, जान से मारने की कोशिश की। इसके बाद हमारे साथियों ने कहा कि अब हम भी आपके साथ हथियार लेकर ही रहेंगे, इसलिए मैं फरसा और साथी तलवार लेकर चलते हैं। ये कोई अवैध नहीं है।नमस्कार नहीं, जय गोमाता बोलते थे लोग कहते हैं- बाबा की एक आदत थी, वो कभी नमस्कार और प्रणाम नहीं कहते थे, न ही सुनना पसंद करते थे। इसकी जगह जय गोमाता, जय गोपाल बोलते थे। उन्होंने घर पर ही गोशाला खोल रखी थी। इसमें 350 से 400 गाय और नंदी हैं। इनमें बहुत कम गाय ऐसी हैं, जो दूध देती हैं।फरसा बाबा जानवरों के लिए स्नेह रखते थे। ऐसे कई वीडियो उनके पेज पर पोस्ट हैं।गाय के लिए पैसा नहीं लेते थे बाबा अपनी गोशाला में गाय को पालने के लिए किसी से कोई पैसा नहीं लेते थे। वह लोगों से चारा लेते थे। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि मुझे कभी इनके लिए चारा मांगने की जरूरत ही नहीं पड़ती थी।लोग खुद आते और कहते थे कि मेरे खेत से चारा काट लीजिए। बहुत सारे ऐसे लोग होते हैं, जो बाजरा-धान जैसी चीजें देकर चले जाते हैं। इन गायों की देखभाल के लिए हमारे यहां 10 से 15 लड़के हैं। यहां कोई चेला-चेली जैसी बात नहीं है। सभी मिलकर गोमाता की सेवा और रक्षा करते हैं।बाबा का अपना एक यूट्यूब चैनल भी है, जिस पर वह गायों की सेवा करते हुए का वीडियो शेयर थे। कई ऐसे भी वीडियो मिले, जिनमें गाय की नहर में गिरने या सड़क पर एक्सीडेंट से मौत हो गई थी। बाबा वहां अपने गोशाला की गाड़ी से पहुंचते और उस गाय का अंतिम संस्कार करवाते थे।रात में हाईवे पर करते गोतस्करों का पीछा चंद्रशेखर सुबह 9 बजे से 3 बजे तक गोशाला और आसपास के इलाकों में रहते थे। 3 से 6 बजे तक वह चौराहों पर गाय की निगरानी करते थे। कोई उन


Source: Dainik Bhaskar March 21, 2026 21:23 UTC



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