डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पाकिस्तान ने अपने पड़ोसी देश अफगानिस्तान के खिलाफ खुलेआम युद्ध छेड़ दिया है और अफगानिस्तान भी मुंह तोड़ जवाब दे रहा है। सैन्य दृष्टि से पाकिस्तान का पलड़ा भारी होने के बावजूद अगर संघर्ष लंबा चला तो अफगान तालिबान पाकिस्तान को बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं। आइये जानते हैं कैसे.....पूर्व अफगान सरकार व अमेरिकी सेना के हथियार अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के पास पूर्व अफगान और विदेशी सेनाओ द्वारा छोड़े गए सैन्य उपकरण मौजूद हैं। अफगानिस्तान काफी हद तक अमेरिकी सेना द्वारा छोड़े गए सैन्य उपकरणों और साजो-सामान पर निर्भर है।अफगान सेना सोवियत-युग के मुख्य युद्धक टैंक, बख्तरबंद गाड़ियों और स्वायत्त वाहनों सहित लड़ाकू विमानों का भी उपयोग करती है, लेकिन इनकी सटीक संख्या अज्ञात है। उनके पास मौजूद तोपखाने की सटीक संख्या भी ज्ञात नहीं है, जो कम से कम तीन अलग-अलग प्रकार के हैं।गुरिल्ला युद्ध में माहिर हैं अफगान लड़ाके अफगान सेना को गुरिल्ला युद्ध में महारत हासिल है, क्योंकि उसने दशकों तक अमेरिका और सोवियत संघ जैसी महाशक्तियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। भारी भरकम सैन्य शक्ति के बावजूद इन दोनों को पीछे हटना पड़ा था। अफगान सेना को भौगोलिक स्थिति का भी मजबूत लाभ प्राप्त है, जहां वे छिप सकते हैं, भाग सकते हैं और घात लगाकर हमले कर सकते हैं।अगर पाकिस्तान अफगानिस्तान में पूरी ताकत से युद्ध छेड़ने का फैसला करता है, तो उसे भारी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इस तरह के लंबे युद्ध में अफगानिस्तान की युद्ध विशेषज्ञता उसकी मदद करेगी और पाकिस्तानी सेना के लिए काफी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। अगर युद्ध छोटा हुआ तो पाकिस्तान का पलड़ा भारी रहेगा।
Source: Dainik Jagran February 28, 2026 03:00 UTC