Shareपाकिस्तानी शायर फैज अहमद फैज ने 1979 में जनरल जियाउल हक के मार्शल लॉ के दौर में अपनी नज़्म 'हम देखेंगे' लिखी थी. एशिया के अलग-अलग हिस्सों में जब भी हुक़ूमत के खिलाफ कोई आंदोलन चलता है तब इस गीत को याद किया जाता है. आईआईटी कानपुर में भी जब कुछ छात्रों ने जामिया मिल्लिया के समर्थन में आंदोलन किया तो उनको ये गीत याद आया. उन छात्रों को अपने छोटे से आंदोलन के लिए क्या कुछ झेलना पड़ा- ये कहानी अलग है, लेकिन जिन बातों की वजह से इस आंदोलन को गैरकानूनी बताया जा रहा है, उनमें फैज की ये नज़्म भी है. अब एक कमेटी तय करेगी कि ये हिंदू विरोधी है या नहीं?
Source: NDTV January 01, 2020 18:11 UTC