जर्मन स्विस केमिस्ट क्रिश्चियन फ्रेडरिक स्कॉन्बीन को नवाचार बेहद पसंद था। वे अक्सर घर में ही आविष्कार करने बैठ जाते। इस कारण कई बार घर के सामान को नुकसान भी पहुंच चुका था। उनकी पत्नी जब देखतीं कि घर के कीमती सामान को नुकसान पहुंच रहा है, तो क्रोधित होकर बोलतीं, ‘इतना तो आप कमाते भी नहीं हैं, जितना आलतू-फालतू के काम करके गंवा देते हैं, और साथ ही घर के सामान का नुकसान करते हैं सो अलग।’ पत्नी की बात सुनकर भी स्कॉन्बीन चुपचाप अपने काम में लगे रहते। उन्हें पता था कि पत्नी से बहस करने का अर्थ होगा, अपना पूरा दिन खराब करना।शुक्रवार को खाएं ये 5 चीजें, बनेगी सेहत, चमकेगी किस्मतवे जानते थे कि उनकी पत्नी सही थीं, लेकिन वह भी क्या करते, उन्हें नई-नई खोजें करने का बेहद शौक था। अपने शौक को पूरा करने के लिए उन्हें घर से अच्छा कहीं लगता ही न था। एक दिन पत्नी की अनुपस्थिति में वे अपने आविष्कार में लगे थे कि अचानक कुछ मिश्रण किचन टेबल पर छलक गया। यह देखते ही स्कॉन्बीन की सांस अटक गई कि अब पत्नी की डांट से बचना नामुमकिन है। उन्होंने तुरंत एक कॉटन की एप्रिन उठाई, टेबल पर छलके द्रव को साफ किया और एप्रिन को आग के पास सूखने के लिए टांग दिया।आपकी हथेली में है मोटी जीवनरेखा, जानें कैसी होगी संतान, क्या परिणामअचानक एक जोरदार विस्फोट हुआ। यह देखकर स्कॉन्बीन दंग रह गए। जांच की तो पाया कि कॉटन के सेल्युलोज पर ‘नाइट्रोजन’ की प्रक्रिया के चलते ऐसा हुआ। दरअसल अनजाने में ही स्कॉन्बीन ने ‘नाइट्रोसेल्युलोज’ का आविष्कार कर दिया था। इसी को गनपाउडर या गन-कॉटन कहा गया। उनके इस आविष्कार की बाजार में बेहद सराहना हुई। आविष्कार बेचने से वे आर्थिक रूप से संपन्न हो गए। यह देखकर उनकी पत्नी को भी अहसास हो गया कि यह सब स्कॉन्बीन की धुन के चलते ही हो पाया।संकलन : रेनू सैनी
Source: Navbharat Times August 18, 2020 05:37 UTC